“विशाखा राउत अयोग्यता” फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले मे हाईकोर्ट से झटका,
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की वरिष्ठ नेता और मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के पार्षद पद से हटाये जाने और 6 साल की अयोग्यता के खिलाफ दाखिल उनकी याचिका को हाईकोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने माना कि एक बार जब जाति प्रमाण पत्र अमान्य घोषित हो जाता है, तो कानूनन अयोग्यता का आदेश लागू होना तय है।
क्या है जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा पूरा विवाद?
यह मामला विशाखा राउत के OBC कुनबी समुदाय के जाति प्रमाण पत्र की सत्यता और वैधता से जुड़ा है:
2005 का सर्टिफिकेट: विशाखा राउत ने वर्ष 2005 में जारी एक OBC जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जिसके आधार पर उन्होंने जनवरी 2026 में हुए BMC चुनाव में वार्ड 191 (दादर-शिवाजी पार्क) से चुनाव जीता था।
पालघर स्क्रूटनी कमेटी का फैसला: 21 अगस्त 2026 को पालघर जिला जाति जांच समिति ने जांच में पाया कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास संबंधित अधिकार क्षेत्र नहीं था। इस आधार पर समिति ने उनके OBC सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया।
सरकारी प्रस्ताव (GR): जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने 1 सितंबर को एक सरकारी प्रस्ताव जारी कर विशाखा राउत की सदस्यता रद्द कर दी और उन्हें 20 अगस्त 2026 से अगले 6 वर्षों के लिए पार्षद चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया।
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हाईकोर्ट ने खारिज की राउत की मुख्य दलीलें
विशाखा राउत ने बॉम्बे हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि जाति जांच समिति के फैसले के खिलाफ उनकी अपील संभागीय आयुक्त (डिविशनल कमिश्नर) के समक्ष लंबित है। इसलिए 90 दिनों की अनिवार्य अवधि के दौरान अयोग्यता लागू नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया था कि BMC कमिश्नर या राज्य सरकार के पास सीधे अयोग्यता आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट की पीठ ने इन तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया:
कानूनी परिणाम अनिवार्य: जाति प्रमाण पत्र अमान्य होते ही जनप्रतिनिधि की अयोग्यता का वैधानिक परिणाम अपने आप प्रभावी हो जाता है।
प्रक्रियात्मक अवैधता नहीं: अदालत को नगर विकास विभाग या निकाय प्रमुख द्वारा जारी आदेश में कोई अवैधता नहीं दिखी।
लंबित अपील पर रुख: हाईकोर्ट ने उन्हें कोई अंतरिम राहत न देते हुए कहा कि वे कोंकण मंडल के डिविशनल कमिश्नर के पास जाकर अपनी अपील पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध कर सकती हैं।
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हाई-प्रोफाइल सीट से जीती थीं चुनाव
विशाखा राउत ने जनवरी 2026 के BMC चुनावों में दादर वेस्ट और शिवाजी पार्क को कवर करने वाले हाई-प्रोफाइल वार्ड 191 से जीत दर्ज की थी। यह सीट OBC महिलाओं के लिए आरक्षित थी। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना की उम्मीदवार और पूर्व विधायक सदा सरवणकर की बेटी प्रिया सरवणकर गुरव को 167 वोटों से हराया था।
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विशाखा राउत विपक्ष (MVA) की पांचवीं ऐसी पार्षद हैं जिन्हें फर्जी या अमान्य जाति प्रमाण पत्र के चलते अयोग्य ठहराया गया है। इससे पहले शिवसेना (UBT) के दीपक सावंत, AIMIM के समीर रमजान पटेल व रोशन शेख और NCP की बुशरा नदीम मलिक को भी इसी आधार पर अपनी पार्षदी गंवानी पड़ी थी।
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