“मुंबई ऑटो ड्राइवर मराठी ” ट्रेनिंग की डेडलाइन 15 अगस्त पास
मुंबई ऑटो ड्राइवर मराठी ट्रेनिंग महाराष्ट्र सरकार द्वारा कमर्शियल गाड़ियों—जैसे ऑटो-रिक्शा, काली-पीली टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब—के चालकों के लिए बुनियादी मराठी भाषा की जानकारी अनिवार्य किए जाने के बाद मुंबई के रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) और कम्युनिटी हॉल इन दिनों क्लासरूम में तब्दील हो चुके हैं।
15 अगस्त की समय-सीमा (डेडलाइन) बेहद करीब है, लेकिन जमीनी आंकड़े और व्यवस्था की कमियां इस मुहिम के प्रभावी कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
मुंबई में पंजीकृत लगभग दो लाख ऑटो-रिक्शा चालकों में से अब तक केवल 32,520 चालकों ने ही चार सत्रों (सेशनों) वाला अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि 1.6 लाख से अधिक ड्राइवर अब भी बिना प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट के सड़कों पर गाड़ियां चला रहे हैं।
व्यवस्था की कमियां: बिना क्लास अटेंड किए बिक रहे सर्टिफिकेट
सड़कों पर दौड़ते ऑटो-रिक्शा और RTO काउंटरों के बीच की पड़ताल में नियमों के पालन से ज्यादा उनकी कमियां और धांधली उजागर हुई हैं। शहर के कई चालकों का आरोप है कि ट्रेनिंग सेंटरों के बाहर बिचौलिए सक्रिय हैं, जो बिना क्लास लिए पैसों के एवज में सर्टिफिकेट दिलाने का दावा कर रहे हैं।
500 रुपये में फर्जीवाड़े का आरोप: वडाला RTO केंद्र पर अपना अनुभव साझा करते हुए एक ऑटो ड्राइवर ने बताया कि जब वह क्लास में पंजीकरण की जानकारी लेने पहुंचा, तो बाहर खड़े एक एजेंट ने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट की प्रतियां मांगीं।
उसने दावा किया कि 500 रुपये देने पर उसे चारों कक्षाएं अटेंड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और केवल एक क्लास के बाद ही 15 अगस्त को सर्टिफिकेट थमा दिया जाएगा।
परमिट होल्डर बनाम वास्तविक ड्राइवर का पेंच: नियमों में एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक कमी यह सामने आई है कि नियम ‘परमिट धारक’ पर लागू हो रहा है, न कि ‘वास्तविक चालक’ पर।
मुंबई में एक दशक से गाड़ी चला रहे राकेश यादव और राहुल कुमार यादव बताते हैं कि कई परमिट मराठी भाषी मालिकों के नाम पर पंजीकृत हैं, लेकिन वे ऑटो गैर-मराठी प्रवासियों को किराए पर चलाने के लिए दे देते हैं।
कानूनन परमिट मालिक के मराठी भाषी होने के कारण किराए पर गाड़ी चलाने वाले चालक को प्रशिक्षण से छूट मिल जाती है, जबकि यात्रियों से सीधा संवाद वही चालक करता है।
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RTO केंद्रों पर क्लासरूम जैसा नजारा: ‘नमस्कार’ से शुरुआत, टूटी-फूटी भाषा में आत्मविश्वास
दूसरी ओर, तारदेव RTO और साकी नाका जैसे इलाकों में स्थिति किसी स्कूल के परीक्षा केंद्र जैसी नजर आ रही है। साकी नाका के एक छोटे कम्युनिटी हॉल में सुबह से ही 50 से 70 वर्ष की आयु के सैकड़ों चालक—जिनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के प्रवासी हैं—मराठी के बुनियादी वाक्य रटने में जुटे हैं।
बोलचाल का अभ्यास: “मीटर चालू करा” (मीटर चालू करें), “कुठे जायचं आहे?” (कहाँ जाना है?), और “रिक्शा खाली आहे का?” जैसी दो पन्नों की बुकलेट हाथ में लिए चालक एक-दूसरे के साथ अभ्यास करते दिखे।
सीखने का उत्साह और चुनौतियां: तारदेव RTO में इस अभियान की देखरेख कर रहीं लिटिका पास्टे के अनुसार, अब तक लगभग 3,000 चालक उनके केंद्र से प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चालकों से व्याकरण की शुद्धता की अपेक्षा नहीं की जा रही, बल्कि केवल यह देखा जा रहा है कि वे यात्रियों के साथ बुनियादी संवाद कर पाते हैं या नहीं। यदि कोई चालक ओरल टेस्ट में असफल होता है, तो उसे दो अतिरिक्त कक्षाएं देकर पुनः अवसर दिया जाता है।
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दशकों का अनुभव, लेकिन परीक्षा के नाम से घबराहट
वर्षों से मुंबई की सड़कों पर सेवाएं दे रहे वरिष्ठ चालकों के लिए यह प्रक्रिया किसी भावुक अनुभव से कम नहीं है।
68 वर्षीय रामाशंकर मिश्रा (मूल निवासी जौनपुर, UP) जो 1985 से मुंबई में हैं, कहते हैं कि यात्री स्वयं प्रायः हिंदी में ही बात करते हैं, फिर भी शहर में ढलने के लिए मराठी सीखना एक अच्छी पहल है।
वहीं, 72 वर्षीय रामचंद्र यादव टेस्ट के बाद हताश नजर आए। 26 जुलाई 2005 की बाढ़ में अपनी पत्नी को खोने वाले यादव ने बताया कि वे हिंदी में सब समझा सकते हैं, लेकिन मराठी में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर समय पर नहीं दे पाए, जिसके कारण उन्हें दोबारा तैयारी करने को कहा गया है।
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व्यवहारिक बाधा: यात्रियों की ओर से हिंदी की पहल
प्रशिक्षण ले रहे अधिकांश चालकों ने एक साझा व्यवहारिक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। चालकों के अनुसार, 90 प्रतिशत मामलों में यात्री—चाहे वे स्वयं मराठी भाषी ही क्यों न हों—संवाद की शुरुआत हिंदी में करते हैं। इसके चलते चालकों को सीखी हुई मराठी का अभ्यास करने का अवसर ही नहीं मिल पाता।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों और RTO अधिकारियों का मानना है कि 15 अगस्त तक सभी चालकों को प्रमाणित करना नामुमकिन जैसा है, लेकिन इस पहल ने शहर के प्रवासी चालकों और स्थानीय भाषा के बीच संवाद का एक नया रास्ता जरूर खोल दिया है। यात्रियों से बेहतर बातचीत के लिए प्रशासन ने शुरू की मुंबई ऑटो ड्राइवर मराठी ट्रेनिंग लाइसेंस और नियमों में छूट के बीच जानें मुंबई ऑटो ड्राइवर मराठी ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया
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