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ऑपरेशन सिंदूर पर पृथ्वीराज चव्हाण का दावा: पहले दिन ही हार गया था भारत

पृथ्वीराज चव्हाण का दावा

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने देश के सैन्य इतिहास और हालिया घटनाक्रमों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पृथ्वीराज चव्हाण का दावा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पहले ही दिन भारत को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि चार दिनों तक चले इस संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) पूरी तरह से जमीन पर थी और हमारे विमानों को मार गिराया गया था। चव्हाण का यह बयान सरकार के उन दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें एक त्वरित और निर्णायक जीत की बात कही गई थी। उनके इस बयान ने न केवल ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि भारतीय सेना की तैयारियों और रणनीति पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

भारतीय वायु सेना के प्रदर्शन पर उठाए गंभीर सवाल

पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने बहुत ही तीखे शब्दों में भारतीय वायु सेना की भूमिका पर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना और जोखिम के बीच भारतीय वायु सेना “पूरी तरह से ज़मीन पर थी” (Completely Grounded)। चव्हाण ने कहा कि एक भी विमान ने उड़ान नहीं भरी। उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि अगर ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा जैसे प्रमुख एयरबेसों से कोई भी विमान उड़ान भरता, तो पाकिस्तान द्वारा उसे मार गिराए जाने की बहुत अधिक संभावना थी। इसी डर और जोखिम के कारण वायु सेना को पूरी तरह से ज़मीन पर उतार दिया गया था। उनका यह बयान सुरक्षा बलों के मनोबल और रणनीतिक फैसलों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

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30 मिनट की हवाई लड़ाई और हार का तर्क

चव्हाण ने घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए कहा कि 7 तारीख को एक आधे घंटे की हवाई लड़ाई हुई थी, और उसमें भारत को मुंह की खानी पड़ी। उन्होंने जोर देकर कहा, “पहले दिन (ऑपरेशन सिंदूर के), हम पूरी तरह से हार गए थे। 7 तारीख को आधे घंटे की हवाई झड़प हुई, उसमें हम पूरी तरह से हार गए, चाहे लोग इसे मानें या न मानें। भारतीय विमानों को मार गिराया गया।” पृथ्वीराज चव्हाण का दावा है कि उस दिन जो कुछ भी हुआ, वह भारत के पक्ष में नहीं था और नुकसान काफी ज्यादा था। उनका कहना है कि लोगों को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए कि उस संक्षिप्त संघर्ष में भारतीय पक्ष को भारी क्षति हुई थी और वायु सेना प्रभावी रूप से जवाबी कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं थी।

12 लाख सैनिकों की फौज की जरूरत पर प्रश्नचिह्न

इस विवादित विश्लेषण के साथ ही पृथ्वीराज चव्हाण ने देश की रक्षा नीति और सेना के ढांचे पर भी बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने बड़ी स्थायी सैन्य ताकतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि आधुनिक दौर में युद्ध जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में लड़े जाएंगे। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में, क्या हमें सच में 12 लाख सैनिकों की विशाल सेना बनाए रखने की ज़रूरत है, या हम उनसे कुछ और काम करवा सकते हैं? उनका तर्क था कि भविष्य के युद्ध तकनीक, मिसाइलों और हवाई हमलों पर आधारित होंगे, इसलिए बड़ी पैदल सेना (Infantry) की प्रासंगिकता पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह बयान रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों के बीच एक तीखी बहस का विषय बन सकता है।

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सेना का एक किलोमीटर भी मूवमेंट नहीं हुआ

अपने तर्कों को सही साबित करने के लिए चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “हाल ही में, हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा, सेना का एक किलोमीटर भी मूवमेंट नहीं हुआ। दो या तीन दिनों में जो कुछ भी हुआ, वह केवल हवाई युद्ध और मिसाइल युद्ध था।” उनका कहना था कि जब संघर्ष पूरी तरह से आकाश और मिसाइलों तक सीमित था, तो जमीनी सेना की भूमिका नगण्य थी। उन्होंने भविष्यवाणी की कि भविष्य में भी युद्ध इसी तरह लड़े जाएंगे, जहां भौतिक रूप से सेनाओं का आमना-सामना कम होगा और तकनीक आधारित हमले ज्यादा होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को बदलने की जरूरत है।

सरकार और सेना का आधिकारिक पक्ष और खंडन

पृथ्वीराज चव्हाण के इन सनसनीखेज दावों के विपरीत, भारत सरकार और सेना का आधिकारिक पक्ष बिल्कुल अलग है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने के दावे एक डिफेंस अटैची के बयान के बाद सामने आए थे, जिसे लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी थी। हालांकि, भारत सरकार ने इंडोनेशिया में एक सेमिनार में डिफेंस अटैची द्वारा दी गई प्रस्तुति के बारे में आई रिपोर्टों का पुरजोर खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन टिप्पणियों को “संदर्भ से बाहर” लिया गया था और वे प्रस्तुति के “इरादे और मुख्य बात को गलत तरीके से पेश कर रही हैं”। भारत ने आधिकारिक तौर पर विमानों के नुकसान की किसी भी खबर को खारिज किया है और इसे भ्रामक बताया है।

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ऑपरेशन सिंदूर: राफेल, स्कैल्प और 100 आतंकियों का खात्मा

इस पूरे विवाद को समझने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि जानना आवश्यक है। यह ऑपरेशन 7 मई को पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी कार्रवाई की, जिससे 7 से 10 मई तक दोनों देशों के बीच संघर्ष हुआ। इस ऑपरेशन के दौरान, भारत ने आधिकारिक तौर पर दावा किया कि उसने अपने अत्याधुनिक राफेल जेट, SCALP मिसाइलों और HAMMER बमों का इस्तेमाल करके सिर्फ 23 मिनट में दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर दिया। भारत का कहना है कि इस कार्रवाई में 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया, जो भारतीय वायु सेना की शक्ति और सटीकता का प्रमाण है।

राजनीतिक भूचाल और बीजेपी का पलटवार

पुणे में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पृथ्वीराज चव्हाण का दावा और उनके द्वारा सेना की क्षमता पर उठाए गए सवालों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में “आतंकी ठिकानों” पर भारत की कार्रवाई को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि चव्हाण भी वही भाषा बोल रहे हैं जो राहुल गांधी अक्सर बोलते हैं। यह विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि एक तरफ सरकार इसे अपनी बड़ी सफलता मानती है, वहीं विपक्ष के वरिष्ठ नेता इसे हार और रणनीतिक विफलता बताकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

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