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बिहार चुनाव: ललन सिंह विवादित टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री के खिलाफ FIR,

ललन सिंह विवादित टिप्पणी

बिहार चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी नेताओं के खिलाफ ललन सिंह विवादित टिप्पणी देने के मामले में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री और जेडी(यू) के वरिष्ठ नेता ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) के खिलाफ बिहार के मोकामा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब सोशल मीडिया पर उनके बयान का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे।

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पटना ज़िला प्रशासन ने वीडियो फुटेज की जाँच के बाद लिया एक्शन

पटना ज़िला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई की। ज़िला प्रशासन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट (X पर) के माध्यम से बताया कि उनकी वीडियो निगरानी टीम (Video Monitoring Team) ने फुटेज की गहन जाँच की। जाँच के बाद, प्रशासन ने पुष्टि की कि इस मामले में श्री ललन सिंह उर्फ़ श्री राजीव रंजन सिंह के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पटना के ज़िला मजिस्ट्रेट-सह-निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में भी इस बात की पुष्टि की गई कि निगरानी दल द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

क्या थी वह आपत्तिजनक टिप्पणी जिस पर मचा बवाल?

ऑनलाइन सामने आए वीडियो फुटेज में, जेडी(यू) नेता ललन सिंह को पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे विपक्षी नेताओं को मतदान के दिन उनके घरों से बाहर निकलने से रोकें। उनकी टिप्पणी सीधे तौर पर मतदाताओं को डराने-धमकाने और उनके मताधिकार के प्रयोग में बाधा डालने का संकेत दे रही थी।

सिंह ने कथित तौर पर कहा, “कुछ नेता ऐसे होते हैं जिन्हें मतदान के दिन घरों से बाहर नहीं निकलने देते। उन्हें अंदर ही रखें। अगर वे हंगामा करते हैं, तो उन्हें वोट डालने ले जाएँ और फिर आराम करने के लिए घर भेज दें।” केंद्रीय मंत्री के इस बयान की चौतरफा आलोचना शुरू हो गई। उनके बयान की भाषा एक दबंग व्यवहार को दर्शाती है, जिसे चुनाव आयोग के नियमों का खुला उल्लंघन माना गया।

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अनंत सिंह के लिए प्रचार के दौरान दिया गया था बयान

यह विवादास्पद बयान ललन सिंह ने मोकामा विधानसभा क्षेत्र में जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार अनंत सिंह के लिए प्रचार करते हुए दिया था। अनंत सिंह वर्तमान में बेउर जेल में बंद हैं। उन पर गैंगस्टर से नेता बने 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप है, जिनकी 27 अक्टूबर को राजनीतिक समूहों के बीच झड़प के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

यादव की हत्या मोकामा विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज पार्टी (जेएसपी) और जनता दल (यूनाइटेड) के समर्थकों के बीच झड़प के बाद 30 अक्टूबर को हुई थी। इस हत्या के मामले में अनंत सिंह और दो अन्य को गिरफ्तार किया गया था। जेल में बंद उम्मीदवार के लिए प्रचार करते समय इस तरह की ललन सिंह विवादित टिप्पणी से चुनावी माहौल में तनाव और बढ़ गया।

आरजेडी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस वीडियो को सोशल मीडिया (X) पर साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया। आरजेडी ने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी तीखे सवाल उठाए।

राजद ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर लिखा, “केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, चुनाव आयोग की छाती पर बुलडोजर चलाते हुए कह रहे हैं कि वोट के दिन गरीबों को घर से बाहर न निकलने दें! उन्हें घर में बंद कर दें; अगर वो हाथ-पैर मारें तो उन्हें साथ ले जाकर वोट डालने दें। कहाँ है मरा हुआ आयोग?

” राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती ने भी इस वीडियो को पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग से पूछा, “क्या आप जागेंगे और इस वीडियो की सत्यता की जाँच करेंगे जिसमें ऐसा दबंग व्यवहार दिखाया गया है?”

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कांग्रेस ने भी भाजपा-जदयू गठबंधन पर किया तीखा हमला

विपक्षी गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले को लेकर भाजपा-जदयू गठबंधन पर हमला बोला। कांग्रेस ने कहा, “जो लोग भाजपा-जदयू के खिलाफ वोट करने जा रहे हैं, उन्हें चुनाव के दिन अपने घरों से बाहर न निकलने दें।

क्या ‘निष्पक्ष’ चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई करेगा? या हमेशा की तरह भाजपा-जदयू नेताओं की पीठ थपथपाता रहेगा?” कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ललन सिंह विवादित टिप्पणी गठबंधन की रणनीति का हिस्सा हो सकती है जिसका उद्देश्य लोकतंत्र को कमजोर करना है।

प्राथमिकी से पहले ललन सिंह को जारी हुआ था नोटिस

यह ध्यान देने योग्य है कि पटना ज़िला प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने से पहले ही, चुनाव आयोग ने मोकामा में ललन सिंह की कथित टिप्पणी को लेकर उन्हें नोटिस जारी कर दिया था और इस पर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा था।

हालांकि, बाद में वायरल वीडियो के फुटेज की विस्तृत जाँच के बाद जिला प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की। इस तरह चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह पर कानूनी शिकंजा कस गया।

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बिहार चुनाव की महत्वपूर्ण तिथियाँ

बिहार की 243 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को निर्धारित है। इन दोनों चरणों के मतदान के बाद, मतगणना 14 नवंबर को होगी। केंद्रीय मंत्री पर एफआईआर दर्ज होने की इस घटना ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

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