“वीडी सतीसन कांथापुरम बयान” ने धर्मगुरु के बयान को नकारा:
वीडी सतीसन कांथापुरम बयान केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने सुन्नी इस्लामिक विद्वान और ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। कांथापुरम ने एक कार्यक्रम में कहा था कि महिलाओं को घर के भीतर ही रहना चाहिए और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी से “भारी तबाही” होगी।
राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने धर्मगुरु के इन विचारों को मध्यकालीन और 21वीं सदी के आधुनिक समाज से अप्रासंगिक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उनकी सरकार और न ही उनकी पार्टी महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करने जैसी सोच का कभी समर्थन करेगी।
“इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहे हैं धर्मगुरु”
मुख्यमंत्री सतीसन ने तर्क दिया कि धर्मगुरु द्वारा महिलाओं पर पाबंदी लगाने का दावा खुद इस्लाम धर्म की मूल आत्मा और इतिहास के विपरीत है।
ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ: सतीसन ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद की पहली पत्नी खदीजा स्वयं एक बड़ी व्यवसायी (बिजनेसवुमन) थीं, जबकि उनकी दूसरी पत्नी आयशा ने ऐतिहासिक युद्ध में सेना का नेतृत्व किया था। इसके अलावा रानी बिलकीस और खलीफा उमर के न्यायप्रिय दरबार में महिलाओं की सशक्त उपस्थिति और आवाज का सम्मान इसका बड़ा उदाहरण है।
प्रगतिशील सोच की आवश्यकता: मुख्यमंत्री ने कहा, “जो बात 19वीं सदी में कही जाती थी, उसे 21वीं सदी में थोपा नहीं जा सकता। महिलाएं घर के अंदर दबी-कुचली जिंदगी जीने के लिए नहीं बनी हैं। हमारी सोच प्रगतिशील है और महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन के हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए।”
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क्या था कांथापुरम का विवादित बयान और सर्कुलर?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रूढ़िवादी इस्लामिक संगठन ‘समस्त केरल जम-इय्यतुल उलमा’ ने मदरसों और स्थानीय कमेटियों के लिए एक सर्कुलर जारी किया। इसमें निर्देश दिया गया था कि महिलाएं सार्वजनिक मंचों, जुलूसों और गैर-रिश्तेदार पुरुषों के बीच धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा न लें।
सोने के हार से की तुलना: कोच्चि में आयोजित एक सम्मेलन में अपने फैसले का बचाव करते हुए कांथापुरम ने कहा कि जैसे कीमती सोने के हार को अलमारी और डिब्बे में सुरक्षित रखा जाता है, वैसे ही कुरान महिलाओं को घर में रहने का आदेश देता है। उन्होंने महिलाओं की तुलना सड़क किनारे रखी पत्थर की चक्की से न करने की बात कही।
पर्दा प्रथा और गरिमा का तर्क: उन्होंने दावा किया कि धार्मिक विद्वान पिछले 100 सालों से यही सिखाते आ रहे हैं और महिलाओं को घर की सीमाओं में रखना उनकी सुरक्षा और गरिमा के लिए जरूरी है।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बीजेपी का हमला
इस मामले ने केरल के राजनीतिक गलियारों में भी तूल पकड़ लिया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रुख: बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और सीपीआई(एम) दोनों पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केरल की महिलाओं को मध्ययुगीन बंदिशों में नहीं धकेला जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता पितृसत्ता खत्म करने की बात करते हैं, वे ऐसे धार्मिक बयानों पर चुप क्यों हैं।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML): कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की सहयोगी पार्टी IUML ने इस विवाद पर मिला-जुला रुख अपनाया। पार्टी के नेताओं ने कहा कि धार्मिक विद्वानों के अपने विचार होते हैं और वे सामाजिक सुरक्षा के नजरिए से ऐसी बातें कहते हैं, जबकि राजनीतिक पार्टी का अपना अलग रुख होता है।
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केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन का यह कड़ा रुख यह साफ करता है कि आधुनिक और प्रगतिशील समाज में लैंगिक समानता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। महिलाओं को केवल घर की चार दीवारों तक सीमित रखने की सलाह को खारिज करते हुए सरकार ने यह संदेश दिया है कि 21वीं सदी के केरल में महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और स्वतंत्रता सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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