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अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध: लीक फाइलों से मचा राजनीतिक हड़कंप

अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध

अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी की गई फाइलों से अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध और दिल्ली की ‘लीडरशिप’ के बीच कथित सांठगांठ का एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी 23 मई, 2019 को सुबह 9:25 बजे कुख्यात सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन से मिले थे।

इस मुलाकात के तुरंत बाद एपस्टीन ने स्टीव बैनन को संदेश भेजा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के “खास आदमी” अनिल अंबानी से मिला है।

इन संदेशों ने भारतीय राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि इसमें दावा किया गया है कि दिल्ली में मौजूद “लीडरशिप” चाहती थी कि एपस्टीन मिस्टर अंबानी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और रणनीतिकार स्टीव बैनन से मिलवाए।+2

जून 2017 के अमेरिकी दौरे की जमीन तैयार करने की कोशिश

मार्च 2017 में एपस्टीन को भेजे गए संदेशों के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य जून 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के लिए जमीन तैयार करना था। फाइलों से संकेत मिलता है कि अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध केवल व्यापारिक नहीं बल्कि कूटनीतिक मध्यस्थता तक फैले थे।

संदेशों के मुताबिक, मिस्टर अंबानी ने 16 मार्च, 2017 को एपस्टीन से मदद मांगी थी ताकि वह “जेरेड” और “स्टीव” से जल्द से जल्द मिल सकें। हालांकि, एपस्टीन ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप प्रशासन के ये दोनों महत्वपूर्ण व्यक्ति बेहद व्यस्त थे और शायद उस समय कोई सार्थक बातचीत संभव न हो पाती।

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वाशिंगटन की ‘बेरुखी’ और मोदी के “आदमी” की शिकायत

दस्तावेजों में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है जिसमें एपस्टीन ने स्टीव बैनन को बताया कि जिस व्यक्ति (अंबानी) से वह मिले, उसने शिकायत की थी कि “वाशिंगटन में कोई भी उनसे बात नहीं करता।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के संदर्भ में की गई थी।

हालांकि भाजपा ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि ये संदेश किसी भी तरह से भारत सरकार से नहीं जुड़े हैं। अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध पर आधारित ये मैसेज U.S. DoJ द्वारा जारी किए गए 30 लाख पन्नों के भारी-भरकम एडिटेड दस्तावेजों का हिस्सा हैं, जो 2017 से 2019 के बीच दोनों के बीच नियमित संपर्क की पुष्टि करते हैं।+2

पेरिस डिनर और राफेल डील के बीच का कनेक्शन

फाइलों के एक अन्य सेट (11 मार्च) से पता चला कि मिस्टर अंबानी ने पेरिस में एपस्टीन और इजरायल के पूर्व पीएम एहुद बराक के साथ डिनर की योजना बनाई थी। हालांकि, यह मीटिंग इसलिए रद्द करनी पड़ी क्योंकि अंबानी को तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ डिनर करना था।

गौरतलब है कि अनिल अंबानी ने अप्रैल 2015 में पीएम मोदी के पेरिस दौरे के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट जीता था। उस समय वह मोदी के साथ गए बिजनेस डेलीगेशन का हिस्सा थे और अक्सर फ्रांसीसी अधिकारियों से मिलते रहते थे।

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अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति पर एपस्टीन से चर्चा

इन संदेशों में केवल मुलाकातों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि वाशिंगटन के रसूखदार लोगों और भारत में अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति पर भी चर्चा की गई है।

एपस्टीन ने जब मिस्टर अंबानी से अमेरिकी एम्बेसडर के नॉमिनी के बारे में पूछा, तो अंबानी ने जनरल (रिटायर्ड) डेविड पेट्रियस का नाम सुझाया। दूसरी ओर, एपस्टीन ने एश्ले टेलिस का नाम लिया, जो उस समय इस पद की दौड़ में थे।

ये खुलासे दिखाते हैं कि अनिल अंबानी-एपस्टीन संबंध के जरिए किस तरह नीतिगत मामलों और नियुक्तियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।

“प्रधानमंत्री खुद सामने आकर सफाई दें” – कांग्रेस की मांग

रविवार (1 फरवरी, 2026) को कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि “एपस्टीन फाइलों के नए बैच की रिपोर्ट एक बड़ी चेतावनी है कि पीएम मोदी तक किस तरह के शैतानों की पहुंच है।” कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री खुद इन परेशान करने वाले खुलासों पर स्पष्टता दें।

वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि क्या पीएम कभी एपस्टीन से मिले हैं या उन्होंने किसी प्रतिनिधि को भेजा था? कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री “विदेशी ताकतों को फायदा पहुंचाने” के लिए दागी लोगों के इशारों पर काम कर रहे थे।

विदेश मंत्रालय ने दावों को बताया “सजयाफ्ता अपराधी की बकवास”

विदेश मंत्रालय ने एपस्टीन फाइलों में किए गए इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को एक बयान में कहा कि ये आरोप “एक सजयाफ्ता अपराधी की बकवास बातें” हैं और इन्हें पूरी तरह से गलत मानकर नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने जुलाई 2017 में पीएम मोदी के इजराइल दौरे में एपस्टीन की मदद के दावों पर भी कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा फैलाई गई राजनीतिक बदनामी और गलत जानकारी करार दिया है।

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“राक्षसों” की पहुंच पर राजनीतिक घमासान जारी

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर कड़े सवाल दागे हैं। खेड़ा ने पूछा कि क्या मोदी 2019 के चुनावों के आसपास एपस्टीन जैसे “शर्मनाक” अमेरिकी के संपर्क में थे।

कांग्रेस का कहना है कि भारत के लोग यह जानने के हकदार हैं कि देश की विदेश नीति और शीर्ष नेतृत्व के बीच ऐसे विवादास्पद व्यक्तियों की क्या भूमिका थी।

फिलहाल, अनिल अंबानी के ऑफिस ने इन ईमेलों पर कोई जवाब नहीं दिया है और न ही द हिंदू स्वतंत्र रूप से इन संदेशों की सत्यता की पुष्टि कर सका है, लेकिन इन फाइलों ने भारतीय राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।

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