GBA चुनाव बैलेट पेपर से होंगे, जानिए मतदान का पूरा शेड्यूल
GBA चुनाव बैलेट पेपर राज्य चुनाव आयोग के एक महत्वपूर्ण परामर्श के बाद अब बेंगलुरु शहर निगम चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा। यह चुनाव संभावित रूप से 25 मई के बाद आयोजित किए जाएंगे।
राज्य चुनाव आयुक्त जी.एस. संगरेशी ने स्पष्ट किया है कि बैलेट पेपर मतदान का एक स्थापित और विश्वसनीय तरीका है और किसी भी संबंधित संवैधानिक या कानूनी प्राधिकरण द्वारा इसके उपयोग पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने सोमवार को घोषणा की कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांचों नगर निगमों के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से ही संपन्न होंगे। पत्रकारों को संबोधित करते हुए आयुक्त ने जानकारी दी कि परीक्षाओं के सत्र, विशेषकर SSLC (कक्षा 10) और PUC (कक्षा 11 और 12) के खत्म होने के बाद ही चुनावी प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
चुनाव आयुक्त संगरेशी ने बताया बैलेट पेपर पर वापस लौटने का कारण
जब राज्य चुनाव आयुक्त जी.एस. संगरेशी से ईवीएम के स्थान पर दोबारा मतपत्रों के इस्तेमाल पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इसका कोई एक खास नकारात्मक कारण नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि बैलेट पेपर का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत से ही किया जा रहा है, जबकि ईवीएम पिछले 20 से 30 सालों से प्रचलन में आई हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “ऐसा कोई कानून या सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश मौजूद नहीं है जो बैलेट पेपर के इस्तेमाल पर रोक लगाता हो।” संगरेशी ने अमेरिका जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आज भी GBA चुनाव बैलेट पेपर की तर्ज पर ही मतदान कराया जाता है।
कर्नाटक में भी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को छोड़कर, ग्राम पंचायत और सहकारी चुनावों में अब भी बैलेट पेपर का ही उपयोग होता है। यह निर्णय सभी हितधारकों से गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
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कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश और राहुल गांधी की यात्रा का राजनीतिक संदर्भ
सितंबर 2025 में, कर्नाटक कैबिनेट ने राज्य चुनाव आयोग को यह सिफारिश करने का निर्णय लिया था कि मतदाताओं की सूची में संशोधन किया जाए और GBA के तहत पांचों निगमों सहित आगामी स्थानीय निकायों के चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं।
विशेष रूप से, राज्य सरकार का यह फैसला लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बिहार में अपनी 16-दिवसीय “वोटर अधिकार यात्रा” समाप्त करने के तत्काल बाद आया। गौरतलब है कि 8 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने बेंगलुरु में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।
उन्होंने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच राज्य सरकार ने स्थानीय निकाय स्तर पर चुनावी प्रक्रिया में बदलाव का रास्ता साफ किया है।
विशेषज्ञों और मंत्रियों की राय: प्रगति या पीछे की ओर कदम?
इस फैसले पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। निट्टे यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु कैंपस) के वाइस-प्रेसिडेंट और राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री ने इसे एक प्रतिगामी कदम बताया है। उनका मानना है कि पारंपरिक बैलेट पेपर से चुनाव कराना निश्चित रूप से एक कदम पीछे जाना है, क्योंकि ईवीएम में हेरफेर का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, हालांकि वे तकनीकी रूप से खराब हो सकती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि GBA चुनाव बैलेट पेपर से कराने पर गिनती की प्रक्रिया लंबी हो जाएगी और अमान्य वोटों की समस्या भी बढ़ेगी। वहीं, राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी और पंचायत राज मंत्री प्रियांक खड़गे ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि आयोग को यह तय करने का अधिकार है कि चुनाव कैसे हों। खड़गे ने आरोप लगाया कि पूर्व में मतदाता सूचियों में हेरफेर किया गया और कलबुर्गी के आलंद में 5,994 नाम हटा दिए गए, जिस पर चुनाव आयोग ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
विपक्ष का पलटवार: भाजपा ने कांग्रेस की मंशा पर उठाए सवाल
विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी ने कांग्रेस सरकार के इस रुख की कड़ी निंदा की है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में ईवीएम की शुरुआत खुद कांग्रेस ने ही की थी और अब वे ही इसका विरोध कर रहे हैं। नारायणस्वामी ने कहा कि ईवीएम पर शक बेबुनियाद है और कांग्रेस पुराने दौर की ‘बूथ कैप्चरिंग’ को वापस लाने की फिराक में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा को बैलेट पेपर से कोई डर नहीं है और वे इस चुनौती का डटकर सामना करेंगे। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी इसे कर्नाटक के लिए “त्रासदी और शर्म की बात” करार दिया।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक कभी ईवीएम क्रांति का अग्रणी था, लेकिन अब राज्य सरकार प्रगति में बाधा बन रही है। जोशी ने एक हालिया सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि जनता का भरोसा अब भी ईवीएम पर कायम है।
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ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के मतदाताओं का विस्तृत गणित
जीबीए के स्पेशल कमिश्नर (चुनाव) आर रामचंद्रन ने चुनाव के लिए आंकड़ों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया है। उनके अनुसार, पांचों कॉर्पोरेशन में कुल मतदाताओं की संख्या 88,91,411 है। इनमें पुरुष मतदाता 45,69,193 और महिला मतदाता 45,20,583 हैं, जबकि 1,635 मतदाता अन्य श्रेणी में पंजीकृत हैं। चुनाव संपन्न कराने के लिए कुल 8,044 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बेंगलुरु वेस्ट कॉर्पोरेशन में सबसे अधिक 112 वार्ड और 2.725 मिलियन वोटर हैं।
इसके बाद बेंगलुरु नॉर्थ और साउथ में 72-72 वार्ड हैं। बेंगलुरु सेंट्रल में 63 और बेंगलुरु ईस्ट में 50 वार्ड शामिल हैं। आंकड़ों के लिहाज से बेंगलुरु वेस्ट का वार्ड संख्या 23 सबसे बड़ा है, जबकि बेंगलुरु ईस्ट का वार्ड संख्या 16 सबसे छोटा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि GBA चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से होने के कारण संसाधनों का प्रबंधन उसी अनुरूप किया जा रहा है।
मतदाता सूची का नवीनीकरण और महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु में लगभग 10 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। अक्टूबर 2022 में मतदाताओं की संख्या 79,19,563 थी, जो 1 अक्टूबर 2025 की ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार बढ़कर 88,91,411 हो गई है। मतदाता सूची का सत्यापन करने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 20 जनवरी से 3 फरवरी तक घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करेंगे।
इस दौरान नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिनका निपटारा 18 फरवरी तक कर दिया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 मार्च को होगा।
मतदाता अपनी जानकारी GBA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चेक कर सकते हैं। आयोग ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए हेल्पलाइन नंबर (सेंट्रल: 080-22975803, नॉर्थ: 080-22975936, आदि) भी जारी किए हैं ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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प्रशासनिक चुनौतियां और राजनीतिक दलों की युद्ध स्तर पर तैयारी
स्थानीय निकाय चुनावों के लिए GBA चुनाव बैलेट पेपर का उपयोग प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चुनौतियां लेकर आएगा। पूर्व मेयर गंगांबिके मल्लिकार्जुन और पूर्व कॉर्पोरेटर एम शिवराज जैसे नेताओं का मानना है कि बैलेट सिस्टम से मतदाताओं का संदेह तो दूर होगा, लेकिन इसके लिए भारी मैनपावर की आवश्यकता होगी।
भाजपा नेता एनआर रमेश ने आरोप लगाया कि यह कदम केवल भाजपा की संभावित जीत को रोकने के लिए उठाया गया है, क्योंकि ईवीएम के दौर में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे किसी भी पद्धति से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अंततः, 25 मई के बाद होने वाले ये चुनाव न केवल बेंगलुरु की स्थानीय सरकार चुनेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि बैलेट पेपर पर वापसी का यह फैसला चुनावी निष्पक्षता और परिणामों की गति को कितना प्रभावित करता है।
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