“सत्य निकेतन हादसा”5 मंजिला इमारत गिरने से 7 की मौत:
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में सोमवार, 7 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां लड़कों के हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही एक पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयानक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार मलबे में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
घटना के बाद आसपास के पेइंग गेस्ट (PG) मकानों में रहने वाले दर्जनों छात्रों के बीच सुरक्षा को लेकर दहशत का माहौल बन गया है। वे अपने कमरों को छोड़कर पास के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में शरण लेने के लिए मजबूर हैं।
क्लासरूम बने अस्थायी आशियाना: छात्रों के सामने भविष्य की अनिश्चितता
सत्य निकेतन हादसा होते ही श्री वेंकटेश्वर कॉलेज प्रशासन तुरंत मदद के लिए आगे आया। कॉलेज ने बेघर और डरे हुए छात्रों को ठहराने के लिए क्लासरूम और खाली स्थानों को अस्थायी आश्रय स्थल में बदल दिया है, जहाँ उनके लिए भोजन और पीने के पानी का प्रबंध किया गया है।
हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह केवल एक त्वरित राहत है, स्थायी समाधान नहीं।
स्ट्रक्चरल सेफ्टी का अभाव: छात्र आमतौर पर निजी PG चालकों पर निर्भर होते हैं और उनके पास इमारतों की मजबूती, फायर सेफ्टी या कानूनी वैधता जांचने का कोई तकनीकी तरीका नहीं होता।
भय का माहौल: हादसे के बाद छात्र अपने पुराने PG में लौटने से डर रहे हैं।
कम समय में नए आवास की चुनौती: परीक्षाओं और कक्षाओं के बीच सुरक्षा और बजट के अनुकूल नया स्थान तलाशना छात्रों के लिए एक गंभीर संकट बन गया है।
छात्रों ने मांग की है कि दिल्ली के छात्र-बहुल इलाकों में स्थित सभी PG और किराए की इमारतों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए और असुरक्षित पाई जाने वाली संपत्तियों से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।
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राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला: ‘जवाबदेही से बच रही है केंद्र सरकार’
इस हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र और दिल्ली की सरकार को कटघरे में खड़ा किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसों से पहले सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए जाते और घटना के बाद केवल औपचारिकता निभाई जाती है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा:
जवाबदेही की कमी: उन्होंने #TINA (There Is No Alternative) हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए कहा कि सरकार में जवाबदेही पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
अतीत की घटनाओं का जिक्र: उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कुछ महीनों में सैदुलाजाब में इमारत ढहने से 6 लोगों की जान गई थी और हौज़ रानी में आग लगने से 22 लोगों की मौत हुई थी।
सवालों को दबाने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि जब नागरिक या विपक्षी दल सरकार से जवाबदेही मांगते हैं, तो उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ या ‘नाराज फूफा’ जैसे अपमानजनक लेबल देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है।
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PG सुरक्षा और नियमों के पालन पर खड़े हुए बड़े सवाल
सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में बिना सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी (NOC) के चलाए जा रहे कमर्शियल PG संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी अन्य हादसे का इंतजार किए बिना असुरक्षित इमारतों पर सख्त कार्रवाई करेगा, और क्लासरूम में रातें बिता रहे छात्रों को एक सुरक्षित और स्थायी छत कब तक मिल पाएगी?
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