उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाईकोर्ट से रेप आरोपी कुलदीप सेंगर को ज़मानत मिली
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सज़ा काट रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को ज़मानत दे दी है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीज़न बेंच ने सेंगर की सज़ा को उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने तक निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। कोर्ट ने रेप केस में दिसंबर 2019 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह रिहाई बिना शर्तों के नहीं है और इसके लिए बेहद सख्त नियम तय किए गए हैं।
बेंच ने सेंगर को 15 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की तीन ज़मानतों पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “हम सज़ा सस्पेंड कर रहे हैं। 15 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही रकम की तीन ज़मानतें जमा करनी होंगी।” यह मामला 2017 का है जब एक नाबालिग लड़की को सेंगर ने किडनैप कर रेप किया था, जिसके बाद इस मामले ने देशव्यापी तूल पकड़ा था और सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
कोर्ट द्वारा लगाई गई कड़ी शर्तें और निर्देश
हाई कोर्ट ने ज़मानत देते समय सेंगर पर कई कड़ी पाबंदियां लगाई हैं। कोर्ट ने सेंगर को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में बिल्कुल न आएं। इसके साथ ही, अपील लंबित रहने तक उन्हें दिल्ली में ही रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने साफ लफ्ज़ों में कहा है कि सेंगर को यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर वह अंततः दोषी पाए जाते हैं, तो सज़ा का बचा हुआ हिस्सा पूरा करने के लिए वह उपलब्ध रहें।
शर्तों में यह भी शामिल है कि सेंगर अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करेंगे और उन्हें हर सोमवार सुबह 10 बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा, “किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।” इसके अलावा, पीड़िता या उसकी माँ को किसी भी प्रकार की धमकी न देने का सख्त निर्देश दिया गया है। यह आदेश पीड़ित परिवार की सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिया गया है।
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जेल से रिहाई की राह अब भी मुश्किल
भले ही हाई कोर्ट ने रेप केस में कुलदीप सेंगर को ज़मानत दे दी हो, लेकिन वह अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसका कारण यह है कि सेंगर एक दूसरे मामले में भी 10 साल की सज़ा काट रहे हैं। यह मामला पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। मार्च 2020 में, कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई जयदीप सिंह सेंगर सहित अन्य लोगों को पीड़िता के पिता की हत्या (गैर इरादतन हत्या) के लिए दोषी ठहराया गया था और 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने माना था कि सेंगर और उनके सह-आरोपियों ने पीड़िता के पिता को झूठे मामले में फंसाने की साज़िश रची थी और एक हथियार प्लांट किया था, जिसके बाद पुलिस हिरासत में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई और उनकी मौत हो गई। इस मामले में सेंगर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। चूंकि इस मामले में उनकी सज़ा बरकरार है, इसलिए रेप केस में सज़ा सस्पेंड होने के बावजूद उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं होगी।
2017 का वो भयावह घटनाक्रम और सज़ा
उन्नाव रेप केस की जड़ें 2017 में हैं। आरोप के मुताबिक, 17 साल की नाबालिग पीड़िता का 11 से 20 जून, 2017 के बीच सेंगर ने अपहरण किया और उसके साथ रेप किया। इसके बाद उसे 60,000 रुपये में बेच दिया गया था, जिसके बाद उसे माखी पुलिस स्टेशन से बरामद किया गया था। इस दौरान पीड़िता को पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार धमकियां दी गईं और सेंगर के खिलाफ मुंह न खोलने की चेतावनी दी गई। बाद में सेंगर के खिलाफ रेप, अपहरण, आपराधिक धमकी और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
दिसंबर 2019 में, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को रेप का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह सज़ा उनके ‘शेष प्राकृतिक जीवन’ तक के लिए है। साथ ही उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। सज़ा सुनाते समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी कर्मचारी होने के नाते, सेंगर को लोगों का भरोसा हासिल था, जिसे उसने तोड़ा और ऐसा करने के लिए उसकी एक ही गलत हरकत काफी थी।
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सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और केस ट्रांसफर
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़िता ने तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने पत्र का संज्ञान लेते हुए 1 अगस्त, 2019 को रेप केस और इससे जुड़े अन्य सभी पांच मामलों को उत्तर प्रदेश की लखनऊ कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को रोज़ाना सुनवाई (Day-to-day trial) करने और 45 दिनों के भीतर इसे पूरा करने का निर्देश दिया था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सेंगर को गिरफ्तार किया गया था और बाद में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई को पीड़िता और उसके परिवार के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने का निर्देश दिया था, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षित घर और पहचान बदलने की सुविधा भी शामिल थी।
सड़क दुर्घटना और हत्या की साज़िश का आरोप
केस के दौरान एक और दिल दहला देने वाली घटना घटी थी जब एक बिना नंबर प्लेट वाली लॉरी ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता यात्रा कर रही थी। इस हादसे में पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उसकी दो चाचियों की मौत हो गई थी, जिनमें से एक रेप केस में गवाह थी। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया था कि इस दुर्घटना के पीछे सेंगर का हाथ था।
हालांकि, दिसंबर 2021 में दिल्ली की एक कोर्ट ने सेंगर को इस दुर्घटना मामले से बरी कर दिया था, क्योंकि कोर्ट को इस बात का कोई शुरुआती सबूत नहीं मिला कि उसने दुर्घटना की साज़िश रची थी। 2024 में, केंद्र ने सुरक्षा हटाने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में पीड़िता को दी गई सुरक्षा हटाने से इनकार कर दिया था, हालांकि परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा हटाने के निर्देश दिए गए थे।
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अदालत में वकीलों की लंबी फौज और दलीलें
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुलदीप सेंगर की तरफ से सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन और मनीष वशिष्ठ के साथ वकीलों की एक बड़ी टीम पेश हुई। इनमें एडवोकेट एसपीएम त्रिपाठी, अमित सिन्हा, दीपक शर्मा, राहुल पूनिया, अंबुज सिंह, आशीष तिवारी, ऐश्वर्या सेंगर, गौरव कुमार, सौरभ द्विवेदी, पुन्या रेखा, अंगारा, वसुंधरा एन, अमन अख्तर, सना सिंह, वसुंधरा राज त्यागी, अर्जन सिंह मंडला, गौरी रामचंद्रन, वेदांश वशिष्ठ और स्वपन सिंघल शामिल थे।
दूसरी ओर, सीबीआई का प्रतिनिधित्व स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) अनुभा भारद्वाज के साथ एडवोकेट विजय मिश्रा और अनन्या शमशेरी ने किया। शिकायतकर्ता (पीड़िता) की तरफ से एडवोकेट महमूद प्राचा, सानवर, जतिन भट्ट, क्षितिज सिंह और कुमैल अब्बास पेश हुए, जबकि दिल्ली महिला आयोग का प्रतिनिधित्व एडवोकेट उर्वी मोहन ने किया। इन दलीलों के बाद ही कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को ज़मानत देने का फैसला लिया।
भविष्य की सुनवाई और पिछला मेडिकल ग्राउंड
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि क्रिमिनल अपील और क्रिमिनल एप्लीकेशन को 15 जनवरी, 2026 को चीफ जस्टिस के आदेशों के अधीन रोस्टर बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा। तब तक के लिए कुलदीप सेंगर को ज़मानत की शर्तों का पालन करना होगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी सेंगर को स्वास्थ्य कारणों से राहत मिली थी। इस साल की शुरुआत में और पिछले साल दिसंबर में, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने के लिए अंतरिम ज़मानत दी गई थी।
फिलहाल, सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ मुख्य अपील अभी भी पेंडिंग है। हिरासत में मौत के मामले में भी उनकी अपील लंबित है, जिसमें उन्होंने इस आधार पर सज़ा सस्पेंड करने की मांग की है कि वह पहले ही जेल में काफी समय बिता चुके हैं।
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