गोवा पुलिस रिमांड में लूथरा ब्रदर्स: गोवा नाइटक्लब अग्निकांड में होंगे कड़े सवाल
गोवा के अरपोरा स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी लूथरा भाइयों को दो दिन की गोवा पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। नाइटक्लब के मालिक, भाई गौरव और सौरभ लूथरा को मंगलवार को थाईलैंड से डिपोर्ट किए जाने के बाद दिल्ली लाया गया था। वे 6 दिसंबर को अपने क्लब में लगी आग के बाद कथित तौर पर देश छोड़कर भाग गए थे, जिस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की जान चली गई थी। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि दिल्ली कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद अब गोवा पुलिस उन्हें आगे की जांच के लिए गोवा ले जा रही है।
बुधवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आए विजुअल्स में दोनों भाइयों को पुलिस हिरासत में दिखाया गया। इससे पहले, गोवा पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया और दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। ड्यूटी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ट्विंकल चावला ने गोवा पुलिस को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड दी, ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से गोवा ले जाया जा सके और वहां की सक्षम अदालत में पेश किया जा सके।
दिल्ली कोर्ट में क्या हुआ: तीन दिन की मांग, मिली दो दिन की अनुमति
पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान, गोवा पुलिस ने जांच के लिए आरोपियों को गोवा ले जाने की अनुमति मांगी। पुलिस ने तीन दिन की रिमांड की मांग करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों को सुरक्षित रूप से ले जाने और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता है। हालांकि, कोर्ट ने गोवा पुलिस रिमांड की अवधि को दो दिन (48 घंटे) तक सीमित कर दिया। साथ ही, मजिस्ट्रेट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ट्रांजिट के दौरान आरोपियों को उनकी निर्धारित दवाएं और आवश्यक चिकित्सा देखभाल दी जाए।
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अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी उत्तरी गोवा के अरपोरा इलाके में स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ के मुख्य मालिक और पार्टनर हैं। परिसर में होने वाले संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, अनुमतियों और कार्यक्रमों पर उनका पूरा नियंत्रण था। पुलिस ने दलील दी कि जांच एक महत्वपूर्ण चरण में है और मामले की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए गोवा में उनकी हिरासत में मौजूदगी अनिवार्य है।
भीषण आग और सुरक्षा में चूक के गंभीर आरोप
यह दुखद घटना 6 दिसंबर की रात को हुई थी, जब नाइटक्लब में एक फायर शो आयोजित किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह कार्यक्रम पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना किया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि क्लब में उचित अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकासी बुनियादी ढांचा नहीं था। यहां तक कि ग्राउंड और डेक फ्लोर पर आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exits) भी नहीं थे, फिर भी जोखिम भरा फायर शो आयोजित किया गया।
इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि भीषण आग लग गई, जिसमें पर्यटकों और कर्मचारियों सहित 25 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। माना जाता है कि आग तब लगी जब इलेक्ट्रिक पटाखों का संपर्क वेन्यू की लकड़ी की छत से हुआ, जिससे आग तेजी से फैली। इस मामले में 7 दिसंबर को अरपोरा अंजुना पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) के साथ धारा 105, 125, 125(a), 125(b), और 287 के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। ये धाराएं लापरवाही, गैर-इरादतन हत्या और मानव जीवन को खतरे में डालने से संबंधित हैं।
थाईलैंड से डिपोर्टेशन और गिरफ्तारी की कहानी
हादसे के कुछ घंटों बाद ही, 7 दिसंबर को लूथरा भाई इंडिगो की फ्लाइट से थाईलैंड के फुकेट भाग गए थे। वे वहां इंडिगो होटल में रह रहे थे। उनके खिलाफ इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था और विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट सस्पेंड कर दिए थे। भारतीय अधिकारियों के अनुरोध पर थाई पुलिस ने 11 दिसंबर को फुकेट में दोनों को हिरासत में ले लिया। भारत-थाईलैंड प्रत्यर्पण ढांचे के तहत उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें डिपोर्ट किया गया।
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संयोग की बात है कि आरोपी इंडिगो की फ्लाइट से ही भारत से भागे थे और उसी एयरलाइन की फ्लाइट से उन्हें वापस लाया गया। बैंकॉक एयरपोर्ट के दृश्यों में भाइयों को मास्क पहने हुए और आव्रजन कर्मियों द्वारा कड़ी सुरक्षा में देखा गया। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें गोवा पुलिस की टीम ने हिरासत में लिया और मेडिकल चेकअप के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
गोवा में होगी कड़ी पूछताछ और जांच
अब जब लूथरा भाइयों को गोवा पुलिस रिमांड में ले लिया गया है, तो उन्हें जल्द से जल्द गोवा ले जाया जाएगा। पुलिस उपाधीक्षक (DySP) नीलेश राणे के अनुसार, उनके बुधवार सुबह 11 बजे तक गोवा पहुंचने की उम्मीद है, जहां उन्हें मापुसा में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) के सामने पेश किया जाएगा। गोवा राज्य की ओर से पेश हुए वकील सुरजेंदु शंकर दास ने पुष्टि की कि ट्रांजिट रिमांड मिल गई है।
जांचकर्ता अब उनसे नाइटक्लब के संचालन, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, इवेंट की अनुमतियों और उस घातक फायर शो को आयोजित करने में उनकी भूमिका के बारे में गहन पूछताछ करेंगे। पुलिस का कहना है कि लाइसेंस, कार्यक्रम की अनुमति और आंतरिक संचार जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी अभी बाकी है। पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट विष्णु जोशी ने कहा कि ये गिरफ्तारियां बैंकॉक से डिपोर्ट किए जाने के बाद ही संभव हो पाई हैं।
पहले खारिज हो चुकी थी अग्रिम जमानत याचिका
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने पहले ही दिल्ली की एक अदालत में ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्होंने चार हफ्ते की मोहलत मांगी थी ताकि थाईलैंड से लौटने पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार न किया जाए। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस स्तर पर आरोपी की संलिप्तता का संकेत देने के लिए पर्याप्त सामग्री है और आगे की जांच गोवा की अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगी।
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अन्य सहयोगियों की भी हुई गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस ने नाइटक्लब के संचालन से जुड़े कई अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है। इनमें गुरुग्राम निवासी अजय गुप्ता, दिल्ली के राजीव मोदक और प्रियांशु ठाकुर, साथ ही उत्तर प्रदेश के राजवीर सिंघानिया, विवेक सिंह और भरत कोहली शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इस हादसे के पीछे एक बड़ी लापरवाही और नियमों की अनदेखी है, जिसकी पूरी तरह से जांच होना जरूरी है।
न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार
25 लोगों की जान लेने वाला यह अग्निकांड गोवा के हाल के इतिहास में नाइटक्लब में हुई सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। 10 दिनों तक कानून की पकड़ से दूर रहने के बाद अब मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। गोवा पुलिस रिमांड मिलने के बाद उम्मीद जगी है कि इस मामले की तह तक जाया जा सकेगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा। यह मामला न केवल सुरक्षा मानकों की पोल खोलता है बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि कैसे बिना उचित अनुमति के इस तरह के खतरनाक इवेंट आयोजित किए जा रहे थे।
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