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वक्फ बिल विरोध को लेकर शिवसेना (यूबीटी) पर श्रीकांत शिंदे का तीखा हमला

श्रीकांत शिंदे का (यूबीटी) पर तीखा हमला

शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध करने पर उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा हिंदुत्व की रक्षा करने वाली थी।” जानें पूरा विवाद।

“आज यह स्पष्ट है कि यूबीटी आज किसकी विचारधारा अपना रही है और इस विधेयक का विरोध कर रही है,” महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने लोकसभा में यह बयान देकर राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक के विरोध में शिवसेना (यूबीटी) के रुख को “बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों के खिलाफ” बताया।

बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर बहस के दौरान श्रीकांत शिंदे ने यूबीटी गुट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा हिंदुत्व, देश की एकता और सभी धर्मों के सम्मान को बचाने वाली थी, लेकिन यूबीटी इससे भटक गई है।

श्रीकांत शिंदे के मुख्य तर्क:

  • “अगर बालासाहेब आज होते, तो यूबीटी के विरोध से दुखी होते।”
  • यूबीटी ने औरंगजेब के समर्थन जैसे बयान दिए हैं, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज को पकड़ने वाला औरंगजेब महाराष्ट्र के इतिहास में विवादास्पद व्यक्ति है।
  • “पहले अनुच्छेद 370 हटा, फिर तीन तलाक और CAA लागू हुआ। अब वक्फ बिल गरीबों के कल्याण के लिए है,” शिंदे ने केंद्र सरकार के कदमों का जिक्र किया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक क्या है?

  • वक्फ मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा कानून है।
  • संशोधन बिल का उद्देश्य इन संपत्तियों के पारदर्शी प्रशासन और दुरुपयोग रोकना बताया जा रहा है।
  • यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में वक्फ बोर्डों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की बात चल रही है।

यूबीटी की आपत्ति क्या है?

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने आरोप लगाया कि:

  • संसदीय समिति में विधेयक पर खंड-दर-खंड चर्चा नहीं हुई।
  • “सरकार की नीयत साफ नहीं है। यह बिहार चुनाव के लिए एजेंडा चला रही है,” सावंत ने कहा।

एनडीए की ‘मुस्लिम विरोधी’ छवि?

  • केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अनुच्छेद 370 हटाने, तीन तलाक पर प्रतिबंध और CAA जैसे कानून बनाए हैं।
  • विपक्ष इन्हें मुस्लिम-विरोधी कदम बताता है, जबकि सरकार का कहना है कि ये राष्ट्रीय एकता और सामाजिक न्याय के लिए हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:

  • वक्फ बिल पर बहस हिंदुत्व vs सेकुलरिज्म की लड़ाई का हिस्सा बन गई है।
  • शिवसेना के दोनों गुट बालासाहेब की विरासत पर दावेदारी कर रहे हैं, जो चुनावी रणनीति का अंग हो सकता है।

निष्कर्ष:

शिवसेना में टकराव का यह नया अध्याय दिखाता है कि हिंदुत्व की राजनीति और धर्मनिरपेक्षता के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि महाराष्ट्र और देश की जनता इस बहस को कैसे देखती है।

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