“AOZ और खाद्य सुरक्षा”FSSAI ने अंडों को बताया सुरक्षित, अफवाहें खारिज
AOZ और खाद्य सुरक्षा भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शनिवार, 20 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए देश में उपलब्ध अंडों की सुरक्षा पर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है। नियामक ने स्पष्ट रूप से कहा कि अंडों को कैंसर के खतरे से जोड़ने वाले हालिया दावे पूरी तरह गुमराह करने वाले और वैज्ञानिक रूप से निराधार हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रिपोर्टों ने उपभोक्ताओं के बीच अनावश्यक डर पैदा कर दिया था, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य नियामक ने जोर देकर कहा कि भारत में बिकने वाले अंडे इंसानों के खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। AOZ और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए प्राधिकरण ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में ऐसे दावे केवल सार्वजनिक घबराहट पैदा करने का माध्यम हैं।
इसे भी पढ़े :-पाकिस्तान में भूख आपातकाल: खाद्य संकट जूझता एक देश
Eggoz ब्रांड पर लगे आरोपों और वायरल वीडियो की कड़वी सच्चाई
विवाद की जड़ एक वायरल वीडियो और कुछ रिपोर्टें थीं जिनमें ‘Eggoz’ जैसे लोकप्रिय ब्रांड के अंडों में “संभावित कैंसर पैदा करने वाले” पदार्थ होने का आरोप लगाया गया था। वीडियो में दावा किया गया कि इन अंडों में नाइट्रोफ्यूरन्स नामक एंटीबायोटिक के टूटने से बनने वाले मेटाबोलाइट AOZ की मौजूदगी पाई गई है।
वीडियो के अनुसार, Eggoz के नमूनों में AOZ का लेवल 0.73mu g/kg पाया गया। हालांकि, तथ्यों की जांच करने पर पता चला कि यह स्तर FSSAI द्वारा निर्धारित 1mu g/kg की अधिकतम सीमा से भी कम है। कंपनी ने बाद में आधिकारिक बयान जारी कर उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनके अंडे सुरक्षित हैं और स्वास्थ्य मानकों का पूरी तरह पालन करते हैं।
भारत में पोल्ट्री उत्पादन के कड़े नियम और प्रतिबंध
FSSAI के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि भारत में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता है। खाद्य सुरक्षा और मानक (दूषित पदार्थ, विषाक्त पदार्थ और अवशेष) विनियम, 2011 के तहत देश में पोल्ट्री और अंडे के उत्पादन के हर स्तर पर नाइट्रोफ्यूरान एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सख्ती से प्रतिबंधित है।
AOZ और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्पादन श्रृंखला में कहीं भी, चाहे वह पशु चारा हो या अंतिम उत्पाद, नाइट्रोफ्यूरान की अनुमति न हो। नियामक संस्था नियमित निरीक्षण, कड़ाई से निगरानी और अत्याधुनिक प्रयोगशाला परीक्षणों के माध्यम से इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करती है।
EMRL सीमा का तकनीकी पहलू और स्वास्थ्य सुरक्षा
नियामक ने प्रवर्तन कार्यों में सहायता के लिए नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स हेतु 1.0\mu g/kg की एक बाहरी अधिकतम अवशेष सीमा (EMRL) तय की है। प्राधिकरण ने विस्तार से समझाया कि यह सीमा कोई स्वास्थ्य-आधारित सुरक्षा सीमा नहीं है, बल्कि एक तकनीकी संदर्भ मूल्य है।
यह उस न्यूनतम सांद्रता को दर्शाता है जिसे आज की आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकें लैब में मजबूती से पकड़ सकती हैं। FSSAI अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि EMRL से नीचे अगर बहुत मामूली अंश (Trace residues) पाए भी जाते हैं, तो उसे खाद्य सुरक्षा उल्लंघन या स्वास्थ्य चिंता का विषय नहीं माना जाना चाहिए।
इसे भी पढ़े :-“भारत चावल निर्यातक में विश्वसनीय पहचान की ओर अग्रसर,”
AOZ और खाद्य सुरक्षा
भारत का नियामक ढांचा पूरी तरह से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप तैयार किया गया है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका भी खाद्य उत्पादन करने वाले जानवरों में नाइट्रोफ्यूरान के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाते हैं और केवल प्रवर्तन उद्देश्यों के लिए ही संदर्भ मूल्यों का उपयोग करते हैं।
AOZ और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में अलग-अलग देशों के बीच संख्यात्मक सीमाओं में जो थोड़ा अंतर दिखता है, वह उपभोक्ता सुरक्षा मानकों में अंतर के कारण नहीं, बल्कि उनके विश्लेषणात्मक तरीकों और रेगुलेटरी अप्रोच में भिन्नता के कारण है। किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सामान्य अंडे के सेवन को कैंसर के जोखिम से कभी नहीं जोड़ा है।
इसे भी पढ़े :-खाद्य असुरक्षा 2024-25: बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान संकटग्रस्त
वैज्ञानिक साक्ष्य और कैंसर के दावों का पूर्ण खंडन
सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए FSSAI ने उन वैज्ञानिक सबूतों का हवाला दिया, जो बताते हैं कि नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के ट्रेस-लेवल आहार एक्सपोजर और मनुष्यों में कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के बीच कोई स्थापित कारण संबंध नहीं है।
नियामक ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय केवल सत्यापित वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें। यह स्पष्ट किया गया है कि अंडों को असुरक्षित बताने के लिए कुछ अलग-अलग प्रयोगशाला निष्कर्षों का सामान्यीकरण करना पूरी तरह गलत है, क्योंकि ये निष्कर्ष अक्सर अनजाने संदूषण या चारे से संबंधित विशिष्ट बैच कारकों के कारण हो सकते हैं।
AOZ और खाद्य सुरक्षा
FSSAI ने फिर से पुष्टि की है कि अंडे संतुलित आहार का एक सुरक्षित, पौष्टिक और मूल्यवान हिस्सा हैं। नियामक ने कहा कि जब अंडों का उत्पादन और सेवन स्थापित खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार किया जाता है, तो वे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विशिष्ट ब्रांडों से जुड़ी खबरें अक्सर अलग-अलग बैचों की पहचान होती हैं और उन्हें व्यापक स्वास्थ्य जोखिम के रूप में देखना गलत है। उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया गया है कि वे आधिकारिक सलाह का पालन करें और बिना किसी डर के अंडे का सेवन जारी रख सकते हैं, क्योंकि देश की निगरानी व्यवस्था अत्यंत मजबूत है।
इसे भी पढ़े :-भारत में गरीबी का प्रकोप बनाम नरेंद्र मोदी का क्रोनी पूंजीवाद
भ्रामक सूचनाओं के विरुद्ध FSSAI की सख्त चेतावनी
अंत में, खाद्य नियामक ने जनता से गुजारिश की है कि वे ऐसी भ्रामक सूचनाओं से बचें जो सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य धारणा को प्रभावित करती हैं। AOZ और खाद्य सुरक्षा के विषय पर FSSAI का स्पष्टीकरण यह संदेश देता है कि विज्ञान और नियमों पर आधारित जानकारी ही सर्वोपरि है।
प्राधिकरण ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि देश भर में उपलब्ध खाद्य पदार्थ कड़े मानकों से गुजरते हैं। अंडे प्रोटीन और पोषण का एक सस्ता और सुलभ स्रोत बने रहेंगे, और उन्हें कैंसर से जोड़ने वाले निराधार दावों को खारिज करना स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम है।



Post Comment