कृषि और डेयरी सेक्टर सुरक्षित, संसद में सरकार का एलान सरकार का एलान
संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर की सफलतापूर्वक रक्षा की है। लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। विपक्षी दलों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच गोयल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई यह बातचीत भारतीय किसानों के हितों को केंद्र में रखकर की गई है। सरकार ने संसद को बताया कि इस सौदे से न केवल हमारे घरेलू बाजार सुरक्षित रहेंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय निर्यातकों को एक नई प्रतिस्पर्धी बढ़त भी मिलेगी।
कृषि और डेयरी सेक्टर उत्पाद समझौते का हिस्सा नहीं: गोयल
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वाणिज्य मंत्री ने पुष्टि की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संवेदनशील क्षेत्रों की सावधानीपूर्वक सुरक्षा करता है। उन्होंने सदन को बताया कि कृषि और डेयरी उत्पाद इस व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं हैं, जिसका सीधा अर्थ है कि भारतीय किसानों को अमेरिकी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने बातचीत के दौरान स्पष्ट ‘रेड लाइन’ बनाए रखी थी और देश के 140 करोड़ लोगों की भोजन और खेती संबंधी चिंताओं को किसी भी कीमत पर समझौते की मेज पर नहीं रखा गया।
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अमेरिकी टैरिफ 50% से घटकर 18% पर आया
इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ में होने वाली भारी कटौती है। गोयल ने बताया कि भारतीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत (दंडात्मक टैक्स सहित) से घटाकर मात्र 18 प्रतिशत कर दिया गया है। मंत्री ने रेखांकित किया कि 18 प्रतिशत की यह दर वियतनाम, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ से काफी कम है। इस कटौती से भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों, जैसे वस्त्र और समुद्री भोजन (सीफूड) के निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
विपक्ष का जोरदार विरोध और स्थगन प्रस्ताव
हालांकि, सरकार के कृषि और डेयरी सेक्टर सुरक्षित दावों के बीच संसद में माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। विपक्षी सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन दावों पर गहरी चिंता जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत कुछ अमेरिकी सामानों पर टैरिफ खत्म कर सकता है और $500 बिलियन मूल्य के अमेरिकी ऊर्जा और कृषि उत्पाद खरीद सकता है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस सौदे के आर्थिक और विदेश नीति प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। भारी नारेबाजी और बैनरों के प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
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MSMEs और कुशल श्रमिकों के लिए खुलेंगे नए द्वार
वाणिज्य मंत्री ने विश्वास जताया कि यह समझौता ‘विकसित भारत’ पहल का एक मजबूत स्तंभ बनेगा। उन्होंने कहा कि टैरिफ में कमी से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), उद्योगपतियों और कुशल भारतीय श्रमिकों के लिए विदेशी बाजार में अवसरों की बाढ़ आ जाएगी। यह समझौता उन्नत प्रौद्योगिकियों तक भारत की पहुंच को आसान बनाएगा, जिससे ‘दुनिया के लिए मेक इन इंडिया’, ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘इनोवेट इन इंडिया’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह डील आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा किए गए $500 बिलियन की खरीद के दावों और रूसी तेल पर प्रतिबद्धताओं के बीच, पीयूष गोयल ने दोहराया कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारत को विमानन (Aviation), डेटा सेंटर और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उन्नत तकनीक और सामान की आवश्यकता है, जहां अमेरिका एक वैश्विक लीडर है। ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है और इस दिशा में लिए गए सभी फैसले राष्ट्रीय हित और जनता के बड़े हित में हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत पहल का परिणाम
मंत्री गोयल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है। फरवरी 2025 में उनकी अमेरिका यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर गहन चर्चा हुई। गोयल ने कहा कि जब आधिकारिक और मंत्री स्तर की बातचीत रुकी हुई थी, तब प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से दखल देकर इस व्यापार समझौते को फाइनल किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि नकारात्मक सोच वाले नेता देश को गुमराह कर रहे हैं, जबकि यह समझौता गरीबों, किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आएगा।
जल्द जारी होगा संयुक्त बयान, तकनीकी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में
सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और अमेरिका के बीच इस ट्रेड डील की तकनीकी औपचारिकताएं और कागजी कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है। तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद जल्द ही एक संयुक्त बयान (Joint Statement) जारी किया जाएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की स्थिति को और अधिक सशक्त बनाएगा। सरकार ने दोहराया कि यह समझौता पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें भारत के आर्थिक विकास की गति को तेज करने की पूरी क्षमता है।
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