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मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल में लापरवाही, चूहे ने ली दो नवजातों की जान;

सरकारी अस्पताल में लापरवाही

इंदौर स्थित मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में सरकारी अस्पताल में लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां चूहों के काटने से दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जिसने पूरे प्रदेश को सकते में डाल दिया है। अस्पताल प्रशासन ने जहां इन मौतों का कारण जन्मजात विकृतियों और सेप्टीसीमिया बताया है, वहीं यह भी स्वीकार किया है कि बच्चों पर चूहों के काटने के निशान मौजूद थे। यह घटना 30-31 अगस्त की रात को हुई, जब दो शिशु अस्पताल के नवजात शिशुओं की सर्जरी से संबंधित विभाग की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती थे।

पहली और दूसरी मौत: अस्पताल प्रशासन की सफाई

पहली घटना में, 30-31 अगस्त की रात चूहों द्वारा काटे गए दो शिशुओं में से एक की मंगलवार को मौत हो गई। अस्पताल अधिकारियों ने इसकी वजह निमोनिया और अन्य जन्मजात जटिलताएँ बताईं। वहीं, एक दिन बाद, बुधवार को दूसरे नवजात की भी मौत हो गई। एमवायएच के उपाधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि इस बच्ची का वज़न सिर्फ 1.6 किलोग्राम था और वह सेप्टीसीमिया (रक्त विषाक्तता या रक्त संक्रमण) से पीड़ित थी। उनके अनुसार, बच्ची को जन्मजात विकृतियाँ थीं, जिसमें आंतों की विकृति भी शामिल थी, जिसके लिए सात दिन पहले उसका ऑपरेशन भी किया गया था। बच्ची के बाएँ हाथ की दो उंगलियों पर ‘हल्की खरोंचें’ थीं, लेकिन डॉ. वर्मा ने दावा किया कि मौत का कारण सेप्टीसीमिया था, न कि चूहों का काटना। बच्ची के परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।

एमवायएच के अधीक्षक अशोक यादव ने एनडीटीवी को बताया, “दोनों बच्चों को जन्मजात एनीमिया था और उन्हें बाहर से रेफर किया गया था। एक का वज़न 1 किलो और दूसरे का 1.6 किलो था और हीमोग्लोबिन भी कम था। बच्चों पर काटने के निशान थे, लेकिन इनसे मौत नहीं हुई।” यह बयान सरकारी अस्पताल में लापरवाही और अस्पताल प्रशासन की सफाई दोनों को उजागर करता है।

प्रशासन ने लिया एक्शन: कर्मचारियों पर कार्रवाई और जुर्माना

इस दर्दनाक घटना के बाद, अस्पताल प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के काटने की घटना की प्रारंभिक जांच के आधार पर, मंगलवार को दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और एक नर्सिंग अधीक्षक को पद से हटा दिया गया। कीट नियंत्रण और स्वच्छता के लिए जिम्मेदार निजी एजेंसी, द एजाइल कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उसे सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है।

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि एक विशेष बैठक हुई है, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत कीट नियंत्रण एजेंसी को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं, यदि चूहों से संबंधित कोई भी समस्या सामने आती है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी इस मामले में तत्काल कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने घटना की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है और बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन

इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने एमवाय अस्पताल के अधीक्षक को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में लापरवाही को राज्य सरकार की घोर लापरवाही बताया और कहा कि इंदौर में लगभग 10,000 चूहों के बिल हैं, जिन्हें सरकार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस मामले में जिम्मेदारी तय नहीं करती है, तो इंदौर कांग्रेस 9 सितंबर को संभागायुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उनका कहना है कि यह शर्मनाक है कि मालवा और निमाड़ क्षेत्र के गरीबों के लिए सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी घटना हुई। यह घटना सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाती है।

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