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दिल्ली हाई कोर्ट में तेजस्वी और राबड़ी की याचिका पर कल होगी बड़ी सुनवाई

तेजस्वी और राबड़ी

दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार, 5 जनवरी को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर उस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार है, जिसमें कथित IRCTC घोटाले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है। इस कानूनी कदम में न केवल लालू प्रसाद, बल्कि तेजस्वी और राबड़ी की याचिका भी शामिल है, जिसमें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, वर्तमान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को भी चुनौती दी गई है।

पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री ने हाल ही में 13 अक्टूबर को विशेष अदालत द्वारा पारित आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के सूत्रों के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जो इस घोटाले की कानूनी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेष अदालत की तीखी टिप्पणी: ‘भाई-भतीजावाद’ का संभावित उदाहरण

अक्टूबर में पारित अपने विस्तृत आदेश में, विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था। ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश ने जांच के दायरे में आए लेन-देन की प्रकृति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “रांची और पुरी में रेलवे के होटलों में निजी भागीदारी हासिल करने की आड़ में पोषित भाई-भतीजावाद का एक संभावित उदाहरण” करार दिया था। अदालत का मानना था कि पूरी प्रक्रिया निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के नाम पर वास्तव में अपनों को फायदा पहुँचाने के लिए की गई थी। लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, और इसी संदर्भ में तेजस्वी और राबड़ी की याचिका में ट्रायल कोर्ट के इन शुरुआती निष्कर्षों को पलटने की मांग की गई है।

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CBI की 2017 की FIR और 2004-2009 के टेंडर में धांधली के आरोप

यह पूरा मामला 2017 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब उन्होंने पटना और पुरी में IRCTC के होटल कॉन्ट्रैक्ट देने में भारी अनियमितताएं की थीं। आरोप है कि आकर्षक टेंडर अपने पसंदीदा लोगों (सुजाता होटल्स) को देने के बदले में लालू यादव और उनके परिवार ने प्राइम लैंड (कीमती जमीन) और कंपनियों के इक्विटी शेयर रिश्वत के रूप में प्राप्त किए थे। CBI की चार्जशीट में लालू यादव के अलावा उनके परिवार के सदस्यों, तत्कालीन IRCTC अधिकारियों और निजी खिलाड़ियों सहित कुल 14 लोगों के नाम शामिल थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर धांधली की गई थी ताकि सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाकर निजी लाभ कमाया जा सके।

कानूनी प्रावधान और सजा के कड़े मानक: 10 साल तक की कैद का खतरा

अदालत ने लालू प्रसाद यादव और अन्य लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए हैं। धारा 13(2) लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार के लिए सजा का प्रावधान करती है, जबकि शेष धाराएं आधिकारिक पद के दुरुपयोग से संबंधित हैं। यदि इस मामले में आरोपी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें PC एक्ट के तहत अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। इसके अतिरिक्त, तेजस्वी और राबड़ी की याचिका उन धोखाधड़ी के आरोपों को भी चुनौती देती है जो IPC की धारा 420 के तहत लगाए गए हैं। धोखाधड़ी के अपराध में दोषी पाए जाने पर सात साल तक की कैद का प्रावधान है। साथ ही, सभी 14 आरोपियों के खिलाफ धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश रचने का सामान्य आरोप भी तय किया गया है।

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लैंड फॉर होटल टेंडर: रिश्वत के रूप में कीमती जमीन लेने का दावा

CBI की जांच के अनुसार, रांची और पुरी के दो IRCTC होटलों को सुजाता होटल्स नाम की कंपनी को लीज पर देने के बदले में करोड़ों रुपये की जमीन लालू परिवार से जुड़ी कंपनी ‘M/s LARA प्रोजेक्ट्स LLP’ को बाजार मूल्य के एक बेहद छोटे हिस्से पर ट्रांसफर की गई थी। ट्रायल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा था कि टेंडर प्रक्रिया के पात्रता मानदंडों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे और लालू यादव को इन प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी थी।

कोर्ट ने पाया कि जमीन के टुकड़ों का कम मूल्यांकन किया गया और अंततः वे लालू यादव के नियंत्रण वाली संस्थाओं के पास पहुँच गए। लालू की लीगल टीम का तर्क है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है, इसीलिए तेजस्वी और राबड़ी की याचिका के जरिए वे इन आरोपों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी और RJD बनाम BJP की जंग

इस कानूनी लड़ाई का राजनीतिक असर भी काफी गहरा है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस पूरे मामले को केंद्र की सत्ताधारी भाजपा द्वारा ‘बदले की राजनीति’ और ‘केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग’ के रूप में पेश कर रही है। वहीं, विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जरूरी कार्रवाई बता रहा है। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की संलिप्तता ने इस केस को और भी हाई-प्रोफाइल बना दिया है, क्योंकि तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यादव परिवार का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि सच सामने आएगा। सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस राजनीतिक माहौल में और भी अधिक गर्मी पैदा करने वाली है।

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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ पर टिकी सबकी नजरें

सोमवार को होने वाली इस सुनवाई का परिणाम इस पूरे केस की दिशा बदल सकता है। यदि दिल्ली हाई कोर्ट लालू परिवार के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे पर रोक लग सकती है या आरोपों की समीक्षा के आदेश दिए जा सकते हैं। इससे खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे लालू प्रसाद यादव और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को बड़ी राहत मिल सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को इस बात का परीक्षण करेगा कि क्या ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने का आदेश कानूनी रूप से सही था या नहीं। तेजस्वी और राबड़ी की याचिका में उठाए गए तकनीकी और कानूनी बिंदुओं पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की टिप्पणियां इस मामले में निर्णायक साबित होंगी।

बिहार की राजनीति और कानूनी भविष्य का फैसला

IRCTC घोटाले का यह जिन्न एक बार फिर लालू परिवार के सामने खड़ा है। 2004-2009 के पुराने मामले में 2026 की शुरुआत में होने वाली यह सुनवाई बिहार की राजनीति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित सभी 14 आरोपियों के खिलाफ जो आपराधिक साजिश (120B) और धोखाधड़ी (420) के कॉमन आरोप तय किए गए हैं, वे उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा सवालिया निशान लगा सकते हैं। आरजेडी प्रमुख की ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटने की यह कोशिश सफल होती है या नहीं, इसका पता 5 जनवरी की कार्यवाही के बाद ही चलेगा। फिलहाल, पूरा बिहार और देश की राजनीतिक नजरें दिल्ली हाई कोर्ट के गलियारों पर टिकी हुई हैं।

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