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“दिल्ली पुलिस आरक्षण प्रदर्शन” का वीडियो निकला ‘फेक’,

दिल्ली पुलिस आरक्षण प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली के संवेदनशील इलाके जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर ‘जाति-आधारित आरक्षण’ के खिलाफ प्रदर्शन होने के दावों को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर 23 अगस्त को जंतर-मंतर पर भारी भीड़ के जुटने और विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे थे।

इन वीडियो को “झूठा, भ्रामक और फर्जी” करार देते हुए दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वहां किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं दी गई थी।

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को कड़ा निर्देश दिया है कि वे बिना पुष्टि वाले किसी भी कंटेंट या फर्जी पोस्ट को शेयर न करें। फर्जी जानकारी बनाने या फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘जंतर-मंतर पर कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा’: नई दिल्ली DCP की स्पष्टीकरण

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर स्थिति साफ करते हुए नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) ने स्पष्ट किया कि 23 अगस्त को आरक्षण सुधारों के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर एकत्रित होने के लिए किसी भी संगठन या व्यक्ति को इजाजत नहीं दी गई थी।

पुलिस अधिकारियों द्वारा जारी मुख्य निर्देश:

निषेधाज्ञा लागू: पूरे नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 (जो पहले CrPC की धारा 144 थी) पहले से ही लागू है।

पांच से अधिक लोगों पर रोक: इस कानून के तहत किसी भी प्रकार का विरोध मार्च, जुलूस, सार्वजनिक सभा या पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

सख्त हिदायत: पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक बुलावों के झांसे में न आएं और ऐसी फर्जी सामग्री को फॉरवर्ड करने से बचें।

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‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ (RHA) की क्या थीं मांगें?

दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ (RHA) के बैनर तले कई प्रदर्शनकारियों ने जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव (Systemic Changes) की मांग को लेकर दिल्ली का रुख किया था।

प्रदर्शनकारी संगठन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित थीं:

आर्थिक आधार पर कोटा: शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का आधार सामाजिक या जातिगत पहचान के बजाय परिवार की ‘वार्षिक आय’ तय की जानी चाहिए।

एक परिवार, एक आरक्षण: संगठन ने “एक परिवार, एक आरक्षण” की नीति लागू करने की वकालत की, ताकि आरक्षण का लाभ कुछ ही परिवारों तक सीमित न रहे।

UGC के निर्देशों को वापस लेना: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के वर्ष 2026 के जाति-समानता निर्देशों को तुरंत रद्द करने की मांग की गई थी।

    सुरक्षा व्यवस्था सख्त; पुलिस और केंद्रीय बल तैनात

    जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास किसी भी अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Central Forces) की भारी तैनाती की गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने दोहराया कि दिल्ली की सुरक्षा और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले तत्वों से कड़ाई से निपटा जाएगा। फर्जी वीडियो फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स की निगरानी के लिए साइबर सेल (Cyber Cell) को एक्टिव कर दिया गया है।

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    फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति

    हाल के दिनों में देखा गया है कि संवेदनशील सामाजिक मुद्दों जैसे कि आरक्षण, छात्र आंदोलन या राजनीतिक विवादों से जुड़े पुराने वीडियो या मॉर्फ्ड (संशोधित) क्लिप्स को सोशल मीडिया पर वायरल करके लोगों को भड़काने की कोशिश की जाती है।

    दिल्ली पुलिस ने इस पर सख्त लहजे में कहा:

    “नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अपरिपक्व या असत्यापित (Unverified) जानकारी को बिना जांचे-परखे आगे न बढ़ाएं। समाज में शांति और सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से फर्जी खबरें बनाने और उनका प्रसार करने वाले डिजिटल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

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    आम जनता के लिए सलाह

    प्रशासन ने आम लोगों, विशेषकर छात्रों और युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले आधिकारिक पुलिस चैनलों के माध्यम से उस स्थान पर लागू नियमों और अनुमतियों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। किसी भी फर्जी संदेश या वीडियो के बहकावे में आकर अपनी सुरक्षा और भविष्य को जोखिम में न डालें। प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक वार्ता के बीच जानें दिल्ली पुलिस आरक्षण प्रदर्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी

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