कोविड का ‘निम्बस’ वैरिएंट: रेजर ब्लेड गले की खराश और नया खतरा!
कोविड का ‘निम्बस’ वैरिएंट, जिसे वैज्ञानिक रूप से NB.1.8.1 के नाम से जाना जाता है, इन दिनों वैश्विक स्तर पर तेजी से फैल रहा है। यह SARS-CoV-2 वायरस परिवार का हिस्सा है। स्वास्थ्य अधिकारी इसे मौसमी फ्लू जैसा मान रहे हैं। हालांकि, इसने अपने एक खास और बेहद दर्दनाक लक्षण से सबका ध्यान खींचा है। कई मरीज इसे “रेजर ब्लेड निगलने” जैसा बताते हैं। यह गले की गंभीर खराश है। अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टें इसे नए स्ट्रेन का उभरता हुआ लक्षण बता रही हैं। एसोसिएटेड प्रेस ने भी इस “रेजर ब्लेड गले” का उल्लेख किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे कम जोखिम वाला माना है। उनके अनुसार, यह गंभीर बीमारी या मृत्यु दर में वृद्धि नहीं करता है।
- यह लक्षण पूरे अमेरिका में लोगों को प्रभावित कर रहा है।
- कैलिफ़ोर्निया, वर्जीनिया, न्यूयॉर्क, और वाशिंगटन जैसे राज्यों में यह फैल चुका है।
कोविड ‘निम्बस’ वैरिएंट पर मुख्य बिंदु
- मरीज इसे गले में रेज़र ब्लेड जैसा दर्दनाक अनुभव बता रहे हैं।
- WHO ने इसे कम जोखिम वाला वैरिएंट घोषित किया है।
- यह तेजी से अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और हांगकांग में फैल रहा है।
- भारत में NB.1.8.1 को चार प्रमुख वैरिएंट में गिना गया है।
- वैज्ञानिकों ने इसे इंसानी कोशिकाओं से मज़बूत बंधन वाला पाया है।
- भारत में फिलहाल कोविड के केस कम लेकिन सतर्कता ज़रूरी है।
- मास्क, साफ़-सफाई और भीड़ से दूरी अब भी सबसे अच्छा बचाव है।
निम्बस वैरिएंट क्या है और इसका प्रसार
NB.1.8.1 वैरिएंट, ‘निम्बस’ नाम से जाना जाता है। यह SARS-CoV-2 वायरस परिवार का एक नया सदस्य है। इसने हाल के हफ्तों में अपने तेज भौगोलिक प्रसार से सुर्खियां बटोरी हैं। मई के मध्य तक, WHO ने बताया कि निम्बस वैश्विक कोविड-19 नमूनों का लगभग 11% था। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी इसकी पुष्टि की है। एशिया से आने वाले यात्रियों में हवाई अड्डे पर इसकी पहचान हुई है।
- भारत में INSACOG ने चार प्रमुख वैरिएंट की पहचान की है।
- इनमें LF.7, XFG, JN.1.16 और NB.1.8.1 शामिल हैं।
यह वैरिएंट चीन और हांगकांग में तेजी से फैला है। ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी इसके मामले सामने आए हैं।
निम्बस के अन्य लक्षण और प्रभाव
रेजर ब्लेड गले के दर्द के अलावा, कोविड का ‘निम्बस’ वैरिएंट के अन्य लक्षण भी हैं। ये लक्षण पहले के स्ट्रेन जैसे ही होते हैं। इनमें बुखार और ठंड लगना, खांसी, सिरदर्द शामिल हैं। सांस लेने में तकलीफ भी एक सामान्य लक्षण है। स्वाद या गंध का न आना भी कुछ मामलों में देखा गया है। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सक्रिय कोविड-19 केसलोड में कमी आई है। 20 जून तक यह 5,608 मामलों पर था। यह गिरावट नए वैरिएंट की मौजूदगी के बावजूद है।
- WHO ने निम्बस को “निगरानी में मौजूद वैरिएंट” के रूप में वर्गीकृत किया है।
- इसका मतलब यह फैलता है, पर अभी कोई बड़ा खतरा नहीं है।
WHO का कहना है कि मौजूदा टीके गंभीर परिणामों को रोकने में प्रभावी हैं। US FDA द्वारा स्वीकृत टीके इस वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं।
निम्बस इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड का ‘निम्बस’ वैरिएंट मानव कोशिकाओं के साथ मजबूत बंधन बनाता है। इस कारण यह अधिक कुशलता से फैल सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वैरिएंट ACE2 रिसेप्टर से कसकर बंधता है। SARS-CoV-2 शरीर में प्रवेश करने के लिए इसका उपयोग करता है। ग्रिफ़िथ यूनिवर्सिटी की वायरोलॉजिस्ट लारा हेरेरो ने बताया। उन्होंने कहा कि लैब-आधारित मॉडल ने यह दिखाया है।
- NB.1.8.1 में मानव ACE2 रिसेप्टर के लिए सबसे मजबूत बंधन संबंध था।
- यह पहले के उपभेदों की तुलना में कोशिकाओं को अधिक कुशलता से संक्रमित करता है।
डॉ. चुन टैंग ने कहा कि इसके स्पाइक प्रोटीन में कुछ बदलाव हैं। ये इसे अधिक संक्रामक बना सकते हैं। साथ ही प्रतिरक्षा को चकमा देने में भी मदद कर सकते हैं।
भारत में कोविड की वर्तमान स्थिति और बचाव
भारत में कोविड-19 अब स्थानिक हो गया है। इसका मतलब है कि वायरस मौजूद है, लेकिन बड़े प्रकोप नहीं होते। बल्कि छोटे, अलग-अलग प्रकरण होते हैं। उच्च जनसंख्या प्रतिरक्षा और वायरस का लगातार हल्का होना इसका कारण है। वर्तमान प्रसार मुख्य रूप से ओमिक्रॉन के उप-वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के कारण है। ये अब तक कम विषैले रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के डॉ. रमन गंगाखेडकर ने कहा।
- “कोविड-19 भारत में स्थानिक हो गया है।”
- “नए वेरिएंट हल्के या हल्के रहे हैं।”
परीक्षण के स्तर में गिरावट आई है। हालांकि, गंभीर नैदानिक लक्षणों की कोई चिंता नहीं है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा। कोविड-19 अब चक्रीय बीमारी की तरह व्यवहार कर रहा है। प्रतिरक्षा स्तर घटने पर मामलों में वृद्धि होती है। लेकिन पिछले टीकाकरण और संपर्क के कारण गंभीर बीमारी रुकती है।
- सावधानियां वही रहती हैं: भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- खांसते या छींकते समय अपना मुंह ढकें।
- अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं और साफ करें।
- अस्वस्थ होने पर बाहर जाने से बचें। हवादार जगहें सुरक्षित रहती हैं।
- अधिकारियों ने लगातार सावधानी बरतने की सलाह दी है।



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