“हरीश रावत कांग्रेस इस्तीफा” PA पर ED की छापेमारी के बाद बड़ा फैसला,
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। यह कदम उनके बेहद करीबी और पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी और भारी मात्रा में बिना हिसाब-किताब की नकदी तथा कीमती सामान बरामद होने के बाद आया है।
न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि चूंकि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए राजनीतिक दायित्वों से हटना उनका अपना व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि इस मामले की वजह से कांग्रेस पार्टी का जारी राजनीतिक संघर्ष किसी भी तरह से कमजोर पड़े।
ED की छापेमारी और 32 लाख रुपये कैश बरामद
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत देहरादून में कई परिसरों पर तलाशी ली थी:
UKSSSC घोटाला तार: यह कार्रवाई वर्ष 2016 के उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई कथित बड़ी धांधली से जुड़ी हुई है।
बरामदगी का ब्योरा: ED की टीम ने चंदन सिंह जीना के आवास से 32 लाख रुपये का अघोषित कैश, सोना, कीमती आभूषण और लग्जरी घड़ियां बरामद कीं।
कौन हैं चंदन सिंह जीना: जीना वर्तमान में हरीश रावत के PA हैं और 2014 से 2017 के दौरान जब रावत मुख्यमंत्री थे, तब उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के रूप में तैनात थे।
अन्य ठिकानों पर कार्रवाई: ED ने UKSSSC के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व सचिव, परीक्षा नियंत्रक, ओएमआर (OMR) शीट प्रोसेसिंग करने वाली निजी आईटी फर्म के मालिक और बिचौलियों के ठिकानों पर भी छापे मारे।
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हरीश रावत की सफाई: “इष्ट देव को याद कर लिया फैसला”
इस्तीफे का कारण बताते हुए हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने अपने इष्ट देवता को स्मरण करने के बाद यह कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया ताकि मामले की सच्चाई सही समय पर सामने आ सके।
जिम्मेदारी स्वीकारना: रावत ने माना कि जीना उनके शासनकाल में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं और वे उन्हें एक मेहनती व्यक्ति मानते थे।
आरोपों पर रुख: उन्होंने कहा कि यदि जांच में सबूत यह साबित करते हैं कि ओएमआर शीट से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की गई है, तो यह उनके लिए बेहद शर्मिंदगी की बात होगी।
राजनीतिक साजिश का आरोप: पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड में होने वाले आगामी चुनावों से पहले माहौल खराब करने और एक नकारात्मक नैरेटिव बनाने के लिए यह राजनीतिक कदम उठाया गया है।
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जनता से माफ़ी और खुली जांच की चुनौती
भर्ती घोटालों से युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाले असर को स्वीकार करते हुए हरीश रावत ने कहा:
सार्वजनिक क्षमा: उन्होंने कहा कि यदि उनके 3 साल के कार्यकाल के दौरान हुई 42,000 से अधिक नियुक्तियों में अनजाने में कोई गलती हुई है, तो वे राज्य की जनता से माफ़ी मांगते हैं।
खुली चुनौती: रावत ने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी कि यदि किसी के पास भर्ती प्रक्रिया में उनके सीधे हस्तक्षेप का कोई भी सबूत है, तो वह उसे राज्य पुलिस, CBI या ED को सौंप सकता है।
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हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक या प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों को किसी भी प्रकार के प्रलोभन से दूर रहना चाहिए और यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो कानूनी कार्रवाई भुगतने को तैयार हैं।
चुनाव रणनीतियों और स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के असंतोष के संदर्भ में हरीश रावत कांग्रेस इस्तीफा का यह मुद्दा मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गहन चर्चा का विषय बना हुआ है।
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