“नेशनल स्पेस डे 2026” भारत बने ग्लोबल स्पेस टैलेंट का केंद्र’,
नेशनल स्पेस डे 2026 भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के स्पेस स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों (Innovators) से एक ऐसा विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार करने का आग्रह किया है, जो दुनिया भर की अंतरिक्ष प्रतिभाओं (Global Space Talent) को भारत की ओर आकर्षित करे।
वहीं दूसरी ओर, अहमदाबाद में आयोजित ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ (National Space Day) के भव्य समारोह में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने भारत के अंतरिक्ष अभियानों के उज्ज्वल और चुनौतीपूर्ण भविष्य पर विस्तार से चर्चा की।
‘भारत बने अंतरिक्ष में करियर की पहली पसंद’: पीएम मोदी का विजन
स्पेस सेक्टर के अग्रणी स्टार्टअप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच बढ़ते तालमेल की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के प्रमुख बिंदु:
किफायती और प्रतिस्पर्धी मॉडल: भारत न केवल लागत (Cost-Efficiency) के मामले में दुनिया में सबसे प्रतिस्पर्धी है, बल्कि देश के युवाओं में जोखिम उठाने (Risk-Taking Ability) का अद्भुत जज्बा भी है।
ग्लोबल हब बनाने का आह्वान: पीएम मोदी ने CEOs को निरंतर प्रयासरत रहने की सलाह देते हुए कहा कि भारत में ऐसा माहौल विकसित होना चाहिए, जहां दुनिया का कोई भी युवा अंतरिक्ष विज्ञान में अपना करियर बनाने के लिए भारत को अपनी पहली पसंद चुने।
स्टार्टअप्स का सरकारी नीतियों पर भरोसा: उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी हाथों और युवाओं के लिए खोलने के बाद जिस तरह स्टार्टअप्स ने सरकार पर भरोसा जताया है, उससे भारत जल्द ही वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का प्रमुख नेतृत्वकर्ता बनेगा।
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नेशनल स्पेस डे: चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग की यादें हुईं ताजा
अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) में ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ का आयोजन बेहद उत्साह के साथ किया गया। यह विशेष दिन 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर इसरो (ISRO) के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन के सफलता पूर्वक उतरने की वर्षगांठ की याद में मनाया जाता है।
चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर की नियंत्रित सॉफ्ट लैंडिंग और प्रज्ञान रोवर द्वारा चंद्रमा की सतह से जुटाए गए वैज्ञानिक आंकड़ों ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला और सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनाया था।
एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला बोले— ‘भविष्य उज्ज्वल पर चुनौतियां भी कम नहीं’
नेशनल स्पेस डे समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए भारतीय अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के आगामी रोडमैप पर अपने विचार व्यक्त किए।
शुभांशु शुक्ला के संबोधन की मुख्य बातें:
लगातार मेहनत और संसाधनों की आवश्यकता
शुभांशु शुक्ला ने कहा:
“23 अगस्त 2023 का दिन हम सभी देशवासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन था। आज भारत के स्पेस सेक्टर का भविष्य बहुत उज्ज्वल है, लेकिन यह मार्ग चुनौतियों से भी भरा है। यह सफलता अपने आप हासिल नहीं होगी, इसके लिए आने वाले वर्षों में निरंतर कड़ी मेहनत, समय और संसाधनों की जरूरत होगी।”
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नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे स्पेस इवेंट्स
उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने रॉकेट मेकिंग प्रतियोगिताओं और रोवर चुनौतियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की संयुक्त साझेदारियां यह साबित कर रही हैं कि भारत का निजी क्षेत्र अब केवल सहायक नहीं, बल्कि मुख्य चालक की भूमिका में है।
निजी क्षेत्र और इसरो की साझेदारी से बदलेगी भारत की तस्वीर
भारत के अंतरिक्ष सुधारों (Space Reforms) के बाद ‘इन-स्पेस’ (IN-SPACe) और ‘इसरो’ (ISRO) के सहयोग से देश में सैकड़ों स्पेस स्टार्टअप्स तेजी से उभर रहे हैं।
उपग्रह प्रक्षेपण और रॉकेट डिजाइनिंग: भारतीय प्राइवेट कंपनियां अब खुद के छोटे उपग्रह (Small Satellites) और प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles) विकसित कर रही हैं।
लागत में भारी कमी: भारत की किफायती तकनीक और स्वदेशी प्रतिभाओं के दम पर अंतर्राष्ट्रीय उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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एक नए अंतरिक्ष युग में कदम रखता भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और गगनयान (Gaganyaan) मिशन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में लगे शुभांशु शुक्ला जैसे जांबाज एस्ट्रोनॉट्स के समर्पण से यह साफ है कि भारत केवल अपनी अंतरिक्ष सीमाओं का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स के लिए एक नया वैश्विक मंच तैयार कर रहा है। भारत के अंतरिक्ष अभियानों, इसरो (ISRO) की उपलब्धियों और युवाओं की भागीदारी के बीच मनाया गया नेशनल स्पेस डे 2026
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