तारिक रहमान की जीत: 20 साल बाद बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक वापसी
तारिक रहमान की जीत ने बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है, जहाँ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके गठबंधन ने 13वें पार्लियामेंट्री चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल किया है। स्थानीय मीडिया द्वारा शुक्रवार को जारी अनऑफिशियल नतीजों के अनुसार, BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 210 से अधिक सीटें जीतकर शेख हसीना की अवामी लीग के पतन के बाद खाली हुई सत्ता की कुर्सी पर कब्जा कर लिया है।
पार्टी सूत्रों और बांग्लादेशी बंगाली डेली ‘जुगंटोर’ के मुताबिक, कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान अब सरकार का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि लगभग 35 साल बाद बांग्लादेश में किसी पुरुष प्रधानमंत्री की वापसी होने जा रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि भले ही उन्हें दो-तिहाई बहुमत मिला है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के निधन के सम्मान में कोई विजय जुलूस या रैलियां नहीं निकाली जाएंगी।
दो चुनाव क्षेत्रों से शानदार प्रदर्शन और अनऑफिशियल नतीजों का ऐलान
चुनावों के अनऑफिशियल नतीजों ने साफ कर दिया है कि तारिक रहमान को जनता का भरपूर समर्थन मिला है। ढाका-17 चुनाव क्षेत्र से उन्होंने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार एस.एम. खालिदउज्जमां को 4,399 वोटों के अंतर से हराया। यहाँ तारिक को 72,699 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 68,300 वोट प्राप्त हुए। रिटर्निंग ऑफिसर शराफ उद्दीन अहमद चौधरी ने बताया कि इस क्षेत्र में पोस्टल वोटिंग समेत 125 सेंटर्स पर मतदान हुआ था।
इसके अलावा, तारिक बोगरा-6 सदर चुनाव क्षेत्र से भी भारी मतों से चुने गए हैं। उन्हें 150 सेंटर्स से कुल 216,284 वोट मिले, जबकि जमात के उम्मीदवार अबिदुर रहमान सोहेल को मात्र 97,626 वोट ही मिल सके। तारिक रहमान की जीत का यह सिलसिला उनके नेतृत्व पर जनता के अटूट भरोसे को दर्शाता है।
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पीएम मोदी की बधाई और भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया अध्याय
पड़ोसी देश में हुए इस बड़े सत्ता परिवर्तन पर भारत ने भी सकारात्मक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान की जीत पर उन्हें हार्दिक बधाई दी और बांग्लादेश के लोगों के भरोसे की सराहना की। पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा दिखाती है। भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा।”
उन्होंने साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए नई लीडरशिप के साथ काम करने की इच्छा जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि हसीना के हटने के बाद पैदा हुई अस्थिरता के बीच BNP का सत्ता में आना भारत के लिए एक व्यावहारिक विकल्प है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
खालिदा ज़िया की विरासत और तारिक रहमान का राजनीतिक सफर
तारिक रहमान की यह सफलता उनकी पारिवारिक विरासत से गहराई से जुड़ी हुई है। वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जनरल ज़ियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे हैं। जनरल ज़ियाउर रहमान ने 1977 में राष्ट्रपति बनने से पहले BNP की स्थापना की थी, जबकि खालिदा ज़िया ने दो अलग-अलग कार्यकालों में देश पर राज किया। पिछले साल 30 दिसंबर 2025 को खालिदा ज़िया के निधन के बाद तारिक ने पार्टी की पूरी कमान संभाली।
18 साल विदेश में रहने के बाद दिसंबर में वतन लौटे तारिक के लिए यह चुनाव एक बड़ी परीक्षा थी। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश के लोग एक दशक से ज्यादा समय से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे। अब तारिक रहमान की जीत ने उन्हें अपने पिता और माँ की विरासत को आगे ले जाने का संवैधानिक अवसर प्रदान किया है।
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जमात-ए-इस्लामी को करारा झटका और पॉज़िटिव पॉलिटिक्स का वादा
चुनावों में BNP की आंधी के बीच जमात-ए-इस्लामी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। बड़ी उम्मीदों के बावजूद जमात गठबंधन सिर्फ 70 सीटों तक ही सिमट गया। जमात के चीफ शफीकुर रहमान ने वोटरों के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अब सिर्फ विरोध करने के बजाय “पॉज़िटिव पॉलिटिक्स” में शामिल होगी। गौरतलब है कि 1971 में आजादी का विरोध करने के कारण जमात पर कई बार प्रतिबंध लगे, लेकिन 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद इसने फिर से जगह बनाई थी।
हालांकि, नतीजों ने साफ कर दिया कि जनता ने BNP को ही मुख्य विकल्प के रूप में चुना है। चुनाव के दिन हिंसा की कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर हुईं, जिनमें 70 से ज्यादा लोग घायल हुए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने पूरी प्रक्रिया को पिछले सालों की तुलना में अधिक पारदर्शी बताया है।
संवैधानिक सुधारों पर रेफरेंडम और जनता का सेंटिमेंट
आम चुनाव के साथ-साथ बांग्लादेश में संवैधानिक सुधारों के लिए भी मतदान हुआ। “जुलाई चार्टर” के बारे में आए अनऑफिशियल नतीजों से पता चला है कि लगभग 73% वोटर्स ने सुधारों के पक्ष में “हाँ” का बटन दबाया है। इन सुधारों में प्रधानमंत्री के लिए दो-टर्म की लिमिट, स्वतंत्र न्यायपालिका, महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व और चुनाव के समय न्यूट्रल अंतरिम सरकारें बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, इस बार वोटर टर्नआउट 60.69% के आसपास रहा, जो पिछले चुनाव के 42% से काफी ज्यादा है। यह चुनाव 30 सालों में पहली बार अवामी लीग के बिना हुआ, जिससे जनता के पास अपनी पसंद चुनने का एक खुला अवसर था।
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एक्सपर्ट्स की राय: भारत के लिए क्यों बेहतर है BNP सरकार?
दक्षिण एशिया की राजनीति के जानकारों का कहना है कि ढाका में एक चुनी हुई सरकार का होना नई दिल्ली के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ पत्रकार दीप हलदर के अनुसार, “BNP का सत्ता में आना भारत के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है क्योंकि जमात की सरकार एक अलग तरह की चुनौती पेश करती। दिल्ली और ढाका ने पहले भी बातचीत की है, भले ही रिश्ते उतार-चढ़ाव वाले रहे हों।”
वहीं इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के प्रवीण दोंथी का मानना है कि भारत अब रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाएगा। भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों देशों के साझा हित व्यापार और सुरक्षा से जुड़े हैं। तारिक रहमान की सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन में अनुशासन वापस लाना और अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।
भविष्य की चुनौतियां और गवर्नेंस पर टिका दारोमदार
रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं। लोगों का मानना है कि देश को स्थिर करने के लिए BNP को पहले दौर में बहुत मजबूत और ईमानदार होना होगा। प्रशासन में डिसिप्लिन लाना और पिछड़े तबकों को अधिक मौके देना तारिक रहमान की प्राथमिकता होनी चाहिए। अमेरिकी एम्बेसडर ब्रेंट टी क्रिस्टेंसन ने भी सफल चुनाव के लिए बधाई दी और नई लीडरशिप के साथ काम करने की उत्सुकता जताई।
बांग्लादेश में कपड़ों जैसे एक्सपोर्ट उद्योगों की स्थिरता के लिए भी एक मजबूत सरकार का होना अनिवार्य है। अब पूरी दुनिया की नज़रें तारिक रहमान पर टिकी हैं कि वे कैसे बांग्लादेश को एक नई दिशा में ले जाते हैं और वैश्विक मंच पर देश की छवि को बेहतर बनाते हैं।
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