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संसद मॉनसून सत्र गतिरोध बरकरार: छात्रों के मुद्दे पर चर्चा को तैयार सरकार,

संसद मॉनसून सत्र गतिरोध

संसद मॉनसून सत्र गतिरोध संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में महज तीन दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन नीट (NEET) परीक्षा में अनियमितताओं और 20 जुलाई को नई दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बना गतिरोध टूटने का नाम नहीं ले रहा है।

सोमवार (10 अगस्त 2026) को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों से जुड़े हर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूरा जवाब दिलवाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हालांकि, दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी गठजोड़ (INDIA ब्लॉक) के नेताओं ने सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाते हुए गृह मंत्री के सीधे बयान और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय मुद्दों पर अलग से बहस कराने की अपनी मांग दोहराई है।

किरेन रिजिजू का बयान: “सरकार बहस से कभी पीछे नहीं हटी, विपक्ष में दिख रहे मतभेद”

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की अहम बैठक के बाद संसद परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार नागरिकों के सामने सच रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमित शाह के जवाब का आश्वासन: रिजिजू ने लोकसभा और मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में न केवल इस मुद्दे पर बयान देंगे, बल्कि विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए हर सवाल और आशंका का विस्तृत उत्तर भी देंगे।

विपक्ष पर तंज: किरेन रिजिजू ने विपक्षी खेमे पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस और राहुल गांधी गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं। जब गृह मंत्री जवाब देने खड़े हों, तो विपक्ष को हंगामा करके भागना नहीं चाहिए, बल्कि पूरे धैर्य से सुनना चाहिए।”

सपा और कांग्रेस के बीच मतभेद का दावा: संसदीय कार्य मंत्री ने यह दावा भी किया कि छात्र मुद्दे और राम मंदिर से जुड़े अन्य विषयों को प्राथमिकता देने को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच अंदरूनी मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें विपक्ष को पहले आपस में सुलझाना चाहिए।

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मल्लिकार्जुन खड़गे का तीखा हमला: “सदन में आने से डर रहे हैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री”

दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर संसद को नजरअंदाज करने का संगीन आरोप लगाया।

17 दिनों से गतिरोध का आरोप: खड़गे ने कहा कि पिछले 17 दिनों से विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर 20 जुलाई को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और नीट परीक्षा में हुई धांधली पर जवाब दें।

सरकार की नीयत पर सवाल: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन का सामना करने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार सदन चलाने के प्रति गंभीर नहीं है और यही वजह है कि कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है।

खड़गे ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कमरों में बैठकर निर्देश देने के बजाय सदन में आकर जनता के सवालों का सामना करें।

दो मुख्य मांगों पर अड़ा विपक्ष: छात्र मुद्दा और राम मंदिर चंदा विवाद

लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी दलों का विरोध मुख्य रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है:

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और नीट घोटाला: 20 जुलाई को दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता पर गृह मंत्री का आधिकारिक वक्तव्य।

राम मंदिर ट्रस्ट चंदा चोरी का आरोप: विपक्षी दलों (विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस) ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़ी वित्तीय विसंगतियों और चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर भी पृथक बहस की मांग रखी है।

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    हंगामे के बीच विधायी कामकाज जारी

    सत्र में बचे कम समय और निरंतर जारी हंगामे के बीच, सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कराने का प्रयास कर रही है। हालांकि, संसदीय परंपराओं और गरिमा को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सत्र के अंतिम तीन दिनों में गतिरोध समाप्त नहीं हुआ, तो कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और व्यापक जनहित के विषयों पर चर्चा अधूरी रह जाएगी।

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    संपादकीय दृष्टिकोण:

    लोकतंत्र में संसद ही देश के सबसे ज्वलंत मुद्दों पर संवाद और समाधान का सर्वोच्च मंच है। प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, युवाओं का भविष्य और कानून व्यवस्था ऐसे विषय हैं जिन पर पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीतिक गतिरोध से ऊपर उठकर सार्थक बहस का मार्ग अपनाना चाहिए।

    सरकार द्वारा विस्तृत जवाब देने की प्रतिबद्धता और विपक्ष द्वारा जवाबदेही तय करने की जिद के बीच आवश्यकता इस बात की है कि दोनों पक्ष संसदीय मर्यादा का पालन करते हुए सदन को सुचारू रूप से चलने दें। दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संसद मॉनसून सत्र गतिरोध पर आई बड़ी खबर सर्वदलीय बैठक और बातचीत की कोशिशों के बाद भी संसद मॉनसून सत्र गतिरोध बरकरार

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