मोनोरेल पटरी से उतरी: वडाला डिपो में परीक्षण के दौरान बड़ा हादसा,
मोनोरेल पटरी से उतरी और यह बुधवार सुबह वडाला डिपो में हुए एक बड़े हादसे की पहली और सबसे बड़ी खबर है। मुंबई मोनोरेल की सेवाएँ जहाँ पहले से ही 20 सितंबर, 2025 से निलंबित हैं (नए रेक लगाने, CBTC-आधारित सिग्नलिंग सिस्टम को चालू करने और समग्र बेड़े और बुनियादी ढाँचे के उन्नयन के लिए), वहीं ट्रायल रन के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमएमओसीएल) द्वारा उन्नत प्रणाली परीक्षणों के बीच, एक नई रेलगाड़ी का डिब्बा पटरी से उतर गया, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
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परीक्षण के दौरान हुई घटना का विवरण
बुधवार सुबह वडाला डिपो के बाहर ट्रायल रन के दौरान मुंबई मोनोरेल का एक नया डिब्बा पटरी से उतर गया और गाइड बीम से टकरा गया, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ। अधिकारियों ने बताया कि नई रेलगाड़ी का ट्रायल रन चल रहा था और उसे एक गाइडवे बीम से दूसरी बीम पर शिफ्ट किया जा रहा था, तभी वह फिसल गई, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
गाइडवे बीम रेलवे ट्रैक के बराबर होता है, जबकि स्विच मोनोरेल को एक बीम से दूसरे बीम पर जाने में मदद करता है। एक सूत्र ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि यह दुर्घटना तब हुई जब ट्रेन के ऊपर से गुज़रते समय एक स्विच अपनी स्थिति बदल गया, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेन गाइडवे बीम से उतर गई।
दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि मोनोरेल रैक हवा में ऊपर उठ गया और लगभग एक साल पुराने मोनोरेल के एक डिब्बे का निचला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना सुबह 9.25 बजे हुई।
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तकनीकी विफलता या ‘नियंत्रित परिदृश्य’?
एमएमएमओसीएल के अधिकारियों ने बताया कि वे अपने चल रहे तकनीकी उन्नयन कार्यक्रम के तहत उन्नत प्रणाली के कई परीक्षण कर रहे थे। महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमएमओसीएल) के अधिकारियों ने बताया कि इन परीक्षणों में मोनोरेल प्रणाली पर नई संचार-आधारित ट्रेन नियंत्रण (सीबीटीसी) सिग्नलिंग तकनीक का परीक्षण भी शामिल है, जिसका कार्यान्वयन इस परियोजना के लिए नामित ठेकेदार मेधा एसएमएच रेल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह अभ्यास पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में, सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए किया गया था। उनका दावा था कि ये परीक्षण चरम या ‘सबसे खराब स्थिति’ के परिदृश्यों का अनुकरण करने के लिए डिज़ाइन किए गए थे ताकि सिस्टम की प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन किया जा सके और वास्तविक तैनाती से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित की जा सके। एमएमएमओसीएल ने कहा, “इसलिए, ऐसी नियंत्रित परिस्थितियाँ मानक परीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा हैं।”
अधिकारियों का विरोधाभासी दावा और घायलों की स्थिति
एमएमएमओसीएल और एमएमआरडीए के अधिकारियों ने इस घटना को कमतर आंकने की कोशिश की और इसे “नियमित सिग्नलिंग परीक्षणों… जो पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में किए गए” के दौरान हुई एक “मामूली घटना” करार दिया। अधिकारियों ने लगातार दावा किया कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ और स्थिति को तुरंत नियंत्रण में कर लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेन में कोई यात्री नहीं था। हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट ने इस दावे का खंडन किया। रिपोर्ट के अनुसार, तीन कर्मचारी—सोहेल आरिफ पटेल (27), वी जगदीश (28) और बुधजी प्रमोद परब (26)—को चोटें आईं। कर्मचारियों को प्रभावित ट्रेन से बचाया गया और सायन के एलटीएमजी अस्पताल ले जाया गया।
पटेल के बाएँ हाथ में गंभीर चोट आई, जगदीश के सिर, पीठ के निचले हिस्से और टखने में चोट आई, जबकि परब की दाहिनी जांघ में चोट आई। डीन डॉ. मोहन जोशी ने पुष्टि की कि “तीनों की हालत स्थिर है और उन्हें भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है।
” इसके अलावा, दमकल और पुलिस को मौके पर पहुंचने के बाद, अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर वापस लौटने को कहा कि यह घटना बचाव अभियान के लायक नहीं थी और यह तैयारियों का आकलन करने के लिए एक मॉक ड्रिल का हिस्सा थी। यह विरोधाभास घटना की गंभीरता पर संदेह पैदा करता है।
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बचाव कार्य की विफलता और रैक को नुकसान
दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि 12 घंटे बाद भी मोनोरेल को वापस कार डिपो तक लाने के प्रयास असफल रहे। अधिकारियों ने प्रभावित डिब्बे को पटरी पर लाने के लिए एक क्रेन का इस्तेमाल किया, लेकिन यह प्रयास भी विफल रहा। इस घटना में न केवल ट्रेन के अंडरकैरिज को भारी नुकसान पहुँचा, बल्कि मोनोरेल ऑपरेटर सहित दो तकनीकी कर्मचारियों को कथित तौर पर चोटें भी आईं (जैसा कि मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है)।
इस बीच, एमएमएमओसीएल ने नागरिकों से “घबराने” से मना किया और आश्वस्त किया कि ये केवल आंतरिक सिस्टम परीक्षण हैं और नियमित परीक्षण अप्रभावित रहेंगे। परियोजना की समय-सीमा बनाए रखने और यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए, इनमें से कुछ परीक्षण छुट्टियों के दिनों में भी किए जा रहे हैं।
पुरानी तकनीकी समस्याओं का इतिहास
एमएमआरडीए की एक शाखा, एमएमएमओसीएल, 19.54 किलोमीटर लंबी मोनोरेल का संचालन और रखरखाव करती है, जिसे फरवरी 2014 में जनता के लिए खोला गया था। इसके उद्घाटन के बाद से, इस परिवहन लाइन पर कई दुर्घटनाएँ और व्यवधान देखे गए हैं।
लंबे समय से तकनीकी गड़बड़ियों, बंद होने और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करने के कारण, मोनोरेल यात्री सेवाएँ 20 सितंबर से ही निलंबित हैं। इस पृष्ठभूमि में, एक नई और आधुनिक प्रणाली (CBTC) के ट्रायल रन के दौरान मोनोरेल पटरी से उतरी (यह मोनोरेल पर इस तरह की पहली घटना थी), जिसने सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक जाँच को और गहरा कर दिया है।
एमएमएमओसीएल ने हालांकि वैश्विक सुरक्षा मानकों को अपनाने और मुंबई के लिए एक “सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीकी रूप से उन्नत” परिवहन प्रणाली प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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पटरी बदलने के दौरान हुई गड़बड़ी
सूत्रों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ट्रैक बदलने के दौरान तकनीकी खराबी के कारण ही मोनोरेल पटरी से उतरी होगी, हालांकि सटीक कारण की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकारी ने पुष्टि की कि गाइड बीम एक तरफ़ मुड़ी और ट्रेन दूसरी तरफ़ मुड़ गई, जिससे ट्रेन का अगला रैक बीम से टकराकर हवा में ऊपर उठ गया। ट्रैक बदलने के दौरान मोनोरेल रैक के फिसलने से आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू हुई। एमएमएमओसीएल के अनुसार, ऑपरेटर ट्रैक बदलने की कोशिश कर रहा था तभी रैक फिसल गया।
भविष्य की सुरक्षा और निगरानी की मांग
इस गंभीर घटना के बाद, चार सदस्यों वाली एक समिति मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस)—वह प्राधिकरण जो सार्वजनिक उपयोग के लिए मेट्रो रेल प्रणाली को प्रमाणित करता है—से मुंबई मोनोरेल को अपने दायरे में शामिल करने का अनुरोध करेगी।
यदि यह अनुरोध असफल रहा, तो समिति एक स्वतंत्र सुरक्षा निरीक्षक, अधिमानतः एक सेवानिवृत्त सीएमआरएस, को नियुक्त कर सकती है, जो मुंबई मोनोरेल की सुरक्षा प्रमाणित करने से पहले उसकी पूरी जाँच करेगा। अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा है कि “यात्री सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
” यह आवश्यक है कि इस घटना के सटीक कारणों की गहन जाँच हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और CBTC सिग्नलिंग तकनीक का सुरक्षित और सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
मुंबई की मोनोरेल पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब मोनोरेल पटरी से उतरी जैसी घटना हुई है। इससे पहले 2019 और 2022 में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की मोनोरेल प्रणाली को आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी की जरूरत है।
मुंबई मोनोरेल एशिया की सबसे लंबी परियोजनाओं में से एकपरिचालन सुरक्षा को लेकर पहले भी आलोचना हुईसरकार ने तकनीकी ऑडिट का निर्देश जारी किया



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