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ITAT नियुक्ति मामले में SC द्वारा RBI गवर्नर की आलोचना और जुर्माना

RBI गवर्नर की आलोचना

RBI गवर्नर की आलोचना इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के सदस्य चयन प्रक्रिया को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक आईआरएस (IRS) अधिकारी की उम्मीदवारी खारिज करने के निर्णय को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में तत्कालीन राजस्व सचिव और मौजूदा RBI गवर्नर की आलोचना होनी चाहिए क्योंकि उनका इस प्रक्रिया में शामिल होना ‘नेचुरल जस्टिस’ यानी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन था।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 5 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंका है।

विभाग की ‘बदले की भावना’ पर अदालत का बड़ा प्रहार

शीर्ष अदालत ने इस मामले को “विभागीय बदले की भावना से भरी एक घटिया कहानी” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज को एक दशक से भी अधिक समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर किया गया।

बेंच ने पाया कि केंद्र सरकार ने “गलत इरादे” से काम किया और जानबूझकर टालमटोल की नीति अपनाई। अदालत के अनुसार, बजाज को परेशान करने के लिए उन पर मनगढ़ंत आरोप लगाए गए और यहां तक कि उन्हें जबरन रिटायर भी कर दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही मार्च 2023 में रद्द कर दिया था।

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चयन समिति में ‘ऑफिसर’ की मौजूदगी पर उठे सवाल

फैसले में विशेष रूप से उस “अधिकारी” का जिक्र किया गया है जो अब एक बेहद संवेदनशील पद पर है। हालांकि कोर्ट ने सीधे नाम लेने से परहेज किया, लेकिन यह स्पष्ट है कि संदर्भ मौजूदा गवर्नर से ही था। कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2024 में सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी (SCSC) में उनकी उपस्थिति ने भेदभाव की एक सच्ची आशंका पैदा की।

इस मामले में RBI गवर्नर की आलोचना इसलिए भी हुई क्योंकि याचिकाकर्ता ने उनके खिलाफ पहले से ही अवमानना की कार्यवाही शुरू कर रखी थी। ऐसे में उन्हें खुद को इस चयन प्रक्रिया से अलग कर लेना चाहिए था।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन

अदालत ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। बेंच ने कहा कि जब किसी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति का उस मामले से व्यक्तिगत संबंध या पुराना विवाद हो, तो ‘बायस के खिलाफ नियम’ स्वतः लागू हो जाता है।

RBI गवर्नर की आलोचना करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि उनकी मौजूदगी ने निर्णय लेने की निष्पक्षता को पूरी तरह प्रभावित किया। अगस्त 2024 में भले ही उन्होंने माफी मांग ली थी, लेकिन अगले ही महीने चयन समिति में बैठकर उन्होंने निष्पक्षता के मानक को ताक पर रख दिया।

कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज का शानदार करियर और संघर्ष

कैप्टन बजाज का जीवन संघर्ष और सेवा की मिसाल रहा है। 1980 में सेना में शामिल हुए बजाज को एक ऑपरेशन के दौरान शारीरिक विकलांगता हुई, जिसके बाद वे 1990 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में आए।

2014 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उन्हें ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में पहले स्थान पर रखा था। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के संदिग्ध इनपुट और उनके निजी पारिवारिक विवादों का हवाला देकर उनकी नियुक्ति रोक दी थी।

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केंद्र सरकार की टालमटोल और कोर्ट का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट इस बात से भी नाराज दिखा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया। इसे कोर्ट ने “बहुत ज्यादा टालमटोल” माना और याचिकाकर्ता को हुए मानसिक व आर्थिक नुकसान के लिए केंद्र पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने साफ किया कि जब व्यक्तिगत वेंडेटा (बदला) और पक्षपात के आरोप बिना किसी विवाद के बने रहते हैं, तो अदालत हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होती है।

नई चयन प्रक्रिया के लिए सख्त निर्देश

जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने 1 सितंबर 2024 को हुई चयन समिति की बैठक के मिनट्स को खारिज कर दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) को निर्देश दिया गया है कि वह चार हफ्ते के भीतर एक नई चयन समिति बुलाए।

इस नई समिति की कार्यवाही में स्पष्ट रूप से RBI गवर्नर की आलोचना और कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें बाहर रखा जाएगा। नई समिति बजाज की उम्मीदवारी पर विचार करेगी और दो हफ्ते के भीतर परिणाम घोषित करेगी।

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कानून के राज और निष्पक्षता पर अंतिम टिप्पणी

अंत में, अदालत ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि “कानून का राज” एक स्वस्थ समाज की नींव है। अगर सार्वजनिक शक्ति का इस्तेमाल भेदभाव या गलत इरादे से किया जाता है, तो यह सामाजिक व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार है।

चयन करने वाली अथॉरिटी को न केवल सही होना चाहिए, बल्कि उसकी प्रक्रिया में जनता का भरोसा भी बना रहना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत पूर्वाग्रह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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