दीप्ति गौर मुखर्जी बनीं नई हायर एजुकेशन सेक्रेटरी:
राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक विवाद, छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शनों और शीर्ष प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की पूर्व सचिव और 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को नया हायर एजुकेशन सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है।
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा मंजूर यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता बहाल करने, परीक्षा सुधारों को लागू करने और उच्च शिक्षा में संरचनात्मक बदलावों को आगे बढ़ाने के भारी दबाव का सामना कर रही है।
प्रशासनिक फेरबदल का घटनाक्रम: एक नज़र में
| पद / जिम्मेदारी | निवर्तमान अधिकारी | नए अधिकारी / वर्तमान स्थिति | प्रशासनिक कारण / पृष्ठभूमि |
| केंद्रीय शिक्षा मंत्री | धर्मेन्द्र प्रधान | प्रह्लाद जोशी | नीट-यूजी विवाद के बाद राजनीतिक फेरबदल |
| उच्च शिक्षा सचिव (जुलाई) | विनीत जोशी | स्थानांतरित (पंचायती राज) | परीक्षा संचालन में गड़बड़ियों के बाद तबादला |
| उच्च शिक्षा सचिव (अस्थायी) | नरेश पाल गंगवार | नियुक्ति स्थगित (17 दिन में) | हॉर्टिकल्चर सब्सिडी विवाद व राजनीतिक जांच |
| उच्च शिक्षा सचिव (वर्तमान) | — | दीप्ति गौर मुखर्जी | प्रशासनिक अनुभव और परीक्षा सुधारों का जिम्मा |
17 दिनों में नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति स्थगित: सब्सिडी विवाद की छाया
दीप्ति गौर मुखर्जी से ठीक पहले 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को 23 जुलाई को विनीत जोशी के स्थान पर इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, महज 17 दिनों के भीतर देर रात जारी एक आदेश के जरिए उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई।
1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी का मामला: गंगवार की अचानक विदाई को उनके परिवार पर लगे राजनीतिक आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की योजना के तहत उनकी मां, पत्नी और बेटे के नाम पर राजस्थान में कमर्शियल खीरे की खेती के प्रोजेक्ट्स के लिए पांच वर्षों में 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिलने का खुलासा हुआ था।
राजनीतिक जांच और स्पष्टीकरण: विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगाते हुए उच्च शिक्षा सचिव के पद पर उनकी तैनाती का विरोध किया था। हालांकि, गंगवार ने किसी भी नियम के उल्लंघन से इनकार करते हुए कहा कि उनके रिश्तेदार उन पर आश्रित नहीं थे और सभी जरूरी जानकारियां पहले ही सरकार को दी जा चुकी थीं।
अस्पष्ट स्थिति: केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर गंगवार को हटाए जाने का कारण स्पष्ट नहीं किया है और न ही उनकी अगली पोस्टिंग की घोषणा की है।
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कौन हैं दीप्ति गौर मुखर्जी? तीन दशकों का प्रशासनिक अनुभव
57 वर्षीय दीप्ति गौर मुखर्जी के पास राज्य और केंद्र सरकार के कई संवेदनशील विभागों को संभालने का व्यापक अनुभव है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: 3 फरवरी 1969 को उत्तर प्रदेश में जन्मीं मुखर्जी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इकोनॉमिक्स में एम.ए. और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक मैनेजमेंट एंड गवर्नेंस में एम.एससी. की डिग्री हासिल की है।
प्रमुख प्रशासनिक पद:
कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA): अगस्त 2024 से सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत रहते हुए उन्होंने डिजिटल कॉम्पिटिशन फ्रेमवर्क और इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) संशोधनों पर काम किया।
स्वास्थ्य क्षेत्र: नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) की सीईओ के रूप में भारत की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत (PM-JAY)’ को लागू कराया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं।
राज्य में अनुभव: मध्य प्रदेश में कार्मिक, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा मिशन और खेल एवं युवा कल्याण विभाग में प्रधान सचिव व आयुक्त पदों पर कार्यरत रहीं। इसके अलावा वे सेबी (SEBI) बोर्ड की सदस्य भी रह चुकी हैं।
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परीक्षा प्रणालियों में सुधार: सरकार के बड़े कदम
उच्च शिक्षा विभाग का प्रभार संभालते ही मुखर्जी को परीक्षा सुधारों की उस श्रृंखला को आगे बढ़ाना होगा जो नीट पेपर लीक के बाद शुरू की गई हैं:
टास्क फोर्स का गठन: इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स बनाई गई है, जो परीक्षा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सिफारिशें दे रही है।
कड़े कानून और त्वरित अदालतें: सरकार ने पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024‘ में संशोधन किए हैं। साथ ही परीक्षा घोटालों के त्वरित निपटारे के लिए फ़ास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की घोषणा की गई है।
सीबीआई जांच व एनटीए पर कार्रवाई: नीट-यूजी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसने विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को सेवा से हटा दिया गया है।
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नवनियुक्त सचिव के सामने प्रमुख चुनौतियां
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने से उच्च शिक्षा संकट का समाधान नहीं होगा। दीप्ति गौर मुखर्जी के सामने कई दीर्घकालिक नीतिगत चुनौतियां मौजूद हैं:
स्किल गैप और बेरोजगारी: नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच बड़ा अंतर है। छात्रों में तकनीकी, संज्ञानात्मक (Cognitive) और सामाजिक-भावनात्मक (Socio-Emotional) कौशलों का अभाव बेरोजगारी का मुख्य कारण बन रहा है।
कोचिंग कल्चर और महंगे प्राइवेट संस्थान: सरकारी विश्वविद्यालयों में सीमित सीटों के कारण छात्र महंगे निजी संस्थानों पर निर्भर हो रहे हैं। वहीं NEET और JEE जैसी प्रवेश परीक्षाओं के इर्द-गिर्द खड़े हजारों करोड़ रुपये के कोचिंग उद्योग ने मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा को कमजोर किया है।
संघीय ढांचा और प्रादेशिक विषमताएं: शिक्षा विशेषज्ञों ने जोर दिया है कि भारत जैसे विविध देश में सभी राज्यों पर एक समान मानक लागू करने के बजाय क्षेत्रीय भाषाओं, संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
एनईपी 2020 और लंबित विधेयक: नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत बहु-विषयक शिक्षा (Multi-disciplinary Education), संस्थागत स्वायत्तता और शोध संस्कृति को बढ़ावा देना प्राथमिक एजेंडा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा नियामक ढांचे को पूरी तरह बदलने वाला ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025’ को पारित कराना और लागू करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
एनईपी 2020 और लंबित विधेयक: नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत बहु-विषयक शिक्षा (Multi-disciplinary Education), संस्थागत स्वायत्तता और शोध संस्कृति को बढ़ावा देना प्राथमिक एजेंडा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा नियामक ढांचे को पूरी तरह बदलने वाला ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025’ को पारित कराना और लागू करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
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