“भोजशाला बसंत पंचमी उत्सव” सुरक्षा के कड़े पहरे में गूंजी वाग्देवी की स्तुति
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित 11वीं सदी की भोजशाला में आज आस्था और सतर्कता का अनूठा संगम देखने को मिला। भोजशाला बसंत पंचमी उत्सव 2026 के इस पावन अवसर पर, भारी सुरक्षा घेरे के बीच हजारों की संख्या में हिंदू भक्तों ने मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा-अर्चना की।
चूंकि इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार शुक्रवार के दिन पड़ा, इसलिए स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए कि पूरा परिसर एक सुरक्षित किले में तब्दील हो गया।
सूर्योदय के साथ ही हवन और पाठ की रस्में शुरू हो गईं, जो सूर्यास्त तक निरंतर जारी रहीं। भक्तों की लंबी कतारें इस बात का प्रमाण थीं कि सुरक्षा की कड़ाई के बावजूद आस्था का सैलाब कम नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक दखल और टाइम-शेयरिंग फार्मूला
इस साल विवादित स्थल पर पूजा और नमाज के समय को लेकर बने संशय को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया। कोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक विशेष टाइम-शेयरिंग फार्मूला दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने निर्देश दिया कि हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की पूरी अनुमति होगी।
वहीं, मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा करने का समय दिया गया। कोर्ट ने दोनों समुदायों से आपसी भाईचारा और सम्मान बनाए रखने की अपील की, ताकि किसी भी तरह के सांप्रदायिक टकराव से बचा जा सके। भोजशाला बसंत पंचमी उत्सव 2026 को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए गए थे।
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सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा और 8000 जवानों की तैनाती
कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए धार प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए। मौके पर जिला पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), मध्य प्रदेश आर्म्ड फोर्स, एसआरपीएफ (SRPF) और महिला पुलिस यूनिट सहित लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया।
पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी के अनुसार, पूरे धार शहर को 7 जोन में बांटा गया, जिसकी निगरानी एसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। मेटल डिटेक्टर स्कैनर के माध्यम से हर श्रद्धालु की सघन चेकिंग की गई। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद थी कि संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए एआई (AI) टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया गया।
ड्रोन और सीसीटीवी से ‘नो-फ्लाई जोन’ की हवाई निगरानी
आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पूरे भोजशाला परिसर और उसके 300 मीटर के दायरे को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित कर दिया गया। यहाँ ड्रोन, पैराग्लाइडर और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 10 अत्याधुनिक ड्रोनों के जरिए हवाई निगरानी की गई।
शोभा यात्रा के मार्ग पर भी ड्रोन से नजर रखी गई। भोजशाला बसंत पंचमी उत्सव 2026 के दौरान सोशल मीडिया की गतिविधियों पर भी चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग टीम काम करती रही ताकि कोई भी भ्रामक अफवाह न फैल सके।
प्रशासनिक कड़ाई: संदिग्धों पर कार्रवाई और प्रतिबंधात्मक आदेश
जिला मजिस्ट्रेट प्रियांक मिश्रा और एसपी मयंक अवस्थी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत सख्त निर्देश जारी किए। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 4,526 लोगों पर कार्रवाई की और लगभग 400 करोड़ रुपये के बॉन्ड भरवाए गए।
शहर में पेट्रोल-डीजल को बोतलों में बेचने और शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई। सड़कों पर मलबा, टायर या खाली खोखे रखने की भी मनाही थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में बाधा न आए। इसके अतिरिक्त, प्रिंटिंग प्रेस के लिए गाइडलाइन जारी की गई कि वे कोई भी भड़काऊ कंटेंट प्रकाशित न करें।
श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश नियम और पूजा की व्यवस्था
भोजशाला परिसर के भीतर मां सरस्वती की पूजा के लिए भव्य तैयारियां की गईं। पूरे परिसर को भगवा झंडों, फूलों और आकर्षक रंगोली से सजाया गया। चूंकि मूल वाग्देवी की मूर्ति लंदन के संग्रहालय में है, इसलिए गर्भगृह में देवी की एक तैल चित्र (Oil Painting) स्थापित की गई।
भक्तों को परिसर में केवल आवश्यक पूजा सामग्री जैसे अक्षत और फूल ले जाने की अनुमति दी गई। मोबाइल फोन, बैग, कैमरा और पानी की बोतलें ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। इसके साथ ही, धार कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि हिंदू और मुस्लिम पक्षों के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार तय किए गए थे।
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धार्मिक सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण आयोजन की मिसाल
इस वर्ष का भोजशाला बसंत पंचमी उत्सव 2026 धार्मिक सह-अस्तित्व का एक बड़ा उदाहरण बना। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए आने वाले लोगों की सूची प्रशासन को पहले से देनी पड़ी और केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया गया।
दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच जब मुस्लिम समुदाय नमाज अदा कर रहा था, तब भी सुरक्षाकर्मी मुस्तैद रहे। यह व्यवस्था भारत के विविध सांस्कृतिक ढांचे और कानूनी तालमेल को दर्शाती है, जहाँ परंपराओं का पालन प्रशासनिक देखरेख में शांतिपूर्ण ढंग से किया गया।
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अधिकारियों का आश्वासन और सफल समापन
धार कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि उत्सव का समापन बिना किसी रुकावट के होगा। संवेदनशील इलाकों में पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया ताकि नागरिकों में सुरक्षा का भाव बना रहे। शाम को सूर्यास्त के साथ ही हवन और पाठ की पूर्णाहुति हुई।
प्रशासन की मुस्तैदी और कोर्ट के दिशानिर्देशों के पालन ने यह सुनिश्चित किया कि हजारों की भीड़ होने के बावजूद एक भी अनहोनी नहीं हुई। यह सफल आयोजन धार जिले के प्रशासनिक प्रबंधन और जनता के सहयोग की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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