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 “सेवा संकल्प अभियान 2026” ‘वाराणसी-वडनगर सेवा यात्रा’ का आयोजन

सेवा संकल्प अभियान 2026

सेवा संकल्प अभियान 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को आने वाले जन्मदिन के अवसर पर देश भर में व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। एक ओर जहां त्रिपुरा सरकार पूरे राज्य में महीने भर चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत कर रही है, वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ‘वाराणसी-वडनगर सेवा यात्रा’ के जरिए देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा से जोड़ने का बड़ा अभियान चलाने जा रहा है।

दोनों ही आयोजनों का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा—जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके लगभग 13 वर्ष और 2014 से अब तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल शामिल है—को रेखांकित करना है।

त्रिपुरा में ‘सेवा संकल्प अभियान – जन सेवा ही प्रभु सेवा’

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने राज्य सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि राज्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक महीने भर चलने वाला महाअभियान आयोजित किया जाएगा। इस अभियान की थीम “सेवा संकल्प अभियान – जन सेवा ही प्रभु सेवा” रखी गई है।

नोडल विभाग: सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य (ICA) विभाग को इस अभियान के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ICA सचिव अभिषेक सिंह भी उपस्थित थे।

राज्य स्तरीय समितियां: अभियान के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न मंत्रियों और सचिवों की अध्यक्षता में कमेटियां गठित की गई हैं।

विशिष्ट कार्यक्रम: पूरे त्रिपुरा में आंगन मिलन सेवा, सेवा की कहानी, कलश यात्रा, सेवा मेरा योगदान, सेवा के रंग-राष्ट्र के संग, सुशासन संवाद और नमो सेवा अनकही कहानियां जैसे जन-भागीदारी वाले कार्यक्रम आयोजित होंगे।

कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा: जन धन योजना, पीएम गति शक्ति, उज्ज्वला योजना, ऑपरेशन सिंदूर और अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने जैसी ऐतिहासिक पहलों के बारे में जन-जागरूकता फैलाई जाएगी।

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1,000 युवाओं की ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वडोदरा से लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से प्रेरणा लेकर 17 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक ‘वाराणसी-वडनगर सेवा यात्रा’ निकाली जाएगी।

यात्रा का स्वरूप और भौगोलिक विस्तार:

द्विदिशीय यात्रा: यह यात्रा एक साथ दो दिशाओं में चलेगी—वडनगर (गुजरात) से वाराणसी (उत्तर प्रदेश) तथा वाराणसी से वडनगर।

व्यापक सहभागिता: तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार और पूर्वोत्तर समेत पूरे भारत से 1,000 से अधिक युवा ‘सेवा यात्री’ इसमें हिस्सा लेंगे।

मार्ग और कवरेज: यात्रा 10 राज्यों, 193 जिलों, 773 तहसीलों और 1,159 गांवों से गुजरेगी। 20 अलग-अलग मार्गों का नाम भारत की पवित्र नदियों के नाम पर रखा गया है।

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सांस्कृतिक एकता और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश

इस सेवा यात्रा का एक मुख्य आकर्षण देश की पवित्र नदियों के जल द्वारा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जोड़ बनाना है:

जलाभिषेक परंपरा: वडनगर से वाराणसी जाने वाले सेवा यात्री गुजरात की पवित्र नदियों का जल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। वहीं वाराणसी से वडनगर जाने वाले यात्री उत्तर प्रदेश की नदियों का जल लाकर वडनगर के ऐतिहासिक हाटकेश्वर मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।

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सेवा गतिविधियां: यात्रा के दौरान स्वागत मालाओं के बजाय स्वच्छता और सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत ‘सेवा वाटिका’ (वृक्षारोपण), स्वच्छता ड्राइव, ‘नशा मुक्त भारत’, ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान, साधु-संतों एवं सफाई कर्मचारियों का सम्मान तथा जल संरक्षण जागरूकता जैसे सामाजिक कार्य किए जाएंगे।

    सांसद हेमांग जोशी के अनुसार, वडनगर प्रधानमंत्री के बचपन और शुरुआती संघर्षों का प्रतीक है, जबकि वाराणसी उनकी वर्तमान कार्यस्थली है। इन दोनों स्थानों का मिलन भारत के युवाओं में राष्ट्र-निर्माण और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूती प्रदान करेगा।

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