जहरीले दूध से मौत: आंध्र के राजामहेंद्रवरम में 5 की जान गई
जहरीले दूध से मौत की यह भयावह खबर आंध्र प्रदेश के राजामहेंद्रवरम से सामने आई है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ घंटों के भीतर दूषित दूध पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी अस्पतालों में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पूरे इलाके में डेयरी उत्पादों की जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जिन लोगों ने स्थानीय वेंडर से दूध खरीदा था, उन्हें अचानक उल्टियां होने लगीं और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी वेंडर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पांच मासूम जिंदगियों का जाना व्यवस्था पर कई कड़वे सवाल खड़े कर रहा है।
किडनी फेलियर और यूरिनरी ब्लॉकेज: आखिर कैसे दूध बन गया मौत का कारण?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहरीले दूध से मौत के मामले में डॉक्टरों ने एक बहुत ही डरावना पैटर्न देखा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों में किडनी फेलियर और यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट (Urinary Blockage) के लक्षण पाए गए हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि दूध में किसी ऐसे घातक रसायन की मिलावट की गई है जो सीधे तौर पर मानव गुर्दे पर हमला करता है। जहरीले रसायनों के शरीर में जाते ही शरीर के अंग काम करना बंद कर रहे हैं, जिससे मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई साधारण फूड पॉइजनिंग नहीं है, बल्कि दूध की मात्रा बढ़ाने या उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किए गए किसी सिंथेटिक केमिकल का दुष्परिणाम है।
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एथिलीन ग्लाइकॉल का शक: क्या दूध में मिलाया गया था गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला कूलेंट?
एनडीटीवी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट में इस जहरीले दूध से मौत के पीछे ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ (Ethylene Glycol) नामक रसायन के होने की आशंका जताई गई है। यह एक ऐसा केमिकल है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर गाड़ियों के इंजन को ठंडा रखने के लिए ‘कूलेंट’ के तौर पर किया जाता है।
एथिलीन ग्लाइकॉल दिखने में रंगहीन और स्वाद में हल्का मीठा होता है, जिसके कारण दूध में इसके मिलने का पता आसानी से नहीं चल पाता। यह रसायन शरीर के भीतर जाते ही ऑक्सालिक एसिड में बदल जाता है, जो किडनी में कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल बना देता है। यही क्रिस्टल किडनी को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं। अगर यह संदेह सच साबित होता है, तो यह मिलावटखोरी के इतिहास का सबसे वीभत्स मामला होगा जहाँ मुनाफे के लिए इंजन ऑयल का इस्तेमाल खाने की चीजों में किया गया।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार: राजामहेंद्रवरम पुलिस की गिरफ्त में मौत बांटने वाला वेंडर
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उस वेंडर को दबोच लिया है जिसने वह दूषित दूध सप्लाई किया था। जहरीले दूध से मौत के इस मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वेंडर ने दूध कहाँ से खरीदा था और क्या इसमें मिलावट जानबूझकर की गई थी या यह किसी बड़ी लापरवाही का नतीजा है।
आरोपी के ठिकानों पर की गई छापेमारी में कुछ संदिग्ध रसायनों के नमूने मिले हैं जिन्हें लैब टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरी घटना की निगरानी कर रहा है और उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजे के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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आंध्र सरकार का सघन क्रैकडाउन: डेयरी यूनिट्स पर आधी रात को छापेमारी
इस घटना के बाद पूरे आंध्र प्रदेश में खलबली मची हुई है। मुख्यमंत्री के आदेश पर खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) और पुलिस की संयुक्त टीमों ने राज्य भर की प्रमुख डेयरी इकाइयों और स्थानीय दूध केंद्रों पर छापेमारी शुरू कर दी है। जहरीले दूध से मौत की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए दूध के सैंपलों की रैंडम चेकिंग की जा रही है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मिलावट करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जहाँ लोग दूध की गुणवत्ता में संदेह होने पर तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने खुद अस्पतालों का दौरा किया और सुनिश्चित किया कि पीड़ितों को डायलिसिस और अन्य जीवन रक्षक सुविधाएं बिना किसी देरी के मिलें।
जेन-जी और मिलेनियल्स में आक्रोश: ‘प्योरिटी’ के नाम पर कब तक बिकेगा जहर?
आज की जागरूक युवा पीढ़ी इस खबर को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कर रही है। इंस्टाग्राम और ट्विटर पर #MilkContamination और #AndhraMilkCrisis जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवाओं का गुस्सा इस बात पर है कि बुनियादी खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने में सिस्टम फेल क्यों हो जाता है।
मिलेनियल्स अब आर्गेनिक और ‘फार्म टू टेबल’ (Farm to Table) दूध की मांग कर रहे हैं, जहाँ दूध की सोर्सिंग पूरी तरह से पारदर्शी हो। लोग सोशल मीडिया पर वेंडर्स की रेटिंग और फीडबैक सिस्टम को और भी सख्त बनाने की बात कर रहे हैं। इस घटना ने युवाओं के बीच दूध ब्रांड्स के प्रति भरोसे को बुरी तरह डिगा दिया है और अब लोग घर पर ही शुद्धता जांचने वाली किट के बारे में सर्च कर रहे हैं।
मिलावट की पहचान कैसे करें: उपभोक्ता जागरूकता ही अब एकमात्र बचाव
जब तक सरकार सख्त कदम उठाती है, तब तक उपभोक्ताओं को खुद ही अपनी सुरक्षा करनी होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर दूध में कोई असामान्य महक आ रही हो या उबालने पर उसका रंग हल्का पीला या नीला पड़ रहा हो, तो उसे बिल्कुल न पिएं। जहरीले दूध से मौत जैसी घटनाओं से बचने के लिए हमेशा रजिस्टर्ड और भरोसेमंद ब्रांड्स का ही दूध खरीदें।
दूध की शुद्धता मापने के लिए लैक्टोमीटर का इस्तेमाल करें और अगर संभव हो तो समय-समय पर दूध के नमूने नजदीकी लैब में भेजें। इसके अलावा, दूध को हमेशा कांच के बर्तन में रखकर उसकी कंसिस्टेंसी की जांच करें। जागरूक ग्राहक ही मिलावटखोरों के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं।
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मुनाफे की भूख और मासूम जानों की बलि का अंत कब?
अंततः, आंध्र प्रदेश की यह त्रासदी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में एक सुरक्षित समाज में रह रहे हैं? जहरीले दूध से मौत केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ एक जघन्य कृत्य है। एक वरिष्ठ संपादक के रूप में मेरा मानना है कि जब तक मिलावटखोरी के लिए फांसी जैसी कड़ी सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक ये सफेद जहर बेचने वाले लोग मासूमों की जिंदगी से खेलते रहेंगे।
हमें सामूहिक रूप से आवाज उठानी होगी ताकि भविष्य में किसी और मां को अपने बच्चे को दूध पिलाने से पहले डरना न पड़े। उम्मीद है कि यह घटना एक निर्णायक मोड़ साबित होगी और खाद्य सुरक्षा के नियमों को लोहे की तरह सख्त बनाया जाएगा।
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