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ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क!

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग: मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग कंसाइनमेंट: 2014 से अब तक की पूरी कहानी

भारत में ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग का गहरा संबंध सामने आया है। सितंबर 2021 में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से 2,988 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 21,000 करोड़ रुपये आंकी गई।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सुप्रीम कोर्ट में खुलासा किया कि इस ड्रग तस्करी से प्राप्त धन का इस्तेमाल पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) द्वारा किया जा रहा था। यह मामला ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश को उजागर करता है।

गौतम अडानी के मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की बड़ी खेप: क्या है पूरा मामला ?

सितंबर 2021 में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने मुंद्रा पोर्ट पर एक कंटेनर से 2,988 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। यह ड्रग्स अफगानिस्तान से ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट होते हुए भारत लाई गई थी। इस खेप को “आशी ट्रेडिंग कंपनी” के नाम से आयात किया गया था, जिसमें ड्रग्स को टैल्क स्टोन और कोयले के बीच छिपाया गया था।

NIA की जांच में ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग का पता चला, इस तस्करी के पीछे पाकिस्तान की ISI और लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क था। ड्रग तस्करी से होने वाली आय का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फंड करने के लिए किया जा रहा था।

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग का नार्को-टेरर नेटवर्क

NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट” (TRF) के सदस्य इस मामले में शामिल थे। एक संरक्षित गवाह ने बताया कि TRF के कार्यकर्ता लतीफ राथर ने ड्रग तस्करी से मिले पैसे से हथियार खरीदे थे।

इसके अलावा, अफगानिस्तान और पाकिस्तान स्थित ड्रग लॉर्ड्स ने भारतीय आरोपियों के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। NIA ने कहा कि यह पैसा कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को फंड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

इसे भी पढ़ें : लश्कर-TRF आतंकी नेटवर्क : भारत पर सालों से जारी हमला

2014 से अब तक मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की तस्करी

मुंद्रा पोर्ट पर यह पहली बार नहीं है जब इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी गई हैं। 2014 के बाद से गुजरात के बंदरगाहों से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ड्रग्स जब्त की जा चुकी हैं। कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:

  • 2021: मुंद्रा पोर्ट से 2,988 किलोग्राम हेरोइन (21,000 करोड़ रुपये)
  • 2022: पिपावाव पोर्ट से 395 किलोग्राम हेरोइन
  • 2023: गुजरात तट से कई बार ड्रग्स की बरामदगी

इन मामलों से ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग के बारे में पता चलता है कि भारत में ड्रग तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों को फंडिंग उपलब्ध करा रहा है।

सरकार और एजेंसियों की कार्रवाई

इस मामले में NIA, DRI और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी कार्रवाई की है। अब तक 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें भारतीय, अफगान और अन्य अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉर्ड्स शामिल हैं।

सरकार ने ड्रग तस्करी रोकने के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए हैं, जैसे:

  • मैरिटाइम सुरक्षा SOP को मजबूत करना
  • कस्टम्स और कोस्ट गार्ड की निगरानी बढ़ाना
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ना

हालांकि, अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं, क्योंकि ड्रग तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग: क्या है भविष्य की रणनीति ?

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:

  1. तकनीकी निगरानी बढ़ाना: AI और सैटेलाइट ट्रैकिंग से ड्रग कंटेनरों की पहचान करना।
  2. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के साथ मिलकर कार्रवाई करना।
  3. कानूनों को सख्त बनाना: NDPS एक्ट के तहत आतंकवाद से जुड़े ड्रग मामलों में सख्त सजा।
  4. जन जागरूकता: युवाओं को ड्रग्स के खतरों के बारे में शिक्षित करना।

ड्रग तस्करी से आतंकी फंडिंग भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। मुंद्रा पोर्ट पर हेरोइन की बरामदगी ने इस नार्को-टेरर नेटवर्क को उजागर किया है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

इसे भी पढ़ें : जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले: 2014-2025 का विस्तृत विश्लेषण

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