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रामायण के सह-निर्माता  “आनंद रामानंद सागर का निधन”मुंबई में अंतिम विदाई

आनंद रामानंद सागर

भारतीय टेलीविजन के स्वर्ण युग के रचयिता और कालजयी धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माता महान रामानंद सागर के परिवार से एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर रामानंद सागर के बेटे आनंद रामानंद सागर का निधन 84 साल की उम्र में मुंबई में हो गया है।

इस खबर ने फिल्म और टेलीविजन जगत को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। उनके जाने से सागर परिवार और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

लंबे समय से पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे थे आनंद सागर

पटकथा लेखन और निर्माण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले आनंद सागर पिछले एक दशक से अधिक समय से अस्वस्थ चल रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी से बहादुरी से लड़ रहे थे। उम्र के इस पड़ाव पर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनका शरीर कमजोर हो गया था।

अंततः 13 फरवरी को इस संघर्ष का अंत हुआ और उन्होंने शांतिपूर्वक दुनिया को अलविदा कह दिया। आनंद रामानंद सागर का निधन भारतीय मीडिया जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि उन्होंने अपने पिता की विरासत को न केवल संभाला बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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मुंबई के पवन हंस श्मशान भूमि में हुआ अंतिम संस्कार

परिवार ने एक आधिकारिक बयान साझा करते हुए इस दुखद सूचना की पुष्टि की और बताया कि शुक्रवार को ही शाम 4:30 बजे हिंदू श्मशान भूमि (पवन हंस), मुंबई में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

इस अंतिम विदाई के समय उनका करीबी परिवार और मित्र गण मौजूद रहे। सागर परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हमें यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमारे प्यारे पिता आनंद रामानंद सागर चोपड़ा गुज़र गए हैं। उनकी शांतिपूर्ण यात्रा के लिए आपकी प्रार्थनाओं और आशीर्वाद का दिल से स्वागत है।”

अंतिम विदाई में शामिल हुए करीबी और बॉलीवुड सितारे

आनंद रामानंद सागर चोपड़ा को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए परिवार, दोस्त और फिल्म जगत के कई लोग एक साथ आए। इस भावुक क्षण में ‘मैंने प्यार किया’ फेम अभिनेत्री भाग्यश्री को जुहू में अंतिम संस्कार के लिए जाते हुए देखा गया।

हालांकि, परिवार ने इस संस्कार को बहुत ही निजी और शांत रखा था, इसलिए इसमें कोई बहुत बड़ा नाम या भीड़भाड़ नहीं देखी गई। एक सादगी भरे माहौल में आनंद रामानंद सागर का निधन होने के बाद उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया।

रामायण की ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले सिपाही

आनंद रामानंद सागर चोपड़ा केवल रामानंद सागर के पुत्र ही नहीं थे, बल्कि वे 1987 की ओरिजिनल टीवी सीरीज़ ‘रामायण’ के निर्माण में मुख्य स्तंभ थे। वे मशहूर प्रोडक्शन कंपनी ‘सागर फिल्म्स’ को संभालने वाली दूसरी पीढ़ी का एक अनिवार्य हिस्सा थे।

उन्होंने न केवल 1987-1988 के दौरान अपने पिता द्वारा लिखित और निर्देशित रामायण में सह-निर्माता (Co-producer) की भूमिका निभाई, बल्कि 2008 में आई नई ‘रामायण’ के पौराणिक प्रोडक्शन में भी अहम योगदान दिया। यह उनके पिता के उस शानदार काम का अगला हिस्सा था, जिसने 1980 के दशक में भारतीय टेलीविजन के दर्शकों की संख्या में क्रांति ला दी थी।

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पौराणिक सीरीज़ और फिल्मों में रहा उल्लेखनीय योगदान

पाँच भाई-बहनों में आनंद सागर अकेले ऐसे थे जिन्होंने अपने पिता की विरासत को पूरी तन्मयता से आगे बढ़ाया। रामायण के बाद, उन्होंने ‘अलिफ़ लैला’, ‘जय जय बजरंगबली’ और ‘जय शिवशंकर’ जैसी सफल पौराणिक और फंतासी सीरीज़ प्रोड्यूस कीं।

फिल्म निर्माण की बात करें तो वे ‘आँखें’, ‘अरमान’ और ‘अलिफ़ लैला’ जैसी चर्चित फिल्मों के प्रोडक्शन में भी गहराई से शामिल थे। सागर आर्ट्स के बैनर तले बनी इन फिल्मों और धारावाहिकों ने भारतीय संस्कृति को घर-घर तक पहुँचाने में मदद की।

सागर परिवार की वंशावली और प्रोफेशनल सफर

महान रामानंद सागर की शादी लीलावती सागर से हुई थी और उनके पाँच बच्चे थे—चार बेटे: सुभाष सागर, मोती सागर, प्रेम सागर, आनंद सागर और एक बेटी सरिता सागर।

आनंद रामानंद सागर का निधन होने के बाद अब उनकी पत्नी निशा सागर और उनके बच्चे उनकी विरासत को संभालेंगे। उल्लेखनीय है कि सागर आर्ट्स ने हिंदी सिनेमा को ‘गीत’ (1970), ‘ललकार’ (1972), ‘चरस’ (1976), ‘प्रेम बंधन’ (1979), ‘अरमान’ (1981), ‘बगावत’ (1982), ‘1971’ (2007) और ‘मितवा’ (2015) जैसी कई बेहतरीन फिल्में दी हैं।

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लॉकडाउन में रामायण की सफलता के बने साक्षी

अपने अंतिम वर्षों में भी आनंद सागर अपने परिवार के साथ मिलकर पौराणिक प्रोजेक्ट्स के क्रिएटिव सुपरविज़न और मैनेजमेंट में योगदान देते रहे। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर लॉकडाउन के दौरान ‘रामायण’ का दोबारा प्रसारण सुनिश्चित किया, जिसे एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ व्यूअरशिप मिली।

परिवार ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वे प्यार, गरिमा और मूल्यों वाले इंसान थे, जिन्होंने अपनी दयालुता और नरम स्वभाव से कई लोगों की ज़िंदगी को छुआ। उन्हें वे सभी लोग हमेशा प्यार से याद करेंगे जिन्हें उन्हें करीब से जानने का मौका मिला।

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