Loading Now

“लालपरी का डिजिटल कवच”MSRTC बस में अब हर हरकत पर होगी नज़र!

लालपरी का डिजिटल कवच

लालपरी का डिजिटल कवच अब केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरता हुआ एक ठोस सुरक्षा तंत्र है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) ने अपनी बसों और स्टेशनों को सुरक्षित बनाने के लिए 111 करोड़ रुपये के विशाल बजट के साथ एक राज्यव्यापी निगरानी परियोजना शुरू की है।

इस परियोजना के तहत, पूरे महाराष्ट्र में 633 महत्वपूर्ण स्थानों पर कुल 7,035 हाई-डेफिनिशन (HD) CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को इस योजना की घोषणा करते हुए इसे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए एक ‘डिजिटल ढाल’ बताया। यह कदम उस समय उठाया गया है जब तकनीकी नवाचार और यात्री सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी।

स्वारगेट बस रेप कांड का असर: एक साल बाद मिला सुरक्षा का ठोस आश्वासन

इस पूरे प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि पिछले साल फरवरी में पुणे के स्वारगेट बस डिपो में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ी है। एक खड़ी बस के अंदर एक युवती के साथ हुए बलात्कार ने पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया था। उस घटना के बाद सरकार और MSRTC प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

लालपरी का डिजिटल कवच उसी घटना से ली गई एक कड़ी सीख है। प्रशासन ने महसूस किया कि केवल मैन्युअल गार्डिंग काफी नहीं है, बल्कि ‘थर्ड आई’ यानी कैमरों की निगरानी अनिवार्य है। स्वारगेट जैसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए अब बस स्टैंड के सुनसान कोनों, वर्कशॉप और डिपो के हर हिस्से को कैमरे की जद में लाया जा रहा है।

इसे भी पढ़े : “DPDP एक्ट बनाम RTI ” क्या खत्म हो जाएगी सरकारी पारदर्शिता?

मुंबई सेंट्रल में ‘सुपर कंट्रोल रूम’: जहाँ से होगी हर हलचल पर पैनी नजर

इस विशाल नेटवर्क को मैनेज करने के लिए मुंबई सेंट्रल में एक अत्याधुनिक सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम पूरे महाराष्ट्र के 633 लोकेशन से आने वाले लाइव फीड का केंद्र होगा। लालपरी का डिजिटल कवच को प्रभावी बनाने के लिए यहाँ ‘यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट’ (UAT) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

इसका मतलब है कि अब मुंबई में बैठकर अधिकारी सांगली के डिपो या नागपुर के वर्कशॉप की सुरक्षा स्थिति देख सकेंगे। यदि कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो स्थानीय पुलिस और डिपो मैनेजर को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा। यह केंद्रीकृत प्रणाली मानवीय त्रुटि की संभावना को कम करती है और त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) सुनिश्चित करती है।

633 लोकेशन और 7035 कैमरे: कहाँ-कहाँ होगी डिजिटल निगरानी?

MSRTC ने इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत बारीकी से लोकेशन्स का चयन किया है। लालपरी का डिजिटल कवच के तहत न केवल बस स्टैंड, बल्कि डिपो, डिवीजनल वर्कशॉप, सेंट्रल वर्कशॉप, डिवीजनल ऑफिस और भोसरी स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को भी कवर किया गया है।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर के 64 संवेदनशील स्थानों पर पहले ही कैमरे लगाए जा चुके हैं। अब इसका विस्तार पूरे राज्य में किया जा रहा है। इन कैमरों की मदद से न केवल छेड़छाड़ या चोरी जैसी वारदातों को रोका जा सकेगा, बल्कि बसों के रखरखाव और कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी निगरानी रखना आसान होगा।

AI और फेस रिकग्निशन: क्या यह तकनीक अपराधियों को पहचान पाएगी?

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक है। लालपरी का डिजिटल कवच के तहत लगाए जा रहे कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे, बल्कि इनमें से कई एआई-पावर्ड (AI-Powered) होंगे। इनमें ‘फेशियल रिकग्निशन’ यानी चेहरे पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पुराने अपराधियों या ब्लैकलिस्टेड तत्वों के बस स्टैंड पर आते ही सिस्टम अलार्म बजा देगा।

टेलीकम्युनिकेशन कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) को इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है, जो अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है। एक साल की समय सीमा के भीतर इस पूरे सिस्टम को पूरी तरह क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसे भी पढ़े : भारत-यूरोपीय संघ ‘मदर डील’: आर्थिक विकास या नई तकनीकी गुलामी?

111 करोड़ का भारी निवेश: बजट और भविष्य की चुनौतियां

परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा के लिए 111 करोड़ रुपये का आवंटन एक बड़ा निवेश है। लालपरी का डिजिटल कवच को सफल बनाने के लिए सरकार ने फंड की कमी को आड़े नहीं आने दिया है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती इन कैमरों के रखरखाव (Maintenance) की होगी।

अक्सर देखा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे तो लगा दिए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वे तकनीकी खराबी के कारण बंद हो जाते हैं। MSRTC ने इस बार कॉन्ट्रैक्टर के साथ सख्त नियम बनाए हैं ताकि 24×7 मॉनिटरिंग में कोई बाधा न आए। यात्रियों का मानना है कि अगर यह सिस्टम ईमानदारी से काम करता है, तो एसटी बसें एक बार फिर सुरक्षा का पर्याय बन जाएंगी।

विपक्ष के सवाल और यात्रियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

जहाँ सरकार इस प्रोजेक्ट को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि स्वारगेट की घटना के एक साल बाद इस पर अमल होना प्रशासन की कछुआ चाल को दर्शाता है। दूसरी ओर, दैनिक यात्रियों और खासकर वर्किंग महिलाओं ने इस कदम का स्वागत किया है।

लालपरी का डिजिटल कवच के बारे में बात करते हुए मुंबई-पुणे रूट पर सफर करने वाली एक यात्री ने कहा कि कैमरों की मौजूदगी से असामाजिक तत्वों में डर पैदा होगा और हम देर रात भी सफर करने में खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।

इसे भी पढ़े : बीमा FDI 100%: भारतीय वित्तीय सुरक्षा विदेशी नियंत्रण में?

सुरक्षा और तकनीक का नया मेल

अंततः, लालपरी का डिजिटल कवच महाराष्ट्र की एसटी बसों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सुरक्षा केवल कैमरों से नहीं आती, बल्कि इस भावना से आती है कि कोई हमें देख रहा है। 111 करोड़ रुपये, 7035 कैमरे और एक सेंट्रल कंट्रोल रूम के साथ MSRTC ने अपनी साख बचाने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाया है।

अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता है और इसका प्रबंधन सही रहता है, तो यह ‘डिजिटल महाराष्ट्र’ के विजन को एक नई ऊंचाई देगा। अब बस इंतजार है उस दिन का जब हर ‘लालपरी’ वास्तव में एक सुरक्षित किला बन जाएगी।

इसे भी पढ़े :  बिहार में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया: चुनाव आयोग का SC में बड़ा आश्वासन

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed