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क्या बदला दिल्ली में? रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड पर छिड़ी जंग

रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड

रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड आज दिल्ली की गलियों से लेकर सोशल मीडिया के ट्रेंड्स तक हर जगह चर्चा का विषय है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने दिल्ली में अपना एक साल पूरा कर लिया है, लेकिन यह सफर उपलब्धियों से ज्यादा विवादों और तीखी बयानबाजी के लिए याद किया जा रहा है।

शनिवार, 21 फरवरी 2026 को जारी इस रिपोर्ट कार्ड में जहाँ मुख्यमंत्री ने ‘परफॉरमेंस’ को अपनी प्राथमिकता बताया है, वहीं विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे ‘असफलता का पुलिंदा’ करार दिया है।

रेखा गुप्ता ने अपने भाषणों में अक्सर पिछले शासन की कमियों को निशाना बनाया है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आयुष्मान भारत और अटल कैंटीन जैसी कल्याणकारी योजनाओं की सुस्त रफ़्तार ने उनकी अपनी सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा क्रांति का नया चेहरा: 75 पीएम श्री स्कूल और फीस रेगुलेशन का दावा

शिक्षा के क्षेत्र में रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड कुछ सकारात्मक बदलावों का दावा करता है, जिसमें दिल्ली सरकार ने 75 नए ‘सीएम श्री स्कूलों’ (CM Shri Schools) के शुभारंभ को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों के जरिए विश्वस्तरीय शिक्षा को सामान्य नागरिकों तक पहुँचाया जा रहा है।

इसके अलावा, निजी स्कूलों की फीस पर कड़ा नियंत्रण रखने के लिए नए रेगुलेशन लागू करने की बात भी कही गई है ताकि मिडिल क्लास परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिल सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए स्कूल खोलने से व्यवस्था नहीं बदलेगी, क्योंकि पुरानी इमारतों की मरम्मत और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दे अभी भी जस के तस बने हुए हैं।

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धुंधली होती दिल्ली: प्रदूषण और महिलाओं की सुरक्षा पर ‘आप’ का पलटवार

विपक्ष ने रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड की धज्जियां उड़ाते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह विफल रही है। आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाईलाइट किया कि पिछले एक साल में दिल्ली की हवा और अधिक जहरीली हुई है और सरकार के पास इसके लिए कोई ठोस मास्टरप्लान नहीं है।

महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और सुरक्षा के जो वादे चुनाव के समय किए गए थे, वे अब तक केवल पोस्टरों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। आप नेताओं का कहना है कि रेखा गुप्ता केवल पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर अपनी पीठ थपथपा रही हैं, जबकि असलियत में जनता के बुनियादी मुद्दों पर कोई काम नहीं हुआ है।

अटल कैंटीन और आयुष्मान भारत: क्यों थमी कल्याणकारी योजनाओं की रफ़्तार?

बीजेपी सरकार के प्रमुख वादों में शामिल आयुष्मान भारत योजना और अटल कैंटीन की स्थिति रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड में काफी चिंताजनक नजर आती है। रिपोर्ट बताती है कि आयुष्मान भारत को दिल्ली में लागू करने की प्रक्रिया प्रशासनिक लालफीताशाही के कारण उम्मीद से कहीं ज्यादा धीमी रही है।

वहीं, गरीबों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘अटल कैंटीन’ की संख्या भी लक्ष्य से बहुत पीछे है। आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सार्वजनिक बयानों में दिखने वाली आक्रामकता उनकी प्रशासनिक फाइलों में नजर नहीं आती। योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई इस देरी ने उन हजारों परिवारों को निराश किया है जो एक बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे थे।

बयानबाजी बनाम प्रदर्शन: क्या गफ्स और विवादों ने बिगाड़ा सरकार का चेहरा?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यकाल का यह पहला साल उनकी ‘पब्लिक गफ्स’ (सार्वजनिक चूक) और विवादित बयानों के लिए भी सुर्खियों में रहा है। रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड का एक काला पक्ष यह भी है कि कई मौकों पर उनके बयानों ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की।

चाहे वह प्रदूषण के आंकड़ों को लेकर हो या केंद्र सरकार के साथ समन्वय की बात, मुख्यमंत्री के बेबाक अंदाज ने अक्सर कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ से निकलकर ‘परफॉरमेंस पॉलिटिक्स’ की ओर बढ़ने का उनका दावा तभी सफल होगा जब वे विवादों के बजाय ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

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जेन-जी और मिलेनियल्स की आवाज़: क्या डिजिटल दिल्ली सिर्फ एक टैगलाइन है?

दिल्ली की युवा आबादी रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड को एक अलग नज़रिए से देख रही है। इंस्टाग्राम और एक्स (X) पर युवा पूछ रहे हैं कि क्या ‘डिजिटल दिल्ली’ का सपना सिर्फ वाई-फाई हॉटस्पॉट और ऐप तक सीमित है? युवाओं को चिंता है कि स्टार्टअप कल्चर और रोजगार के अवसरों पर सरकार की चुप्पी खतरनाक है।

जहाँ रेखा गुप्ता पिछले शासन की कमियों को गिनाती हैं, वहीं युवा पीढ़ी भविष्य के रोडमैप की मांग कर रही है। उनके लिए प्रदूषण मुक्त दिल्ली और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन कोई लग्जरी नहीं, बल्कि जीने का अधिकार है। रिपोर्ट कार्ड में युवाओं के लिए विशेष योजनाओं की कमी इस वर्ग को सरकार से दूर कर सकती है।

अगले पांच साल का रोडमैप: क्या बीजेपी अपनी कमियों से सीखेगी?

भले ही रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड में कई खामियां बताई जा रही हों, लेकिन सरकार का दावा है कि यह केवल आधार तैयार करने का साल था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘परफॉर्मेंस’ को अपना नया मंत्र बताते हुए कहा है कि अगले कुछ वर्षों में दिल्ली का नक्शा बदल जाएगा।

उनका लक्ष्य दिल्ली को केवल राष्ट्रीय राजधानी नहीं, बल्कि एक ग्लोबल सिटी बनाना है जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण साथ-साथ चल सकें। हालांकि, यह विजन तभी पूरा होगा जब सरकार आयुष्मान भारत जैसी रुकी हुई योजनाओं को गति देगी और विपक्ष के तीखे लेकिन जायज सवालों का ठोस जवाब देगी। दिल्ली की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है।

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विश्वास और वास्तविकता के बीच झूलती दिल्ली की राजनीति

अंततः, रेखा गुप्ता रिपोर्ट कार्ड यह दर्शाता है कि सत्ता में आना जितना कठिन है, उस पर टिके रहना और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। रेखा गुप्ता की सरकार के पास अभी वक्त है कि वे अपनी प्रशासनिक चूकों को सुधारें और दिल्ली के हित में केंद्र और विपक्ष के साथ मिलकर काम करें।

दिल्ली की राजनीति अब एक ऐसे दौर में है जहाँ केवल पुराने शासन को कोसने से काम नहीं चलेगा, जनता को अब परिणाम चाहिए। आने वाले महीनों में प्रदूषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सरकार के कदम ही यह तय करेंगे कि 2026 की यह रिपोर्ट कार्ड केवल एक कागजी कार्यवाही थी या दिल्ली के सुनहरे भविष्य की शुरुआत।

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