राजपाल यादव चेक बाउंस केस: एक्टर या जालसाज? मचा बवाल
राजपाल यादव चेक बाउंस केस ने एक बार फिर बॉलीवुड और कानून के बीच की महीन रेखा को सुर्खियों में ला दिया है। 17 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर निकले राजपाल यादव के चेहरे पर भले ही मुस्कान थी, लेकिन उनके पीछे 14 साल का एक ऐसा विवाद है जिसने एक व्यापारी को सड़क पर ला दिया।
मामला 2010 का है जब राजपाल ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली के व्यापारी माधव गोपाल अग्रवाल से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। समय के साथ ब्याज और पेनल्टी जुड़कर यह रकम 9 करोड़ रुपये के पार पहुँच गई।
आज जब राजपाल आजाद हवा में सांस ले रहे हैं, तब कर्जदाता माधव अग्रवाल का वो बयान वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि वह अपने ही पैसे वापस मांगने के लिए राजपाल के सामने ‘बच्चे की तरह रोए’ थे।
माधव गोपाल अग्रवाल का दर्द: “मैंने खुद बैंक से उधार लेकर राजपाल को पैसे दिए थे”
इस कानूनी लड़ाई के दूसरे पक्ष, माधव गोपाल अग्रवाल (मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड) ने एक सनसनीखेज इंटरव्यू में अपनी आपबीती सुनाई है। अग्रवाल के अनुसार, राजपाल यादव ने उन्हें विश्वास दिलाया था कि फिल्म लगभग पूरी है और अगर फंड नहीं मिला तो सब बर्बाद हो जाएगा।
जब अग्रवाल हिचकिचा रहे थे, तब राजपाल की पत्नी राधा ने उन्हें भावुक मैसेज भेजकर मदद मांगी। अग्रवाल का दावा है कि उन्होंने खुद बैंक से लोन लेकर और दूसरों से पैसे पकड़कर राजपाल को दिए थे।
राजपाल यादव चेक बाउंस केस का सबसे दुखद पहलू यह है कि जब अग्रवाल पैसे वापस मांगने मुंबई स्थित राजपाल के घर गए, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। अग्रवाल ने कहा, “मैं उनके सामने गिड़गिड़ाया और रोया क्योंकि मुझे बैंक का ब्याज चुकाना था, लेकिन राजपाल ने टालमटोल जारी रखी।”
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अता पता लापता: एक फिल्म जिसने ‘लक्ष्मण’ को बना दिया कर्जदार
साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ राजपाल यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसे उन्होंने खुद निर्देशित भी किया था। फिल्म में ओम पुरी और दारा सिंह जैसे दिग्गज कलाकार थे, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही। विशेषज्ञों का मानना है कि राजपाल यादव चेक बाउंस केस की जड़ें इसी फिल्म की असफलता में छिपी हैं।
फिल्म का बजट 6 करोड़ से बढ़कर 20 करोड़ तक पहुँच गया और कमाई मात्र 38 लाख रुपये रही। इसी असफलता के बोझ ने राजपाल को उन वादों से मुकरने पर मजबूर कर दिया जो उन्होंने माधव अग्रवाल से किए थे। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, राजपाल ने सात चेक दिए थे जो सभी बाउंस हो गए, जिसके बाद यह मामला आपराधिक श्रेणी में चला गया।
तिहाड़ से बाहर आते ही राजपाल की मांग: “जेल में होने चाहिए स्मोकिंग रूम”
जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव का अंदाज बदला-बदला नजर आया। उन्होंने तिहाड़ जेल के अपने अनुभव साझा करते हुए जेल सुधारों की वकालत की। सबसे विवादास्पद बयान तब आया जब उन्होंने कहा कि जेलों में ‘डेजिग्नेटेड स्मोकिंग रूम’ होने चाहिए। उन्होंने जेलों के आधुनिकीकरण और कैदियों के पुनर्वास (Rehabilitation) पर जोर दिया।
राजपाल यादव चेक बाउंस केस में जेल की सजा काट चुके एक्टर ने केबीसी (KBC) का उदाहरण देते हुए कहा कि 10 प्रतिशत कैदी ऐसे होते हैं जिन्हें ‘लाइफलाइन’ की जरूरत होती है। उनका तर्क था कि जेल को दंड के बजाय सुधार गृह के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि, उनके स्मोकिंग रूम वाले सुझाव पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
कोर्ट की फटकार और 1.5 करोड़ का डिपॉजिट: कैसे मिली अंतरिम राहत?
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव चेक बाउंस केस की सुनवाई के दौरान एक्टर के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि राजपाल ने बार-बार दिए गए आश्वासनों को तोड़ा है और यह कानून का मजाक उड़ाने जैसा है।
राजपाल को अंतरिम जमानत तभी मिली जब उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये की राशि शिकायतकर्ता के खाते में जमा की। कोर्ट ने उन्हें अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के आधार पर 18 मार्च 2026 तक की राहत दी है।
इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश न छोड़ने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल की सजा काटने से कर्ज खत्म नहीं होता, उन्हें पाई-पाई चुकानी होगी।
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बॉलीवुड का समर्थन: सलमान, अजय और सोनू सूद आए ‘लक्ष्मण’ की ढाल बनने
भले ही राजपाल यादव कानूनी पचड़ों में फंसे हों, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री ने उनका साथ नहीं छोड़ा। सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और सोनू सूद जैसे सितारों ने राजपाल को आर्थिक और नैतिक समर्थन देने का वादा किया है। सोनू सूद ने तो उन्हें अपनी अगली फिल्म में रोल देने और साइनिंग अमाउंट के जरिए मदद करने का प्रस्ताव भी दिया।
अनूप जलोटा ने भी राजपाल के लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। राजपाल यादव चेक बाउंस केस ने यह दिखा दिया है कि राजपाल ने अपने 30 साल के करियर में जो ‘इमोशनल कैपिटल’ कमाई है, वह आज उनके काम आ रही है। उनके मैनेजर गोल्डी का कहना है कि पूरी इंडस्ट्री उनके पीछे एक चट्टान की तरह खड़ी है।
क्या यह ‘इन्वेस्टमेंट’ था या ‘लोन’? राजपाल का अपना अलग ही दावा
दिलचस्प बात यह है कि राजपाल यादव चेक बाउंस केस में राजपाल यादव का पक्ष माधव अग्रवाल से बिल्कुल अलग रहा है। पुराने इंटरव्यूज (जैसे लल्लनटॉप) में राजपाल ने दावा किया था कि उन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया था, बल्कि माधव अग्रवाल ने उनके प्रोजेक्ट में निवेश किया था ताकि उनके पोते को बतौर हीरो लॉन्च किया जा सके।
राजपाल के अनुसार, उन्होंने कोई धोखाधड़ी नहीं की बल्कि व्यापारिक घाटा हुआ। हालांकि, कानून ‘पर्सनल गारंटी‘ और ‘पोस्ट-डेटेड चेक’ को कर्ज का हिस्सा मानता है। यही कारण है कि अदालत ने राजपाल के दावों को दरकिनार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी माना।
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क्या राजपाल यादव चुका पाएंगे माधव अग्रवाल का पूरा कर्ज?
अंततः, राजपाल यादव चेक बाउंस केस केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक सबक है कि सफलता की भूख में वित्तीय अनुशासन को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। राजपाल यादव के पास अब 18 मार्च तक का समय है, जिसके बाद उन्हें फिर से कोर्ट के सामने जवाबदेह होना होगा।
क्या वे बाकी के 7.5 करोड़ रुपये का इंतजाम कर पाएंगे या उन्हें फिर से तिहाड़ की सलाखों के पीछे जाना होगा? दूसरी ओर, माधव अग्रवाल जैसे व्यापारी के लिए यह न्याय की वो लंबी लड़ाई है जो पिछले 14 सालों से उनके सब्र का इम्तिहान ले रही है। बॉलीवुड के ‘कॉमेडी किंग’ की यह रियल लाइफ ट्रेजेडी अभी खत्म नहीं हुई है।
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