हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी: राज ठाकरे और अन्नामलाई के बीच छिड़ा जुबानी युद्ध
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पहचान और क्षेत्रवाद का मुद्दा गरमा गया है। ‘हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी’ का नारा हवा में गूंज रहा है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। यह पूरा विवाद 9 जनवरी को तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के उस विवादित चुनावी बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘बॉम्बे’ कोई महाराष्ट्रीयन शहर नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। इस बयान ने आग में घी का काम किया और रविवार को शिवाजी पार्क में अपनी रैली के दौरान राज ठाकरे ने 1960 के दशक के शिवसेना के दक्षिण भारतीयों के खिलाफ नारे को फिर से जिंदा कर दिया। इस नारे ने तमिल समुदाय के पुराने घावों को हरा कर दिया है, जिन्होंने अब राज ठाकरे से माफी की मांग की है।
मुंबई की पहचान पर अन्नामलाई का विवादित बयान और ठाकरे का गुस्सा
अन्नामलाई ने अपने भाषण में मुंबई को ग्लोबल सिटी बताते हुए इसे महाराष्ट्र के अधिकार क्षेत्र से बाहर जैसा पेश करने की कोशिश की थी। MNS प्रमुख राज ठाकरे ने रैली में उस बयान का एक वीडियो चलाया, जिससे उन्हें और उद्धव ठाकरे को गहरा गुस्सा आया। शिवसेना (UBT) के अखिल चित्रे ने भी यह वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि अन्नामलाई का बयान बीजेपी की असली मंशा को उजागर करता है, जो मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती है। राज ठाकरे ने अन्नामलाई का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘रसमलाई’ करार दिया, जिसके बाद विवाद ने एक गंभीर मोड़ ले लिया।
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अन्नामलाई का पलटवार: ‘धमकियों से डरने वाला नहीं हूं’
सोमवार को अन्नामलाई ने राज ठाकरे के ‘रसमलाई’ वाले तंज और शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ में दी गई धमकियों पर करारा जवाब दिया। ‘सामना’ में दी गई इस धमकी पर कि अगर वह फिर से मुंबई आए तो उनके पैर काट दिए जाएंगे, अन्नामलाई ने चेन्नई में पत्रकारों से कहा, “मैं मुंबई आऊंगा, जो करना है कर लो। अगर मैं ऐसी धमकियों से डरता, तो अपने पैतृक गांव में ही रहता।” उन्होंने ठाकरे भाइयों पर बाल ठाकरे की विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या वह इतने बड़े नेता बन गए हैं कि उनके खिलाफ जनसभाएं आयोजित करनी पड़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह शिवसेना संस्थापक का बहुत सम्मान करते हैं।
पहचान की जंग: क्या मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा नहीं है?
अपने बयान को दोहराते हुए अन्नामलाई ने तर्क दिया कि मुंबई को इंटरनेशनल कहना उसकी पहचान कम करना नहीं है। उन्होंने पूछा कि अगर पीएम मोदी को भारत का नेता कहने से उनकी गुजराती पहचान खत्म नहीं होती, या कामराज को राष्ट्रीय नेता कहने से उनकी तमिल पहचान कम नहीं होती, तो मुंबई को ग्लोबल कहने से मराठी भाई-बहनों की मेहनत कैसे कम हो गई? इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुंबई को इंटरनेशनल शहर कहना उसे महाराष्ट्र से अलग करना नहीं है। उन्होंने अन्नामलाई द्वारा ‘बॉम्बे’ शब्द के इस्तेमाल को उनकी हिंदी बोलने की कोशिश बताया और अपनी एक पुरानी गलती का जिक्र किया जब उन्होंने चेन्नई को मद्रास कह दिया था।
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बीजेपी का बचाव और लुंगी-पुंगी नारे पर तीखी प्रतिक्रिया
बीजेपी के एकमात्र तमिल विधायक कैप्टन तमिल सेल्वन ने फडणवीस का बचाव करते हुए कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में 90,000 दक्षिण भारतीय हैं और मुंबई की 13% आबादी दक्षिण भारतीय है। बीजेपी प्रवक्ता निरंजन शेट्टी ने भी राज ठाकरे के नारे पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी’ जैसे नारे उन मेहनतकश लोगों का अपमान हैं जो धोती और लुंगी पहनते हैं। शेट्टी ने लुंगी के वैश्विक महत्व को समझाते हुए इसे केरल से लेकर इंडोनेशिया और अफ्रीका तक का मुख्य पहनावा बताया और कहा कि मराठी मानुष के बच्चे अब बड़े और शिक्षित हो गए हैं, वे विकास और खोखली बयानबाजी के बीच फर्क समझते हैं।
एकनाथ शिंदे की नाराजगी और बीजेपी को दी गई चेतावनी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अन्नामलाई के बयानों से पूरी तरह किनारा कर लिया है। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा कि अन्नामलाई का बयान गलत था और उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। शिंदे ने कहा, “मैंने यह बात बीजेपी को साफ तौर पर बता दी है और वे मामले को देख रहे हैं।” शिंदे ने जोर देकर कहा कि मुंबई कोई रेलवे कोच नहीं है जिसे काटकर कहीं और जोड़ा जा सके। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई महाराष्ट्र का अविभाज्य हिस्सा है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
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सामना का तीखा प्रहार: ‘महाराष्ट्र विरोधी बयानों पर चुप्पी कायरता है’
शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ ने बीजेपी और शिंदे सरकार पर तीखा हमला बोला है। संपादकीय में अन्नामलाई और कृपाशंकर सिंह के बयानों पर सरकार की चुप्पी को “रीढ़विहीन समर्पण” और “नपुंसकता” करार दिया गया है। सामना ने आरोप लगाया कि फडणवीस-शिंदे शासन के तहत महाराष्ट्र की गरिमा बर्बाद हो रही है। संपादकीय में लिखा गया कि जो लोग खुद को ‘हीरा’ समझते थे, वे अब ‘खटमल’ (बीजेपी) से जुड़कर अपनी चमक खो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जानबूझकर तमिल समुदाय और शिवसेना के बीच टकराव पैदा कर रही है, जबकि ऐतिहासिक रूप से दोनों ने हिंदी थोपने के खिलाफ साथ लड़ाई लड़ी है।
बीएमसी चुनाव 2026: चुनावी माहौल में पुरानी रंजिशें ताजा
यह पूरा विवाद 15 जनवरी के बीएमसी चुनावों के ठीक पहले भड़का है। ‘हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी’ के नारे ने चुनाव को विकास के मुद्दों से हटाकर पहचान की राजनीति पर ला खड़ा किया है। जहाँ एक तरफ बीजेपी मेट्रो और कोस्टल रोड जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर वोट मांग रही है, वहीं ठाकरे गुट मराठी अस्मिता के मुद्दे को हवा दे रहा है। कृपाशंकर सिंह के उस बयान ने भी आग भड़काई जिसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई का अगला मेयर हिंदी भाषी होगा। अब देखना यह है कि आने वाले चुनावों में मुंबई की जनता विकास को चुनती है या ‘रसमलाई’ और ‘लुंगी’ के इर्द-गिर्द बुनी जा रही इस भावनात्मक राजनीति को।
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