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तराना सांप्रदायिक हिंसा: उज्जैन में बवाल के बाद धारा 144 लागू

तराना सांप्रदायिक हिंसा

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में आने वाले तराना शहर में गुरुवार की शाम एक छोटी सी सड़क दुर्घटना और रास्ता देने के विवाद ने देखते ही देखते तराना सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नगर सचिव और बजरंग दल के कार्यकर्ता सोहेल ठाकुर (बुंदेला) की अपने दोस्त के साथ जाते समय अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ सदस्यों से बहस हो गई।

यह बहस महज सड़क पर रास्ता देने जैसी मामूली बात पर थी, लेकिन जल्द ही इसने हिंसक मोड़ ले लिया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह बहस मारपीट में बदल गई और सोहेल ठाकुर पर लोहे की रॉड से हमला किया गया।

हमले में ठाकुर के सिर पर गंभीर चोट आई, जिससे वह मौके पर ही बेहोश हो गए। इलाज के लिए उन्हें और उनके साथी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर में तनाव की लहर पैदा कर दी।

अफवाहों का बाजार गर्म और आक्रोशित भीड़ का प्रदर्शन

जैसे ही सोहेल ठाकुर पर हमले की खबर तराना के स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों तक पहुँची, गुस्सा फूट पड़ा। शहर में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया और देखते ही देखते तराना पुलिस स्टेशन के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सातवें आसमान पर था; उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए मिसाल बने।

इस तराना सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आक्रोश इतना अधिक था कि तराना के कई प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक जाम लग गया। सुरक्षा की दृष्टि से दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने शटर गिरा दिए, जिससे स्थानीय बाजार पूरी तरह बंद हो गए और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा।

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शहर में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और निजी संपत्तियों को नुकसान

विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ असामाजिक तत्वों ने सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हंगामे के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर खड़ी कम से कम 11 बसों में जमकर तोड़फोड़ की गई।

उपद्रवियों ने बसों के बॉडी पैनल को नुकसान पहुँचाया और खिड़कियों के कांच फोड़ दिए, जिससे बस ऑपरेटरों को भारी आर्थिक क्षति हुई। अराजकता का यह आलम यहीं नहीं रुका; कुछ इलाकों में घरों पर पथराव की खबरें भी सामने आईं।

चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ लोग हाथों में डंडे और हथियार लेकर नारेबाजी करते हुए सड़कों पर घूम रहे थे, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल बन गया।

आगजनी और लूटपाट की घटनाओं से दहला तराना

हालात उस समय बेकाबू होते नजर आए जब पत्थरबाजी के साथ-साथ शहर में आगजनी की घटनाएं शुरू हो गईं। आरोप है कि कुछ उपद्रवियों ने पूर्व नगर पार्षद आजाद खान की कबाड़ की दुकान को आग के हवाले कर दिया। आगजनी और लूटपाट की इन वारदातों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

तराना सांप्रदायिक हिंसा की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। चूंकि उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है, इसलिए प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। पूरे शहर में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई और किसी भी प्रकार के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।

पुलिस प्रशासन की सख्ती और 15 संदिग्ध हिरासत में

हिंसा भड़कने के तुरंत बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुँचे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाई गई। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की और पैदल गश्त (फुट पेट्रोलिंग) तेज कर दी।

उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने मीडिया को बताया कि सोशल हारमनी (सामाजिक सद्भाव) बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लगभग 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हिंसा और तोड़फोड़ करने वाले हर व्यक्ति की पहचान की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

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सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज के बीच बढ़ा तनाव

शहर में तनाव का एक मुख्य कारण समय का संयोग भी रहा। गुरुवार को सरस्वती पूजा का पर्व था और अगले दिन शुक्रवार की नमाज थी, जिसके चलते दोनों समुदायों के बीच पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई थी। विवाद की शुरुआत तराना के बड़े राम मंदिर के सामने स्थित सुखला गली से हुई, जहाँ सोहेल ठाकुर और ईशान मिर्जा के बीच झगड़ा हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईशान मिर्जा और उसके साथियों के हमले के बाद हिंसा की आग न्यू बाखल और तकिया गली जैसे इलाकों तक फैल गई। आरोप है कि तकिया गली की ओर से आए लोगों ने न्यू बाखल में कई घरों में तोड़फोड़ की, जिसके जवाब में दूसरे पक्ष की महिलाएं भी हाथों में हथियार लेकर सड़कों पर उतर आईं। इस दौरान एक धार्मिक स्थल में भी तोड़फोड़ की बात सामने आई है।

अमन और चैन की अपील: जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा

हिंसा के बीच शहर काजी सफीउल्लाह ने जनता से शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय विधायक महेश परमार भी तुरंत तराना पहुँचे और पुलिस अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली।

उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और भाईचारा बनाए रखने का आग्रह किया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, इसलिए जनता को कानून हाथ में लेने की जरूरत नहीं है।

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वर्तमान स्थिति: भारी सुरक्षा बल तैनात और प्रशासन का अल्टीमेटम

वर्तमान में, तराना सांप्रदायिक हिंसा के बाद देर रात तक स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। हालांकि, शहर में अभी भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। संवेदनशील मोर्चों पर भारी पुलिस बल तैनात है और आला अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वाले या शांति भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आने वाले दिनों में शांति समिति की बैठकें बुलाई जाएंगी ताकि दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित किया जा सके और आपसी विश्वास बहाल हो सके।

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