“भारत चावल निर्यातक में विश्वसनीय पहचान की ओर अग्रसर,”
भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक ही नहीं, बल्कि सबसे भरोसेमंद भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने इस लक्ष्य को स्पष्ट रूप से उजागर किया है।
वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है, जो इसे इस क्षेत्र में एक निर्विवाद लीडर बनाता है। भारत का चावल उत्पादन 145 मिलियन मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो देश की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
देव गर्ग ने जोर देकर कहा कि भारत 172 देशों को बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात करता है, और स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाने से यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्तंभ बन गया है।
उनकी मानें तो, भारत की नई सोच उसे एक “विश्वसनीय” ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे देश वैश्विक खाद्य आपूर्ति का एक मुख्य आधार बन गया है।
बीआईआरसी 2025: भारत को वैश्विक चर्चा का केंद्र बनाने की पहल
भारत की चावल निर्यात आकांक्षाओं को साकार करने के लिए, आईआरईएफ द्वारा 30-31 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में “भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC 2025)” का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन चावल उद्योग का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा।
इस ऐतिहासिक आयोजन में 80 देशों से 1,000 अंतरराष्ट्रीय खरीदार भाग लेंगे, जो भारत के चावल की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सीधे अनुभव कर सकेंगे।
इस सम्मेलन में सिर्फ खरीदार ही नहीं, बल्कि देश भर से 5,000 से अधिक किसान भी शामिल होंगे, जिन्हें वैश्विक बाजार की जरूरतों और अवसरों को समझने का सीधा मौका मिलेगा।
इसके अलावा, 2,500 निर्यातक, पैकेजिंग निर्माता, मिल मालिक और अन्य हितधारक भी इस मंच का हिस्सा बनेंगे। देव गर्ग ने इस सम्मेलन को भारत को चावल व्यापार में एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
कृषि भारतीय सभ्यता की आत्मा है: पीयूष गोयल
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कृषि को “भारतीय सभ्यता की आत्मा” बताया। उन्होंने कहा कि चावल हमारे किसानों का गौरव है और बीआईआरसी 2025 भारत की विविधता और गुणवत्ता का प्रतीक होगा।
गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि यह सम्मेलन व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा और सरकार का लक्ष्य कृषि और कृषि-आधारित निर्यात को दोगुना करना है, बिना किसानों के हितों से कोई समझौता किए। गोयल ने इस पहल को किसानों, निर्यातकों, नीति निर्माताओं और खरीदारों को एक मंच पर लाने का एक ऐतिहासिक कदम बताया।
बीआईआरसी 2025 किसानों को सीधा लाभ देगा: प्रेम गर्ग
आई.आर.ई.एफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयान का स्वागत किया और इसे चावल निर्यात समुदाय के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि बीआईआरसी 2025 भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक है और यह सम्मेलन किसानों को सीधा लाभ देने वाला मंच साबित होगा। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक ही नहीं, बल्कि सबसे भरोसेमंद भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने इस लक्ष्य को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है, जो इसे इस क्षेत्र में एक निर्विवाद लीडर बनाता है। भारत का चावल उत्पादन 145 मिलियन मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो देश की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
देव गर्ग ने जोर देकर कहा कि भारत 172 देशों को बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात करता है, और स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाने से यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्तंभ बन गया है। उनकी मानें तो, भारत की नई सोच उसे एक “विश्वसनीय” ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे देश वैश्विक खाद्य आपूर्ति का एक मुख्य आधार बन गया है।
बीआईआरसी 2025: भारत को वैश्विक चर्चा का केंद्र बनाने की पहल
भारत की चावल निर्यात आकांक्षाओं को साकार करने के लिए, आईआरईएफ द्वारा 30-31 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में “भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC 2025)” का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन चावल उद्योग का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में 80 देशों से 1,000 अंतरराष्ट्रीय खरीदार भाग लेंगे, जो भारत के चावल की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सीधे अनुभव कर सकेंगे।
इस सम्मेलन में सिर्फ खरीदार ही नहीं, बल्कि देश भर से 5,000 से अधिक किसान भी शामिल होंगे, जिन्हें वैश्विक बाजार की जरूरतों और अवसरों को समझने का सीधा मौका मिलेगा। इसके अलावा, 2,500 निर्यातक, पैकेजिंग निर्माता, मिल मालिक और अन्य हितधारक भी इस मंच का हिस्सा बनेंगे। देव गर्ग ने इस सम्मेलन को भारत को चावल व्यापार में एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
कृषि भारतीय सभ्यता की आत्मा है: पीयूष गोयल
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कृषि को “भारतीय सभ्यता की आत्मा” बताया। उन्होंने कहा कि चावल हमारे किसानों का गौरव है और बीआईआरसी 2025 भारत की विविधता और गुणवत्ता का प्रतीक होगा। गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि यह सम्मेलन व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा और सरकार का लक्ष्य कृषि और कृषि-आधारित निर्यात को दोगुना करना है, बिना किसानों के हितों से कोई समझौता किए। गोयल ने इस पहल को किसानों, निर्यातकों, नीति निर्माताओं और खरीदारों को एक मंच पर लाने का एक ऐतिहासिक कदम बताया।
बीआईआरसी 2025 किसानों को सीधा लाभ देगा: प्रेम गर्ग
आई.आर.ई.एफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयान का स्वागत किया और इसे चावल निर्यात समुदाय के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि बीआईआरसी 2025 भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक है और यह सम्मेलन किसानों को सीधा लाभ देने वाला मंच साबित होगा। यह आयोजन भारत की गुणवत्ता और नवाचार को वैश्विक पहचान देगा।
प्रेम गर्ग ने यह भी कहा कि आई.आर.ई.एफ इस आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह आयोजन केवल व्यापार से बढ़कर, किसानों के कल्याण को भी केंद्र में लाएगा। यही कारण है कि भारत चावल निर्यातक बनने की दिशा में यह सम्मेलन एक मजबूत कदम होगा।
भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका
आज, भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक है, बल्कि वैश्विक चावल व्यापार में 40% की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा निर्यातक भी है। भारत ने चीन को पीछे छोड़कर उत्पादन में भी शीर्ष स्थान हासिल किया है। भारत की यह स्थिति वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कई देश अपनी चावल की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर हैं।
उत्पादन और निर्यात में निरंतर वृद्धि ने भारत चावल निर्यातक के रूप में अपनी एक मजबूत वैश्विक ब्रांड छवि बनाई है। इसी लक्ष्य को साकार करने के लिए, ये सभी प्रयास एक साथ किए जा रहे हैं ताकि भारत दुनिया का सबसे विश्वसनीय चावल निर्यातक बन सके।
यह आयोजन भारत की गुणवत्ता और नवाचार को वैश्विक पहचान देगा।
प्रेम गर्ग ने यह भी कहा कि आई.आर.ई.एफ इस आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह आयोजन केवल व्यापार से बढ़कर, किसानों के कल्याण को भी केंद्र में लाएगा। यही कारण है कि भारत चावल निर्यातक बनने की दिशा में यह सम्मेलन एक मजबूत कदम होगा।
भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका
आज, भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक है, बल्कि वैश्विक चावल व्यापार में 40% की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा निर्यातक भी है। भारत ने चीन को पीछे छोड़कर उत्पादन में भी शीर्ष स्थान हासिल किया है।
भारत की यह स्थिति वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कई देश अपनी चावल की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर हैं।
उत्पादन और निर्यात में निरंतर वृद्धि ने भारत चावल निर्यातक के रूप में अपनी एक मजबूत वैश्विक ब्रांड छवि बनाई है। इसी लक्ष्य को साकार करने के लिए, ये सभी प्रयास एक साथ किए जा रहे हैं ताकि भारत दुनिया का सबसे विश्वसनीय चावल निर्यातक बन सके।



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