“मायावती बीएसपी Gen Z” भतीजों आकाश और ईशान की BSP में नो एंट्री,
मायावती बीएसपी Gen Z बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी संगठन और अपनी राजनीतिक विरासत को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए उन्होंने परिवारवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट किया कि उनके दोनों भतीजों—आकाश आनंद और ईशान आनंद—को पार्टी संगठन में कभी भी कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में Gen Z (युवा पीढ़ी) को 50 प्रतिशत तक टिकट देने का बड़ा ऐलान किया है।
भतीजों के लिए दरवाजे बंद, भतीजी दीपिका के लिए विकल्प खुला
मायावती ने अपने बयान को पार्टी का “अंतिम निर्णय और वादा” बताते हुए स्पष्ट किया कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों (आकाश और ईशान) तथा भविष्य में उनके वंशजों को भी बीएसपी में किसी छोटे या बड़े राजनीतिक पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
हालांकि, उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार की मदद के लिए एक विकल्प खुला रखा है:
दीपिका आनंद का विकल्प: यदि आनंद कुमार को पार्टी कार्यों के संचालन के लिए किसी विश्वसनीय सदस्य की आवश्यकता होती है, तो वे अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद से सहायता ले सकते हैं।
योग्यता आधारित अवसर: 20 वर्षीया दीपिका वर्तमान में लंदन में लॉ की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने कहा कि उनकी ईमानदारी, प्रतिबद्धता और क्षमता के आधार पर भविष्य में उन्हें जिम्मेदारी दी जा सकती है।
गैर-पारिवारिक कार्यकर्ता: यदि दीपिका यह जिम्मेदारी लेने से इनकार करती हैं, तो आनंद कुमार पार्टी की सहमति से दलित समुदाय के किसी समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
इसे भी पढ़े : “बालाघाट आदिवासी बच्चे मौत” पर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके का दौरा,
परिवारवाद पर करारा प्रहार और कांशीराम का संदर्भ
बसपा प्रमुख ने पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि वह हमेशा से खानदानी राजनीति के सख्त खिलाफ रही हैं।
सुरक्षा और पारिवारिक स्थिति: मायावती ने खुलासा किया कि एक महिला होने के नाते और अपनी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा था। लेकिन अब जब आनंद कुमार के बच्चे बड़े हो चुके हैं, तो वह पार्टी को किसी भी पारिवारिक मोह या विवाद से प्रभावित नहीं होने देंगी।
व्यक्तिगत योग्यता बनाम परिवारवाद: उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी में किसी भी व्यक्ति को उसकी योग्यता के आधार पर अवसर मिल सकता है, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा।
इसे भी पढ़े : “एयर इंडिया पायलट मौत” दिल्ली के लग्जरी होटल में मृत मिले
2027 के चुनावों में Gen Z और Gen Alpha पर फोकस
आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मायावती ने पार्टी संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक नई रणनीति पेश की है:
50% टिकटों का आरक्षण: 2027 के चुनाव में समाज के सभी वर्गों के मेहनती, शिक्षित और योग्य युवाओं (Gen Z) को 50 प्रतिशत तक प्रत्याशी बनाया जाएगा।
विकास की नींव: मायावती ने कहा कि उनकी पिछली सरकारों में बनाए गए स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, हॉस्टल और ट्रेनिंग सेंटर Gen Z और Gen Alpha की प्राथमिक जरूरतों को ध्यान में रखकर ही तैयार किए गए थे।
इसे भी पढ़े : “हरीश रावत कांग्रेस इस्तीफा” PA पर ED की छापेमारी के बाद बड़ा फैसला,
2012 के नतीजों और विरोधियों के प्रोपेगैंडा पर साधा निशाना
अपने संबोधन में मायावती ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के कथित जातिवादी रवैये के कारण बीएसपी पांचवीं बार सरकार बनाने से चूक गई थी। उन्होंने कहा कि बीएसपी के बाद से राज्य में कानून का राज कमजोर हुआ है।
साथ ही उन्होंने कैडर को चेतावनी दी कि पार्टी से निष्कासित नेताओं की वापसी को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही खबरें महज “फेक न्यूज” और प्रायोजित दुष्प्रचार हैं।
अनुशासनहीनता के कारण बाहर किए गए किसी भी नेता को वापस पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में सोशल मीडिया अभियानों और आधुनिक मुद्दों के ज़रिए मायावती बीएसपी Gen Z के नए मतदाताओं तक अपनी पहुँच बढ़ाने और पार्टी की नीतियों से उन्हें जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
इसे भी पढ़े : “BRICS समिट BJP कांग्रेस” ‘तुमने भारत को डुबोया, हमने इसे फिर से बनाया’



Post Comment