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ED जांच पर रोक लगाते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने रांची पुलिस की कार्रवाई थामी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा I-PAC ऑफिस पर छापे के मामले में कोलकाता पुलिस के खिलाफ की गई कार्रवाई के ठीक एक दिन बाद, झारखंड हाई कोर्ट ने ED जांच पर रोक लगाते हुए प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ रांची पुलिस की जांच पर अंतरिम स्थगन दे दिया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की बेंच ने एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेयजल आपूर्ति घोटाले के आरोपी संतोष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई FIR के संबंध में ED अधिकारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, अदालत ने रांची के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) को निर्देश दिया कि वे ED ऑफिस की सुरक्षा सुनिश्चित करें और चेतावनी दी कि यदि वहां कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए रांची के SSP सीधे जिम्मेदार होंगे।

पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच तीखा टकराव

यह कानूनी हस्तक्षेप राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच उपजे उस तनाव के बाद आया है, जब ED अधिकारियों ने अपने रांची जोनल ऑफिस को पुलिस बल से घिरा पाया था। एक रात पहले, राज्य पुलिस ने ED को ईमेल कर जानकारी दी थी कि उनके दो अधिकारियों—एक असिस्टेंट डायरेक्टर और एक असिस्टेंट एनफोर्समेंट डायरेक्टर—के खिलाफ जबरदस्ती और मारपीट के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। यह शिकायत झारखंड पेयजल और स्वच्छता विभाग के पूर्व कैशियर संतोष कुमार ने दर्ज कराई थी। ED जांच पर रोक का यह आदेश उस समय आया है जब राज्य के हाई-प्रोफाइल लोगों से जुड़ी जांच के कारण माहौल पहले से ही गर्माया हुआ है। ED के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस की कार्रवाई एजेंसी की वैधानिक जांच को पटरी से उतारने की एक “पूर्व नियोजित रणनीति” है।

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पेयजल घोटाला और संतोष कुमार का “पानी जग” ड्रामा

पूरा विवाद पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) के कर्मचारी संतोष कुमार से जुड़ा है, जिसे 2024 में लार्सन एंड टुब्रो के नाम पर फर्जी पेयी ID के जरिए करीब 3 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ED का दावा है कि कुमार ₹23 करोड़ के कथित घोटाले का मुख्य आरोपी है और एजेंसी अब तक ₹9 करोड़ बरामद कर चुकी है। 12 जनवरी की घटना का जिक्र करते हुए ED ने बताया कि पूछताछ के दौरान कुमार ने अचानक एक पानी का जग उठाया और स्वेच्छा से उसे अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें मामूली चोट आई। इसके विपरीत, कुमार ने आरोप लगाया कि ED ऑफिस में उनके साथ मारपीट और हिरासत में उत्पीड़न किया गया, जिसके आधार पर रांची के एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ।

रांची पुलिस की रेड और हाई कोर्ट की फटकार

गुरुवार को एक दुर्लभ घटनाक्रम में रांची पुलिस की टीम, जिसमें एक DSP रैंक का अधिकारी और एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन का इंचार्ज शामिल था, ED के जोनल ऑफिस पहुंची और कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। पुलिस का मकसद कथित हमले की जांच के लिए CCTV फुटेज इकट्ठा करना था। ED जांच पर रोक लगाते हुए जस्टिस द्विवेदी ने इस रेड के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका मूक दर्शक नहीं रह सकती। अदालत ने निर्देश दिया कि ED ऑफिस के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। ED ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एजेंसी के ऑफिस को “क्राइम सीन” मानने की कोशिश की, जबकि एजेंसी द्वारा कुमार के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायत पर पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया।

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सुरक्षा की कमान अब अर्धसैनिक बलों के हाथ

हाई कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश पारित किए हैं। कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को रांची में ED ऑफिस और उसके अधिकारियों की सुरक्षा के लिए CISF, BSF, CRPF या किसी अन्य अर्धसैनिक बल को तैनात करने का आदेश दिया है। ED जांच पर रोक के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया गया है कि केंद्रीय एजेंसियों को राज्य में बिना किसी भय के काम करने का वातावरण मिले। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है, जबकि निजी प्रतिवादी संतोष कुमार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दस दिन का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 9 फरवरी को तय की गई है।

विपक्ष का हेमंत सोरेन सरकार पर हमला

इस घटनाक्रम ने राज्य में बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस कार्रवाई के पीछे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों के सबूतों को नष्ट करने की साजिश हो सकती है। मरांडी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पुलिस रेड की आड़ में उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है जो करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच से संबंधित हैं। यह स्थिति पिछले साल की उस घटना की याद दिलाती है जब CM सोरेन ने स्वयं अपने दिल्ली आवास पर तलाशी के बाद वरिष्ठ ED अधिकारियों के खिलाफ SC/ST पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने मानसिक और भावनात्मक नुकसान का दावा किया था।

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CBI जांच की मांग पर बाद में होगा विचार

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में न केवल पुलिस जांच को रद्द करने की मांग की है, बल्कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का भी अनुरोध किया है। ED का तर्क है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती क्योंकि वह खुद जांच को बाधित करने में शामिल है। हालांकि, हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि CBI जांच की याचिका पर बाद के चरण में विचार किया जाएगा। फिलहाल, अदालत ने FIR से होने वाली पुलिस जांच को पूरी तरह रोक दिया है। यह विवाद दिखाता है कि किस तरह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।

गृह मंत्रालय के निर्देश और भविष्य की कानूनी दिशा

देश भर में ED संस्थानों पर बढ़ते खतरों के आकलन के बाद, गृह मंत्रालय ने पहले ही सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए थे। झारखंड हाई कोर्ट का यह फैसला उस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा में किसी भी चूक के लिए अब सीधे तौर पर जिले के उच्चाधिकारियों की जवाबदेही होगी। संतोष कुमार के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ED के फोन आने के बाद ही ऑफिस गए थे, लेकिन कोर्ट प्रथम दृष्टया एजेंसी के तर्कों से सहमत दिखा कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी नजरें 9 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जब राज्य सरकार और केंद्र सरकार अपना विस्तृत पक्ष रखेंगे।

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