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गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड: 100% डिस्काउंट कोड से 2 लाख की चोरी

गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड

गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड आज स्टार्टअप इकोसिस्टम में चर्चा का सबसे गर्म विषय बन गया है, जब शार्क टैंक इंडिया फेम दिल्ली बेस्ड स्नीकर ब्रांड ‘गल्ली लैब्स’ के फाउंडर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। रविवार, 22 फरवरी 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के एक नए नियुक्त कर्मचारी ने जॉइनिंग के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही बैकएंड सिस्टम में सेंध लगाकर खुद के लिए 100% डिस्काउंट कूपन कोड तैयार कर लिए।

इन कूपन्स का इस्तेमाल कर उसने 2 लाख रुपये मूल्य के प्रीमियम स्नीकर्स का ऑर्डर दिया और माल डिलीवर होते ही नौकरी छोड़कर फरार हो गया। इस घटना ने न केवल कंपनी को वित्तीय चोट पहुँचाई है, बल्कि स्टार्टअप्स के बीच इंटरनल सिक्योरिटी और कर्मचारी वेरिफिकेशन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

डिस्काउंट कोड का डिजिटल खेल: कैसे एक ‘न्यू हायर’ ने सिस्टम को दिया चकमा?

इस गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) तकनीकी रूप से काफी चालाकी भरी थी। कर्मचारी को मार्केटिंग या ऑपरेशंस टीम में शामिल किया गया था, जहाँ उसके पास डिस्काउंट कोड बनाने और उन्हें मैनेज करने का एक्सेस था।

उसने चुपके से ऐसे कोड जनरेट किए जो बाहरी ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि केवल उसके व्यक्तिगत लाभ के लिए थे। यह कोड सिस्टम में ‘फुल वेवर’ के रूप में सेट किए गए थे, जिससे जूतों की कीमत शून्य हो गई। हैरानी की बात यह है कि इन्वेंट्री और ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम ने शुरुआत में इन ऑर्डर्स को फ्लैग नहीं किया, क्योंकि कोड वैध तरीके से ‘इन-हाउस’ बनाए गए थे।

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फाउंडर का ‘नेम एंड शेम’ अभियान: सोशल मीडिया पर फूटा गुस्से का गुबार

गल्ली लैब्स के फाउंडर ने इस गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड को दबाने के बजाय सार्वजनिक करने का फैसला किया ताकि अन्य स्टार्टअप्स सतर्क रह सकें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कर्मचारी की करतूतों का विवरण साझा करते हुए इसे ‘विश्वासघात’ का चरम बताया।

फाउंडर ने लिखा कि एक छोटे स्टार्टअप के लिए 2 लाख रुपये की राशि बहुत मायने रखती है, जो उनके महीनों की कड़ी मेहनत और निवेश का हिस्सा है। उन्होंने अपराधी को ‘नेम एंड शेम’ (नाम उजागर कर शर्मिंदा करना) करने की रणनीति अपनाई है, जिसे इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। कई लोग फाउंडर के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाने की सलाह दे रहे हैं।

एक हफ्ते में इस्तीफा और गायब माल: सोची-समझी साजिश का संदेह

जांच में यह भी सामने आया है कि यह गल्ली लैब्स कर्मचारी फ्रॉड महज एक तात्कालिक विचार नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। कर्मचारी ने जिस तरह से जॉइनिंग के तुरंत बाद कोड्स पर काम शुरू किया और माल डिलीवर होते ही इस्तीफा दे दिया, वह एक प्रोफेशनल स्कैमर की कार्यशैली को दर्शाता है।

पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने संभवतः फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र या गलत जानकारी के आधार पर नौकरी हासिल की थी। कंपनी अब अपने रिक्रूटमेंट प्रोसेस की समीक्षा कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस साजिश में कंपनी के बाहर के कुछ और लोग भी शामिल थे जिन्होंने जूतों की रीसेल (दोबारा बिक्री) में मदद की।

स्नीकर हेड्स और रीसेल मार्केट: कहाँ गए 2 लाख के बेशकीमती जूते?

विशेषज्ञों का मानना है कि गल्ली लैब्स से चुराए गए इन प्रीमियम स्नीकर्स को अब ग्रे मार्केट या अनऑफिशियल रीसेल प्लेटफॉर्म्स पर बेचा जा सकता है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में स्नीकर कल्चर बहुत लोकप्रिय है, जहाँ लिमिटेड एडिशन जूतों की भारी मांग रहती है।

चूकि ये जूते 100% डिस्काउंट पर हासिल किए गए थे, इसलिए स्कैमर इन्हें कम कीमत पर बेचकर पूरा मुनाफा कमा सकता है। फाउंडर ने स्नीकर कम्युनिटी से भी अपील की है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध व्यक्ति गल्ली लैब्स के नए कलेक्शन को भारी डिस्काउंट पर बेचता हुआ मिले, तो तुरंत कंपनी को सूचित करें। यह चोरी केवल पैसों की नहीं, बल्कि ब्रांड की विशिष्टता और साख की भी है।

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स्टार्टअप्स के लिए वेक-अप कॉल: इंटरनल ऑडिट और एक्सेस कंट्रोल की अहमियत

मनीकंट्रोल और लाइवमिंट जैसी आर्थिक वेबसाइट्स ने इस घटना को स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है। अक्सर शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स काम की रफ़्तार बढ़ाने के चक्कर में ‘एक्सेस कंट्रोल’ (Access Control) और ‘प्रिविलेज मैनेजमेंट’ को नजरअंदाज कर देते हैं।

नए कर्मचारियों को महत्वपूर्ण सिस्टम का पूरा एक्सेस देना जोखिम भरा हो सकता है। जानकारों का कहना है कि किसी भी ट्रांजेक्शनल सिस्टम में ‘फोर-आई प्रिंसिपल’ (Four-Eye Principle) लागू होना चाहिए, यानी किसी भी बड़े डिस्काउंट कोड को लाइव करने के लिए कम से कम दो स्तरों पर मंजूरी अनिवार्य हो। गल्ली लैब्स के मामले में इस बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी का फायदा उठाया गया।

जेन-जी और मिलेनियल्स का रिएक्शन: इंटरनेट पर छिड़ी नैतिकता की जंग

सोशल मीडिया पर इस खबर ने युवाओं के बीच हलचल पैदा कर दी है। इंस्टाग्राम और रेडिट पर मीम्स का सैलाब आ गया है, जहाँ कुछ लोग मजाक में इसे ‘लाइफ हैक’ कह रहे हैं, तो वहीं गंभीर यूजर्स इसकी कड़ी निंदा कर रहे हैं। जेन-जी के युवाओं का मानना है कि इस तरह की घटनाएं उन ईमानदार उम्मीदवारों के लिए दरवाजे बंद कर देती हैं जो वाकई काम करना चाहते हैं।

स्टार्टअप कल्चर में ‘भरोसा’ एक बड़ी पूंजी है और इस फ्रॉड ने उसे हिलाकर रख दिया है। युवाओं के बीच बहस इस बात पर भी है कि क्या स्टार्टअप फाउंडर्स को कर्मचारियों की बैकग्राउंड चेक में और अधिक निवेश करना चाहिए या सिस्टम को इतना सुरक्षित बनाना चाहिए कि कोई उसमें सेंध न लगा सके।

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विश्वास और सुरक्षा के बीच का नाजुक संतुलन

अंततः, गल्ली लैब्स के साथ हुआ यह हादसा एक कड़वा सबक है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है। एक सीनियर डिजिटल एडिटर के तौर पर मेरा मानना है कि स्टार्टअप्स को ‘कल्चर ऑफ ट्रस्ट’ और ‘सिस्टम ऑफ सिक्योरिटी’ के बीच एक बारीक रेखा खींचनी होगी।

आप अपने कर्मचारियों पर भरोसा तो कर सकते हैं, लेकिन अपनी तिजोरी की चाबी (डिजिटल एक्सेस) बिना सोचे-समझे किसी के हाथ में नहीं दे सकते। गल्ली लैब्स इस आर्थिक चोट से उबर जाएगा, लेकिन यह घटना भारतीय स्टार्टअप जगत में हायरिंग के तरीकों को हमेशा के लिए बदल सकती है। अब समय है कि कंपनियां अपनी तकनीकी दीवारों को और ऊंचा करें और नैतिकता को सर्वोपरि रखें।

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