“रितु तावड़े केस जुर्माना” 2016 के मारपीट मामले में सुनवाई से गायब
रितु तावड़े केस जुर्माना मुंबई की मेयर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता रितु तावड़े को 2016 के एक बहुचर्चित मारपीट मामले में सेशन कोर्ट के समक्ष पेशी से छूट तो मिल गई, लेकिन अदालत ने बार-बार गैरहाजिर रहने पर उन पर जुर्माना लगा दिया।
मुंबई की सेशन कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहने और नई छूट अर्जी दाखिल करने पर तावड़े और दो अन्य सह-आरोपियों पर 300-300 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी जी भंसाली ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि 7 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले यह जुर्माना राशि सरकारी खजाने में जमा की जाए।
अदालत ने दी सख्त हिदायत: ‘बार-बार अंतिम मौका देने के बाद भी गैरहाजिरी’
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश भंसाली ने कहा कि अदालत द्वारा पहले भी तीन अलग-अलग अवसरों पर “अंतिम मौके” के रूप में रितु तावड़े को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जा चुकी थी। इसके बावजूद आरोपी की ओर से फिर से नई याचिका दाखिल कर दी गई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बार-बार अंतिम अवसर दिए जाने के बावजूद आरोपी लगातार अदालत में अनुपस्थित रह रहे हैं। हालांकि, सुनवाई में रुकावट न आए, इसलिए कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए अंतिम बार पेशी से छूट मंजूर की।
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क्या है 2016 का यह विवादित मामला?
यह पूरा मामला 29 जुलाई 2016 का है, जब तत्कालीन भाजपा पार्षद रितु तावड़े और छह अन्य लोग वकोला स्थित एक म्युनिसिपल उर्दू-मीडियम स्कूल में दाखिल हुए थे:
तबादले को लेकर विवाद: घटना की वजह कैंसर पीड़ित एक स्कूल शिक्षक के ट्रांसफर को लेकर शुरू हुआ विवाद बताया जाता है।
मारपीट का आरोप: अभियोजन पक्ष (Prosecution) का आरोप है कि बहस के दौरान स्कूल प्रबंधन के साथ तीखी झड़प हुई और आरोपियों ने कथित तौर पर दो नगर निगम शिक्षकों के साथ मारपीट की।
पुलिस कार्रवाई: घटना के बाद 11 अगस्त 2016 को वकोला पुलिस स्टेशन में प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।
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डिस्चार्ज अर्जी खारिज, अब चलेगा ट्रायल
इससे पहले, मुंबई सेशन कोर्ट ने इस मामले में रितु तावड़े की डिस्चार्ज (मामले से बरी करने) याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि पीड़ित शिक्षकों और चश्मदीद गवाहों के बयानों में आरोपियों के खिलाफ केस चलाने और आरोप तय करने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
दूसरी ओर, रितु तावड़े ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि घटना वाले दिन मौके पर उनकी उपस्थिति महज एक इत्तेफाक थी और उनका कथित भीड़ या मारपीट की घटना से कोई लेना-देना नहीं था।
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अदालत द्वारा अब आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं और मामले का नियमित ट्रायल (सुनवाई) शुरू होने जा रहा है। हाल ही में कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन से जुड़े मामले में आया फैसला रितु तावड़े केस जुर्माना प्रशासनिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
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