मणिकर्णिका घाट विवाद: फर्जी विजुअल्स फैलाने पर संजय सिंह समेत 8 पर FIR
मणिकर्णिका घाट विवाद वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी विजुअल्स फैलाने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
पुलिस ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे डेवलपमेंट वर्क के फर्जी, AI-जेनरेटेड विजुअल्स फैलाने के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह, बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस की जसविंदर कौर समेत 8 लोगों के खिलाफ अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने घाट के सौंदर्यीकरण कार्य की गलत तस्वीर पेश कर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
विपक्ष के बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा और पुलिस की FIR
वाराणसी पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई मणिकर्णिका घाट पर चल रहे कार्यों के बारे में गलत जानकारी और छेड़छाड़ किए गए दृश्यों को प्रसारित करने के चलते हुई है। पुलिस के अनुसार, AAP नेता संजय सिंह और बिहार के सांसद पप्पू यादव ने मणिकर्णिका घाट के फर्जी विजुअल्स साझा किए थे।
यह मामले चौक पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 298, 299 और 353 के तहत दर्ज किए गए हैं। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजन त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट मैनेजर और संबंधित अधिकारियों की शिकायत के आधार पर यह कदम उठाया गया है, क्योंकि सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में भक्तों को गुमराह करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की क्षमता थी।
इसे भी पढ़े :-वाराणसी ग्रीन एनर्जी: भारत का पहला हाइड्रोजन वेसल लॉन्च
संजय सिंह का पलटवार और विकास कार्यों पर गंभीर आरोप
अपने खिलाफ दर्ज हुए मुकदमों पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वह अधिकारियों की इस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। सिंह ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को उन्हें निशाना बनाने वाला कदम बताया।
साथ ही, उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मणिकर्णिका घाट पर चल रहे डेवलपमेंट वर्क से वहां स्थित प्राचीन मंदिरों और पूरे पवित्र घाट को अपूरणीय नुकसान पहुंचा है। इस बयान के बाद मणिकर्णिका घाट विवाद और भी गहरा गया है, क्योंकि एक तरफ प्रशासन इसे विकास बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे विनाश का नाम दे रहा है।
विकृत विजुअल्स और AI तकनीक के दुरुपयोग का मामला
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि विवादित सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं के बदले हुए (Manipulated) विजुअल्स का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले की शुरुआत तमिलनाडु के रामनाथपुरम निवासी मनो की शिकायत से हुई, जिनकी कंपनी 15 नवंबर, 2025 से घाट पर सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का काम कर रही है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 16 जनवरी को कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने चल रहे काम को गलत तरीके से दिखाने वाले AI-जेनरेटेड विजुअल्स फैलाए। वाराणसी पुलिस ने चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील स्थल, जहाँ 24 घंटे चिताएं जलती हैं और जिसका गहरा धार्मिक महत्व है, उसके बारे में कोई भी अफवाह बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा निर्देश और सख्त रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए विपक्ष के एजेंडे पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट और महाराजा हरिश्चंद्र घाट सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक, अंतिम संस्कार के लिए अत्यंत पवित्र स्थान हैं।
सीएम ने कहा, “जब इस उद्देश्य के लिए बिना सरकारी फंडिंग के कोई प्रोजेक्ट शुरू किया जाता है, तो विपक्ष इसे बदनाम करने का अपना एजेंडा शुरू कर देता है।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को AI-जनरेटेड फर्जी विजुअल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।
इसे भी पढ़े :-प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से 4 नई वंदे भारत ट्रेनें राष्ट्र को समर्पित कीं
दिग्विजय सिंह की आलोचना और ‘मॉल’ निर्माण की आशंका
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधुनिकीकरण और कॉरिडोर विकास के नाम पर ऐतिहासिक ढांचों और मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया है।
दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि क्या इन धार्मिक स्थलों को हटाकर इलाके को टूरिस्ट स्पॉट या कमर्शियल ज़ोन (मॉल) में बदलने की तैयारी है?
उन्होंने विशेष रूप से पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा 300 साल पहले बनवाए गए मंदिरों के तोड़े जाने पर दुख व्यक्त किया। उनके अनुसार, मूर्तियों को तोड़ना भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है और यह भारत के धार्मिक इतिहास का अनादर है।
होल्कर परिवार की चिंता और प्रशासन का आश्वासन
मणिकर्णिका घाट विवाद के बीच देवी अहिल्याबाई होल्कर के वंशज युवराज यशवंतराव होल्कर ने भी वाराणसी का दौरा किया। उन्होंने प्रशासन और कलेक्टर से मुलाकात कर प्राचीन ढांचों को हुए नुकसान की जांच की मांग की।
इस पर वाराणसी के कलेक्टर सत्येंद्र कुमार ने पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को भरोसा दिलाया है कि जो भी ढांचे तोड़े गए हैं, उन्हें फिर से बनाया जाएगा और गायब या क्षतिग्रस्त मूर्तियों को पूरे सम्मान के साथ दोबारा स्थापित किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट का एकमात्र उद्देश्य भक्तों की सुविधाओं में सुधार करना है।
इसे भी पढ़े :-वाराणसी रोपवे भ्रष्टाचार: 807 करोड़ खर्च पर जाँच की माँग
विरोध प्रदर्शन और 18 लोगों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई
सोमवार, 19 जनवरी 2026 को वाराणसी में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब मणिकर्णिका घाट पर विरोध प्रदर्शन की कोशिश कर रहे 18 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ये प्रदर्शनकारी पाल समुदाय के बताए जा रहे हैं, जो रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को कथित नुकसान पहुँचाए जाने का विरोध कर रहे थे।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति के नारेबाजी की और हिंसक होने का प्रयास किया, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की गई।
वर्तमान में मणिकर्णिका घाट पर निर्माण कार्य को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस मणिकर्णिका घाट विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है, जहाँ एक तरफ सरकार इसे विकास बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सांस्कृतिक धरोहर पर हमला करार दे रहा है।
इसे भी पढ़े :-वाराणसी टेंट सिटी अवैध: NGT ने लगाया भारी जुर्माना और सुनाया बड़ा फैसला



Post Comment