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मोदी का इज़राइल भाषण: कांग्रेस का हमला और नेतन्याहू का बयान

मोदी का इज़राइल भाषण

मोदी का इज़राइल भाषण इस समय वैश्विक राजनीति में एक नई बहस का केंद्र बन गया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया है। 26 फरवरी 2026 को दिए गए अपने ऐतिहासिक संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत पूरी दृढ़ता और पूर्ण विश्वास के साथ आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल की लड़ाई में उसके साथ खड़ा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए खतरा है और सभ्य समाजों को इसके खिलाफ एकजुट होना ही होगा। पीएम मोदी का यह बयान उस समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है, और उनके इस ‘फर्म स्टैंड’ ने भारत की पारंपरिक कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के ‘बोल्ड शिफ्ट’ के रूप में देखा है।

कांग्रेस का तीखा प्रहार: ‘मोदी के भाषण ने भारत के नैतिक कद को कम कर दिया है’

प्रधानमंत्री के इस संबोधन के तुरंत बाद भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी का इज़राइल भाषण की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के ऐतिहासिक और संतुलित रुख को दरकिनार कर पीएम मोदी ने देश के नैतिक कद को नुकसान पहुँचाया है।

कांग्रेस का तर्क है कि भारत हमेशा से उत्पीड़ित लोगों की आवाज रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री के इस एकतरफा संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विपक्ष ने इसे ‘चुनावी कूटनीति’ करार देते हुए कहा कि घरेलू राजनीति के फायदे के लिए दशकों पुरानी विदेश नीति को बदलना देश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ हो सकता है।

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क्या कह रही है भारत की जनता मोदी के दौरे पर?

अल-जज़ीरा की एक विशेष रिपोर्ट में भारत के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों की राय ली गई, जो पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा को लेकर पूरी तरह से बंटी हुई नजर आती है। एक तरफ जहां युवाओं का एक बड़ा वर्ग इज़राइल के साथ मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंधों का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग मानवीय आधार पर फिलिस्तीन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हैं।

मोदी का इज़राइल भाषण सोशल मीडिया पर भी बहस का मुद्दा बना हुआ है, जहाँ लोग हैशटैग #IndiaWithIsrael और #StandWithPalestine के साथ अपनी राय रख रहे हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में कॉलेज जाने वाले छात्रों का मानना है कि भारत को अपने हित पहले देखने चाहिए, जबकि पुराने जानकार इसे कूटनीतिक असंतुलन का दौर मान रहे हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू का भावुक खुलासा: ‘इज़राइल पर भारत का कर्ज है’

इन कूटनीतिक तल्खियों के बीच एक बहुत ही व्यक्तिगत और दिलचस्प कहानी एनडीटीवी की रिपोर्ट से सामने आई। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि वे भारत के प्रति एक विशेष लगाव महसूस करते हैं। नेतन्याहू ने एक सनसनीखेज और मधुर किस्सा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी सारा ने अपनी पहली डेट एक ‘इंडियन रेस्टोरेंट’ में की थी।

नेतन्याहू ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत भारतीय स्वाद के साथ हुई थी, इसलिए वे हमेशा भारत के ऋणी रहेंगे। यह मानवीय पहलू मोदी का इज़राइल भाषण के बाद उपजे तनावपूर्ण माहौल में एक ताजी हवा के झोंके जैसा था, जिसने यह दिखाया कि दो देशों के बीच रिश्ते केवल मिसाइलों और व्यापार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत यादों और साझा अनुभवों पर भी टिके होते हैं।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: भारत और इज़राइल के बीच नई रणनीतिक साझेदारी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग करते हुए किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद का शिकार रहा है और वह उन देशों के दर्द को समझता है जो हिंसा और नफरत का सामना कर रहे हैं।

मोदी का इज़राइल भाषण इस बात की तस्दीक करता है कि भारत अब कूटनीतिक संकोच को छोड़कर उन देशों के साथ खुलकर गठबंधन करने को तैयार है जिनके हित भारत से मिलते हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारत और इज़राइल के बीच सहयोग एक नए स्तर पर पहुँच जाएगा। यह साझेदारी केवल दो सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दो ऐसी सेनाओं के बीच है जो दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

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जेन-जी और सोशल मीडिया आउटरेज: विचारधाराओं की जंग या डिजिटल कूटनीति?

आज की डिजिटल पीढ़ी इस पूरे दौरे को इंस्टाग्राम रील्स और टिकटॉक के माध्यम से देख रही है। जहाँ नेतन्याहू और मोदी की ‘ब्रोमैंस’ वाली तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वहीं राजनीतिक रूप से सक्रिय युवा इस दौरे के वैश्विक प्रभाव पर सवाल उठा रहे हैं। युवाओं के बीच यह चर्चा गर्म है कि क्या भारत को इज़राइल का बिना शर्त समर्थन करना चाहिए या उसे अपनी गुटनिरपेक्ष (Non-Aligned) नीति पर कायम रहना चाहिए।

मोदी का इज़राइल भाषण के क्लिप्स को युवा इन्फ्लुएंसर्स द्वारा फैक्ट-चेक किया जा रहा है और इस पर अलग-अलग विचारधाराओं के बीच बहस हो रही है। यह दिखाता है कि विदेश नीति अब केवल बंद कमरों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह हर स्मार्टफोन तक पहुँच चुकी है जहाँ हर लाइक और कमेंट एक राजनीतिक बयान है।

ऐतिहासिक रिश्तों की कसौटी: नेसेट में गूंजी भारत की साख और कांग्रेस की नाराजगी

नेसेट में दिया गया प्रधानमंत्री का भाषण ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने पहले कभी इज़राइली संसद में इतने स्पष्ट शब्दों में समर्थन व्यक्त नहीं किया था। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इस भाषण ने मध्य पूर्व के अन्य मित्र देशों, विशेष रूप से अरब देशों के साथ भारत के रिश्तों को जोखिम में डाल दिया है।

कांग्रेस के अनुसार, इज़राइल के साथ नजदीकी का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि भारत फिलिस्तीन के न्यायपूर्ण संघर्ष को पूरी तरह भुला दे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ‘डिप्लोमैटिक टाइटरोप वॉक’ (रस्सी पर चलने जैसा कठिन कार्य) है, जहाँ मोदी सरकार ने अब इज़राइल की तरफ झुकने का स्पष्ट निर्णय ले लिया है, जो कि भविष्य के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

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कूटनीतिक साहस और घरेलू विवाद के बीच भारत का नया रास्ता

अंततः, पीएम मोदी की यह इज़राइल यात्रा और वहां दिया गया उनका संबोधन भारतीय विदेश नीति के एक नए युग की शुरुआत है। इसमें साहस भी है, स्पष्टता भी है और विवादों की गुंजाइश भी। नेतन्याहू का अपनी निजी जिंदगी के साथ भारत को जोड़ना यह दिखाता है कि दोनों नेताओं के बीच एक ‘केमिस्ट्री’ है, जो भविष्य के समझौतों को आसान बना सकती है।

लेकिन कांग्रेस की नाराजगी और जनता का बंटा हुआ जनमत यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र में हर कूटनीतिक जीत की कीमत घरेलू बहस से चुकानी पड़ती है। भारत अब उस रास्ते पर चल पड़ा है जहाँ वह अपने सुरक्षा हितों को सर्वोपरि रख रहा है, चाहे उसके लिए उसे दशकों पुरानी लीक से हटकर ही क्यों न चलना पड़े। यह ‘न्यू इंडिया’ की वो आवाज है जो दुनिया के मंच पर अपनी शर्तों पर बोलना जानती है।

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