SBI CHAKRA पहल: उभरते सेक्टर्स के लिए 100 लाख करोड़ का निवेश लक्ष्य
SBI CHAKRA पहल देश के सबसे बड़े ऋणदाता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
SBI CHAKRA पहल के रूप में लॉन्च किया गया यह ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) विशेष रूप से उन उभरते क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, जो आने वाले समय में ‘विकसित भारत 2047’ की नींव रखेंगे।
मुंबई स्थित एसबीआई के कॉर्पोरेट मुख्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में इस केंद्र का उद्घाटन किया गया, जो अगली पीढ़ी की तकनीक और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित उद्योगों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भव्य उद्घाटन
मुंबई में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने केंद्र का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी भी मौजूद थे।
उद्घाटन के दौरान श्री नागराजू ने इस बात पर जोर दिया कि SBI CHAKRA पहल केवल एक वित्तीय इकाई नहीं है, बल्कि एक व्यापक इकोसिस्टम है जो नॉलेज-शेयरिंग, प्रोजेक्ट अप्रेजल और क्षमता निर्माण के माध्यम से देश की प्रगति को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।
आठ सनराइज सेक्टर्स पर केंद्रित होगा पूरा ध्यान
SBI का यह केंद्र मुख्य रूप से उन आठ क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो भारत के भविष्य के आर्थिक इंजन माने जा रहे हैं। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
बैंक का मानना है कि इन सेक्टर्स को विशेष वित्तीय संरचनाओं की आवश्यकता है, और यह केंद्र साक्ष्य-आधारित नीति जुड़ाव के माध्यम से इन जटिल उद्योगों के लिए ऋण प्रवाह को सुगम बनाने का कार्य करेगा।
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निवेश का महाकुंभ: 2030 तक 100 लाख करोड़ का लक्ष्य
अनुमानों के अनुसार, इन आठ उभरते क्षेत्रों में साल 2030 तक 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आने की संभावना है। SBI CHAKRA पहल का विजन इस विशाल निवेश को संभव बनाना और इसे सही दिशा में निर्देशित करना है।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसका ध्यान इन पूंजी-प्रधान क्षेत्रों में जिम्मेदारी से पूंजी प्रवाह करने, जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं को मजबूत करने और बदलते बिजनेस मॉडल्स के अनुरूप अभिनव वित्तीय ढांचे विकसित करने पर है।
चेयरमैन सी एस सेट्टी का भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण
एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले दशकों में भारत की विकास गाथा नवाचार, स्थिरता और उन्नत विनिर्माण के इर्द-गिर्द घूमेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के माध्यम से एसबीआई उभरते क्षेत्रों को समझने और विशिष्ट फाइनेंसिंग सॉल्यूशन डिजाइन करने की अपनी संस्थागत क्षमता को और भी अधिक मजबूत कर रहा है। यह केंद्र नए जमाने की तकनीक और क्लाइमेट फाइनेंस में बैंक के नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।
रणनीतिक साझेदारी और 21 संस्थानों के साथ समझौता
इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए एसबीआई ने 21 प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के तहत, सरकारी और अंतरराष्ट्रीय लेंडर्स की प्रोजेक्ट फाइनेंस टीमें एसबीआई की टीम के साथ मिलकर काम करेंगी।
वैश्विक बैंकों में जापानी दिग्गज SMBC और MUFG के साथ-साथ घरेलू स्तर पर PFC, REC और NaBFID जैसे संस्थान भी इस साझा मंच का हिस्सा बने हैं। यह सहयोग न केवल क्षमता निर्माण में मदद करेगा, बल्कि बड़े प्रोजेक्ट्स की को-फाइनेंसिंग को भी आसान बनाएगा।
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पूंजी संरचना और भविष्य की चुनौतियां
चेयरमैन सेट्टी ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि इन क्षेत्रों को केवल पारंपरिक ऋण (Debt) से फंड नहीं किया जा सकता है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में इन सेक्टर्स में लगभग 20-22 ट्रिलियन रुपये के लोन के अवसर का अनुमान लगाया है। बैंक अब मेज़ानाइन फाइनेंसिंग और अन्य वैकल्पिक कैपिटल स्ट्रक्चर लाने पर विचार कर रहा है।
सेट्टी के अनुसार, चूँकि एसबीआई के पास ‘स्टिकी’ सेविंग्स और रिटेल टर्म डिपॉजिट्स का मजबूत आधार है, इसलिए बैंक लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स को फंड करने में सक्षम है, लेकिन अन्य निवेशकों को भी इस विकास में भागीदार बनना होगा।
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ज्ञान आधारित मंच और वैश्विक एकीकरण
यह केंद्र केवल वित्त पोषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह व्हाइट पेपर्स, सेक्टर रिपोर्ट्स और पॉलिसी डायलॉग्स के जरिए एक थिंक-टैंक के रूप में भी काम करेगा।
यह मल्टीलेटरल एजेंसियों, स्टार्टअप्स, शिक्षा जगत और उद्योग निकायों के साथ मिलकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करेगा जो वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में भारत के एकीकरण को बढ़ावा देगा।
SBI CHAKRA पहल वास्तव में एमएसएमई के लिए बैंक के पिछले अनुभवों को एक बड़े और अधिक प्रभावकारी स्तर पर ले जाने का प्रयास है, जिससे भारत का भविष्य तकनीकी रूप से सक्षम और टिकाऊ बन सके।
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