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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोच्चि टस्कर्स केस में मध्यस्थता आदेश बरकरार रखा

मध्यस्थता आदेश बरकरार रखा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने BCCI की याचिका को खारिज करते हुए मध्यस्थता आदेश बरकरार रखा है और BCCI को अब बंद हो चुकी कोच्चि टस्कर्स फ्रेंचाइजी को ₹538 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट फैसला

न्यायमूर्ति आरआई चागला ने कहा कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत BCCI के तर्क असंगत हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता आदेश में कोई “स्पष्ट अवैधता” नहीं है और इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

“मध्यस्थ के निष्कर्षों में न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं। याचिकाएं योग्यता विहीन हैं और खारिज की जाती हैं।”
न्यायमूर्ति आरआई चागला

BCCI की अगली रणनीति?

BCCI के वरिष्ठ वकील रफीक दादा ने फैसले को “प्रतिकूल” बताया और बताया कि बीसीसीआई अब इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर सकती है।

  • BCCI को अब चार सप्ताह के भीतर कोच्चि टस्कर्स KCPL और RSW) को धनराशि का भुगतान करना होगा।
  • अदालत ने कहा कि निर्णय अपलोड होने के चार सप्ताह बाद राशि निकाली जा सकती है।

कोच्चि टस्कर्स विवाद: पूरा घटनाक्रम

संक्षिप्त समयरेखा:

  • मार्च 2010: कोच्चि फ्रेंचाइज़ी (RSW) ने BCCI के साथ समझौता किया।
  • जनवरी 2011: BCCI से फ्रैंचाइज़ी शुल्क में कमी की मांग की गई, जिसे खारिज किया गया।
  • सितंबर 2011: बैंक गारंटी न मिलने पर फ्रैंचाइज़ी अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
  • 2015: मध्यस्थता ने BCCI को ₹153 करोड़ व 18% ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया।
  • 2018: BCCI को अंतरिम राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगाई।
  • 2025: कोर्ट ने मध्यस्थता आदेश को वैध ठहराते हुए BCCI की याचिका खारिज की।

क्या था विवाद?

कोच्चि टस्कर्स, आईपीएल 2011 में शामिल एक फ्रेंचाइज़ी थी, जिसका स्वामित्व एक कंसोर्टियम के पास था। बीसीसीआई ने समय पर बैंक गारंटी न मिलने का हवाला देकर उनका अनुबंध रद्द कर दिया। इसके बाद KCPL और RSW ने मध्यस्थता की राह पकड़ी।

टीम में कौन-कौन थे?

टीम में अंतरराष्ट्रीय सितारे जैसे:

  • महेला जयवर्धने (कप्तान)
  • ब्रेंडन मैकुलम
  • रवींद्र जडेजा
  • वीवीएस लक्ष्मण
  • स्टीव स्मिथ शामिल थे। टीम केवल एक सीज़न खेली और आखिरी स्थान पर रही।

कानूनी विश्लेषण: मध्यस्थता आदेश का महत्व

BCCI जैसे बड़े संगठन के खिलाफ इतना बड़ा मध्यस्थता आदेश यह दर्शाता है कि:

  • संविदात्मक ज़िम्मेदारियाँ लागू होती हैं, चाहे पक्ष कोई भी हो।
  • अदालतें मध्यस्थता प्रक्रिया में सीमित हस्तक्षेप की नीति पर कायम हैं।
  • खेल प्रशासन में पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही अनिवार्य है।

नेताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

  • पूर्व न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू: “यह एक मिसाल बन सकता है कि खेल संगठन अनुबंधों का उल्लंघन नहीं कर सकते।”
  • क्रिकेट अर्थशास्त्री बोरिया मजूमदार: “यह फैसला आईपीएल के व्यावसायिक पक्ष को पुनर्संयोजन के लिए प्रेरित करेगा।”

BCCI के लिए चेताव

मध्यस्थता आदेश बरकरार रखा जाना BCCI के लिए कानूनी व वित्तीय झटका है। इससे यह संदेश जाता है कि खेल संगठनों को भी पारदर्शी और अनुबंधसम्मत कार्यशैली अपनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की संभावना जरूर है, लेकिन यह मामला भारतीय खेल कानून के लिए एक मील का पत्थर बन गया है।

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