भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: क्या डील करीब है?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ समझौता करने के करीब है। यह बयान वाशिंगटन द्वारा कई देशों पर नए टैरिफ लगाने की तैयारी के बीच आया है। यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
- ट्रंप ने चीन और यूके के साथ समझौतों का भी जिक्र किया।
- यह दर्शाता है कि व्यापार वार्ता में अमेरिका की रणनीति क्या है।
टैरिफ और वार्ता: समय-सीमा का महत्व
अमेरिकी प्रशासन ने 14 देशों को टैरिफ लगाने की धमकी वाले पत्र भेजे हैं। हालांकि, भारत इस सूची में शामिल नहीं है। पारस्परिक टैरिफ, जो अप्रैल में 90 दिनों के लिए टाल दिए गए थे, अब 9 जुलाई से 1 अगस्त तक बढ़ा दिए गए हैं। यह व्यापार विवादों को हल करने के लिए अधिक समय देता है।
- भारतीय निर्यातकों ने इस विस्तार का स्वागत किया है।
- यह रचनात्मक बातचीत की अमेरिकी इच्छा को दर्शाता है।
प्रमुख मुद्दे और प्राथमिकताएँ
राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय वार्ता दल ने अमेरिका का दौरा किया था। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। अमेरिका भारत से अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं का अधिक निर्यात चाहता है। वहीं, भारत श्रम-गहन निर्यात के लिए अधिक पहुंच पर जोर दे रहा है।
- कृषि और डेयरी बाजार पहुंच अमेरिका के लिए प्राथमिकता है।
- भारत के लिए यह राजनीतिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील है।
- कपड़ा, चमड़ा, और जूते जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों पर भारत रियायतें चाहता है।
- ये उद्योग देश में लाखों रोजगार का समर्थन करते हैं।
समझौते की रूपरेखा और भविष्य की उम्मीदें
एशिया ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार मार्क लिंस्कॉट का मानना है कि दोनों पक्षों ने सैद्धांतिक रूप से एक समझौता कर लिया है। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हो सकता है, पर महत्वपूर्ण है। लिंस्कॉट ने कहा कि यह टैरिफ और बाजार पहुंच के मामले में अहम होगा। इसमें गैर-टैरिफ बाधाएं भी शामिल होंगी। डिजिटल व्यापार जैसे जटिल क्षेत्रों के टुकड़े भी इसमें होंगे।
- ट्रंप और मोदी ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
- लक्ष्य लगभग 500 बिलियन डॉलर तक व्यापार बढ़ाना है।
ऑटो कंपोनेंट उद्योग की अपेक्षाएँ
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के महानिदेशक विन्नी मेहता ने उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही अमेरिका के साथ समझौता करेगा। उत्तरी अमेरिका भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वित्त वर्ष 25 में कुल निर्यात का 32 प्रतिशत हिस्सा यहीं से था।
- सरकार ऑटो कंपोनेंट उद्योग से नियमित परामर्श कर रही है।
- यह दर्शाता है कि सरकार हर हितधारक को सुन रही है।
अंतिम समय के प्रस्ताव और गतिरोध
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कई व्यापार सौदों की आसन्नता का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनके मेलबॉक्स में कई नए प्रस्ताव आए हैं। हालांकि, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कुछ मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। इसमें ऑटो, स्टील और कृषि क्षेत्र शामिल हैं।
- भारत का अंतिम प्रस्ताव 150-200 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान और व्यापार का है।
- भारत अब और रियायतें देने की स्थिति में नहीं है।
मिनी डील और पूर्ण एफटीए की संभावना
रिपोर्टों के अनुसार, एक छोटा व्यापार समझौता होने वाला था। सितंबर में डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान एक पूर्ण एफटीए पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि उनके पारस्परिक टैरिफ 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी होंगे। इस तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा।
- भारत ने अमेरिकी आयात पर जवाबी कार्रवाई नहीं की थी।
- इसके बजाय कूटनीतिक वार्ता का विकल्प चुना।
ट्रंप के बयान का महत्व
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में कहा कि वे विभिन्न देशों को पत्र भेज रहे हैं। इन पत्रों में बताया जा रहा है कि उन्हें कितना टैरिफ देना है। कुछ देश थोड़ा समायोजन कर सकते हैं।
- यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौता चर्चा का विषय है।
- इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में मजबूती की उम्मीद बढ़ गई है।



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