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 “भुवनेश्वर छत धमाका कांड”मोबाइल देख बना रहे थे बम, फिर हुआ ब्लास्ट

भुवनेश्वर छत धमाका कांड

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के सुंदरपाड़ा इलाके में 27 जनवरी, 2026 को हुए एक भीषण विस्फोट ने पूरे राज्य को दहला दिया है। भुवनेश्वर छत धमाका कांड की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आधिकारिक तौर पर इस मामले की कमान संभाल ली है।

आज़ाद नगर के एक घर की छत पर हुआ यह धमाका महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मुख्य संदिग्ध शाहनवाज़ मलिक अपनी मां और साथियों के साथ मिलकर छत पर ‘क्रूड डिवाइस’ और हाई-ग्रेड एक्सप्लोसिव मटीरियल तैयार कर रहा था, तभी यह अनहोनी हो गई।

CCTV फुटेज में कैद हुआ मौत का मंजर: आसमान में उठा धुएं का गुबार

इस खौफनाक घटना का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला CCTV फुटेज सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रिहायशी इलाके की एक बिल्डिंग की छत पर, जहां पानी के टैंक रखे थे, अचानक आग की एक तेज लपट उठती है और देखते ही देखते घना सफेद धुआं आसमान को ढक लेता है।

धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी इमारत हिल गई और आसपास के घरों में शॉकवेव महसूस की गई। फुटेज में लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागते दिख रहे हैं, और औरतों की चीखें सुनाई दे रही हैं। एक व्यक्ति धमाके के असर से जमीन पर गिरता हुआ भी दिखाई दिया है।

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मुख्य आरोपी शाहनवाज़ मलिक और उसकी मां की इलाज के दौरान मौत

इस धमाके में चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिन्हें पहले कैपिटल हॉस्पिटल और फिर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मुख्य आरोपी, 26 वर्षीय शाहनवाज़ मलिक, जो एक हिस्ट्री-शीटर था और जिसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

हादसे में उसकी 51 वर्षीय मां, लिज़ातुन बीबी ने भी दम तोड़ दिया। भुवनेश्वर छत धमाका कांड में घायल दो अन्य लोग—शाहनवाज़ की मंगेतर तृप्तिमयी महल (23) और उसका करीबी साथी अमिया मलिक (27)—अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पुलिस की योजना है कि हालत सुधरते ही इन दोनों से कड़ी पूछताछ की जाएगी।

रणनीतिक ठिकानों के करीब धमाका: सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

जांच के दौरान एक चिंताजनक तथ्य यह सामने आया है कि धमाके वाली जगह DRDO ट्रांजिट फैसिलिटी और इंडियन एयर फोर्स रिक्रूटिंग सेंटर के काफी करीब है। हालांकि विस्फोट आज़ाद नगर के सुंदरपाड़ा इलाके में हुआ, लेकिन इन महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों से इसकी दूरी महज 10 किलोमीटर के दायरे में है।

यही वजह है कि NIA इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या इन संस्थानों को निशाना बनाने की कोई तैयारी की जा रही थी। विस्फोटक विशेषज्ञों का मानना है कि छत पर रखे आईईडी (IED) और भारी मात्रा में बारूद के निशान किसी बड़ी घटना की ओर इशारा करते हैं।

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बम बनाने का ‘डिजिटल तरीका’: मोबाइल वीडियो देखकर लोड हो रहा था बारूद

जांचकर्ताओं को शक है कि भुवनेश्वर छत धमाका कांड के पीछे किसी विदेशी या बाहरी हैंडलर का हाथ हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी शाहनवाज़ और उसके साथी मोबाइल फोन पर वीडियो देखकर बम को ‘एक्टिव मोड’ में लोड करने की कोशिश कर रहे थे।

मौके से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जो काफी खराब हालत में हैं। इन्हें डेटा रिकवरी और फॉरेंसिक एनालिसिस के लिए FSL (State Forensic Science Laboratory) भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल के डिजिटल फुटप्रिंट से इस साजिश के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सकता है।

मौके से प्रतिबंधित विस्फोटक बरामद: FIR में लगीं संगीन धाराएं

कमिश्नरेट पुलिस और बम स्क्वॉड की टीम को तलाशी के दौरान छत पर बिखरे हुए गनपाउडर और आईईडी के पुर्जे मिले हैं। पुलिस ने पुष्टि की है कि वहां से प्रतिबंधित विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। इस मामले में एयर फील्ड पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 34 दर्ज की गई है।

आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम की धारा 9(b), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3/4 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1), 125(b) व 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या इसमें किसी को कट्टरपंथी बनाने या जबरदस्ती शामिल करने का कोई एंगल तो नहीं है।

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NIA और SIT की संयुक्त कार्रवाई: साजिश की गहराई तक पहुंचने की कोशिश

स्थानीय पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) के बाद अब NIA ने पूरे केस की फाइल अपने हाथ में ले ली है। हालांकि, NIA ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में बमों में RDX के निशान नहीं मिले हैं, लेकिन धमाके की तीव्रता को देखते हुए ‘आतंकवाद’ के एंगल को पूरी तरह नकारा नहीं गया है।

भुवनेश्वर छत धमाका कांड की जांच के दौरान अधिकारी इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि क्या धमाके के तुरंत बाद कोई और संदिग्ध साथी मौके से फरार हुआ था। इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।

अपराधिक पृष्ठभूमि और भविष्य की साजिश पर पुलिस का बड़ा बयान

DCP जगमोहन मीणा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शाहनवाज़ मलिक का आपराधिक इतिहास रहा है और वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। पुलिस का मानना है कि यह समूह घर की छत को बम बनाने वाली यूनिट के रूप में इस्तेमाल कर रहा था।

फिलहाल, फॉरेंसिक टीम (SFSL) के नमूनों की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच एजेंसियां मृतक के कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं ताकि यह पता चल सके कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और उन्हें विस्फोटक सामग्री की सप्लाई कहां से हो रही थी।

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