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रूसी तेल पर जवाब: क्या भारत रोकेगा आयात? विदेश मंत्रालय ने बताया

रूसी तेल पर जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के रूसी तेल आयात को रोकने के दावे के बाद अब भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और बाजार की वास्तविकताओं से निर्देशित होता है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है, लेकिन भारत ने अपने आधिकारिक रूसी तेल पर जवाब में किसी भी ऐसे विशिष्ट वादे का जिक्र नहीं किया है, बल्कि अपनी सोर्सिंग रणनीति में विविधता लाने पर जोर दिया है।

ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पर बड़ा दावा: रूसी तेल छोड़ अमेरिका से नाता जोड़ेगा भारत?

इस पूरे विवाद की शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप के उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने और इसके बजाय संयुक्त राज्य अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से खरीद बढ़ाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के अनुसार, इस कदम से यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जहां हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत अब अमेरिका से ऊर्जा और कृषि उत्पादों सहित लगभग 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार समझौते और टैरिफ में कटौती की पुष्टि तो की, लेकिन उनके आधिकारिक बयान में रूसी तेल आयात को रोकने जैसी किसी प्रतिबद्धता का कोई उल्लेख नहीं था।

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विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग: बाजार की स्थितियों और विविधता पर भारत का जोर

रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की रणनीति एनर्जी सोर्स में विविधता लाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा या सोर्सिंग का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” भारत का मानना है कि उद्देश्यपूर्ण बाजार स्थितियों और बदलती अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों को चुनना उसकी रणनीति का मूल हिस्सा है। रूसी तेल पर जवाब देते हुए प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत के सभी फैसले राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के संतुलन को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और भविष्य में भी लिए जाएंगे।

वेनेजुएला से तेल खरीद के लिए खुला है भारत: वाणिज्यिक व्यवहार्यता का मुद्दा

भारत ने न केवल रूस और अमेरिका बल्कि वेनेजुएला से भी तेल सोर्सिंग की संभावनाओं पर अपना रुख स्पष्ट किया है। जायसवाल ने बताया कि नई दिल्ली वाणिज्यिक विचारों के अधीन वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए पूरी तरह खुला है। वेनेजुएला भारत का लंबे समय से ऊर्जा और व्यापार भागीदार रहा है। भारत 2019-20 तक वहां से कच्चा तेल आयात कर रहा था, जिसे प्रतिबंधों के कारण रोकना पड़ा था। 2023-24 में फिर से खरीद शुरू हुई, लेकिन फिर से प्रतिबंध लागू होने से बाधा आई। भारत ने पुष्टि की कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) ने 2008 से वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA के साथ साझेदारी बनाए रखी है और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत किसी भी कच्चे तेल की आपूर्ति के विकल्पों के व्यावसायिक फायदों का पता लगाने के लिए तैयार है।

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रूस का रुख: “हमें नई दिल्ली से खरीद रोकने की कोई सूचना नहीं मिली”

ट्रंप की टिप्पणियों पर क्रेमलिन ने भी अपनी राय दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसोव ने स्पष्ट किया कि अब तक रूस को इस मामले पर नई दिल्ली से कोई आधिकारिक बयान या सूचना नहीं मिली है। पेसोव ने कहा कि वे अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करते हैं, लेकिन रूस और भारत के बीच ‘एडवांस्ड रणनीतिक साझेदारी’ उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने भी कहा कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत रूस के साथ ऊर्जा सहयोग पर फिर से विचार करेगा, क्योंकि यह व्यापार दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। रूसी विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि अमेरिका का शेल तेल लो-ग्रेड का है, जबकि रूस हाई-ग्रेड यूराल तेल की आपूर्ति करता है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए अधिक अनुकूल है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: टैरिफ में भारी कटौती और अंतिम चरण की चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच इस सप्ताह की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की घोषणा की गई। इसके तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत (कुछ रिपोर्ट्स में 25% से 18%) कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे ‘मेड-इन-इंडिया’ उत्पादों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह समझौता अपने आखिरी चरणों में है और जल्द ही एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा और कृषि एवं डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को किसी भी ट्रेड डील में सुरक्षित रखा जाएगा।

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पीयूष गोयल और एस जयशंकर की कूटनीति: 1.4 अरब भारतीयों का हित सर्वोपरि

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार की स्थिति दोहराते हुए सदन और सार्वजनिक मंचों पर कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इन मुद्दों को सही नजरिए से देखें। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक में इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने द्विपक्षीय सहयोग की विस्तृत समीक्षा की और ‘फोरम ऑन रिसोर्स, जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट’ (FORGE) पहल के लिए भारत के समर्थन पर जोर दिया। भारत का स्पष्ट संदेश है कि कूटनीतिक संबंधों के बावजूद वह अपनी ऊर्जा नीतियों को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता रहेगा।

‘रूसी तेल पर जवाब’ और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता

अंततः, भारत का रुख “भारत प्रथम” की नीति पर आधारित है, जो ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के साथ संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि रूस भारत को रोजाना 1.5 से 2 मिलियन बैरल तेल सप्लाई करता है, जिसे अचानक किसी अन्य स्रोत से बदलना व्यावहारिक रूप से कठिन है। भारत ने अपने रूसी तेल पर जवाब के जरिए दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह एक आजाद देश है और अपनी रिफाइनरियों की जरूरतों और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। यह कूटनीतिक संतुलन ही भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त शक्ति के रूप में स्थापित करता है, जहां वह अपने नागरिकों के हितों से कभी समझौता नहीं करता।

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