“महाराष्ट्र जमीन विवाद मामला” मोदी के बचपन के दोस्त वोहरा ने CBI की मांग
महाराष्ट्र जमीन विवाद मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात स्थित वडनगर के बीएन स्कूल (BN School) के 81 वर्षीय सहपाठी असगर अली वोहरा ने महाराष्ट्र में एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद को लेकर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
वोहरा ने आरोप लगाया है कि बिल्डरों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उनकी करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
असगर अली वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें इस भूमि विवाद से जुड़े सभी दस्तावेज तथा एक मांग पत्र सौंपा।
क्या है 35 साल पुराना भूखंड विवाद?
पीड़ित असगर अली वोहरा के अनुसार, उन्होंने वर्ष 1989 में महाराष्ट्र के भायंदर ईस्ट स्थित नवघर रोड पर लगभग 2,810 वर्ग मीटर जमीन एक पंजीकृत समझौते (Registered Agreement) के तहत कानूनी रूप से खरीदी थी।
अवैध विभाजन का आरोप: वोहरा का दावा है कि उन्होंने इस संपत्ति को कभी किसी को नहीं बेचा। हालांकि, वर्ष 2011 में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनकी जानकारी के बिना इस जमीन को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया।
बिल्डरों का गठजोड़: उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन का एक हिस्सा ‘स्वयं बिल्डर्स’ के नियंत्रण में दिखाया गया, जबकि दूसरा हिस्सा ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ को हस्तांतरित कर दिया गया, जिसके तार भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़े बताए जाते हैं।
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प्रशासनिक लापरवाही और 11 साल बाद CID रिपोर्ट पर सवाल
वोहरा ने आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) के नगर नियोजन विभाग ने उनके वैध मालिकाना हक के दावों को नजरअंदाज करते हुए विवादित जमीन पर निर्माण कार्य की अनुमति दे दी। उन्होंने नगर निगम, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर जालसाजी में शामिल लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
कानूनी प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए वोहरा ने कहा:
FIR और CID जांच में देरी: इस मामले में वर्ष 2015 में पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। इसके बावजूद सीआईडी (CID) ने करीब 11 साल बाद, यानी 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जो कि सीधे तौर पर राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करती है।
बिना नोटिस काउंटर केस: वोहरा ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2025 में उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना दिए या अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना उनके खिलाफ एक जवाबी मामला (Counter-case) दर्ज कर दिया गया।
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पीएम से मुलाकात के बाद हरकत में आया प्रशासन
सालों तक स्थानीय पुलिस, राजस्व अधिकारियों और नगर निगम के चक्कर काटने के बाद आखिरकार वोहरा ने अपने बचपन के मित्र और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बिल्डरों, भू-माफिया और इसमें शामिल प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया।
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प्रधानमंत्री से वोहरा की मुलाकात और पत्र सौंपे जाने के बाद स्थानीय नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए 16 सितंबर 2026 को औपचारिक सुनवाई तय की है, जिसमें संबंधित निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हाल ही में सामने आए महाराष्ट्र जमीन विवाद मामला ने स्थानीय प्रशासन और भू-स्वामियों के बीच कानूनी दस्तावेजीकरण की महत्ता को एक बार फिर रेखांकित किया है।
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