बिहार वोट चोरी साजिश: 80 लाख वोटर गायब, लोकतंत्र खतरे में
क्या वोट चोरों को बिहार वोट चोरी साजिश के तहत बिहार की जनता सबक सिखाएगी? बिहार के चुनावी रण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की काली करतूतें एक बार फिर उजागर हो रही हैं, पर यह कोई नई कहानी नहीं है, यह छल, कपट, बेईमानी और घृणा का वह पुराना खेल है, जिसे भाजपा हर चुनाव में खोलती है।
हालिया खुलासों से साफ है कि विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision, SIR) के नाम पर चुनाव आयोग ने बिहार में 65 लाख वोटरों के नाम काटने का दावा किया, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में 80 लाख से ज्यादा वोटर गायब हैं। यह कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है, जिसके तहत बिहार के गरीब, प्रवासी मजदूर, अल्पसंख्यक और युवा वोटरों को व्यवस्थित रूप से मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘वोट चोरी’ अभियान ने इस घिनौने खेल को बेनकाब किया है, कर्नाटक, महाराष्ट्र और अब बिहार में भाजपा की जीत का राज यही धांधली है। इंडिया गठबंधन की रैलियों में लाखों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं, और X (पूर्व ट्विटर) पर #VoteChori जैसे हैशटैग लाखों पोस्ट्स में आज भी ट्रेंड कर रहे हैं।
यह सिर्फ एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र का अपहरण है, और बिहार की जनता अब इस साजिश के खिलाफ खुलकर लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया, जब उसने चुनाव आयोग को कटे हुए नामों की सूची और उनके कारण बताने का आदेश दिया, लेकिन आयोग की चुप्पी और टालमटोल उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं। यह साफ है कि भाजपा की यह रणनीति सिर्फ वोट चुराने की नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को कुचलने की भी है।
गरीब, युवा और प्रवासी मजदूर निशाने पर: बेईमानी का काला अध्याय
भाजपा की बेईमानी का सबसे काला पहलू है बिहार में 80 लाख वोटों का सफाया, जो मुख्य रूप से इंडिया गठबंधन के समर्थकों का है। शोध से पता चलता है कि इनमें से 19 प्रतिशत युवा वोटर हैं, जिन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया, क्योंकि बिहार के युवा रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद केवल इंडिया गठबंधन से जोड़ते हैं।
तेजस्वी यादव की ‘नौकरी यात्रा’ और कांग्रेस के ‘रोजगार क्रांति’ अभियानों ने युवाओं को एकजुट किया है, और सर्वे (जैसे CSDS-Lokniti) दिखाते हैं कि 62% युवा मतदाता इस बार विपक्ष के साथ हैं। लेकिन भाजपा ने इस जन-लहर को कुचलने के लिए हर हथकंडा अपनाया।
आजतक और न्यूजलॉन्ड्री की जांच से पता चला कि 75 लाख प्रवासी बिहारी मजदूरों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म-6 भरने का मौका ही नहीं दिया गया, क्योंकि वे गुजरात, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर दलित, OBC और मुस्लिम समुदायों से हैं, जो भाजपा के खिलाफ वोट करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह भी सामने आया कि SIR के तहत 22 लाख ‘मृत’ वोटरों को हटाने का दावा झूठा था, कई जीवित लोग, जैसे मुजफ्फरपुर की रानी देवी, जिन्होंने 2020 में वोट दिया, अब ‘मृत’ घोषित हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है, जिसका मकसद इंडिया गठबंधन की जीत की संभावनाओं को खत्म करना है। बिहार के युवा अब इस चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं, और उनकी यह लड़ाई सिर्फ वोट की नहीं, बल्कि अपने खुद के भविष्य की है।
फर्जी वोटों का आयात और सांप्रदायिक इंटेंसिव रिवीजन
भाजपा की धांधली का एक और घिनौना चेहरा है अन्य राज्यों से फर्जी वोटों का आयात। द प्रिंट और रिपोर्टर्स कलेक्टिव की हालिया जांचों ने सनसनीखेज खुलासा किया कि उत्तर प्रदेश से 5,000 से ज्यादा संदिग्ध वोटरों को वाल्मीकि नगर और गोपालगंज जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में घुसेड़ा गया।
इन वोटरों के पास एक ही आधार और मोबाइल नंबर हैं, लेकिन अलग-अलग EPIC नंबर। और भी चौंकाने वाली बात यह कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के अवैध निवासियों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए गए हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट में पश्चिम चंपारण में 1,200 ऐसे वोटर मिले, जिनके पते फर्जी थे और जिनका कोई स्थानीय रिकॉर्ड नहीं था।
यह सब बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) के जरिए हो रहा है, जो ज्यादातर भाजपा समर्थित अधिकारियों के नियंत्रण में हैं। मुजफ्फरपुर में एक ही पते पर 300 वोटर दर्ज मिले, और जमुई में एक छोटे से घर में 500 वोटर! यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि ‘वोट आयात’ की सुनियोजित रणनीति है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक BLO को यह कहते सुना गया कि ‘ऊपर से ऑर्डर है, भाजपा के लिए वोटर जोड़ो’। यह वही भाजपा है, जो घुसपैठियों के खिलाफ भाषण देती है, लेकिन अपने हित में फर्जी वोटरों को घुसाने में माहिर है। बिहार की जनता अब इस विदेशी घुसपैठ से नहीं, बल्कि अलोकतांत्रिक घुसपैठ से जूझ रही है।
वहीं, घृणा की राजनीति का सबसे घिनौना रूप बिहार में देखने को मिला, जहां जाति और धर्म के आधार पर वोटरों को निशाना बनाया गया। मुस्लिम बहुल ढाका और सीमांचल क्षेत्रों में 80,000 से ज्यादा मुस्लिम वोटरों को हटाने की कोशिश हुई, ठीक उस समय जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘घुसपैठिया’ जैसे भड़काऊ बयान दे रहे थे।
द वायर की एक जांच में पता चला कि 15 सीटों पर 10 प्रतिशत डिलीशन सिर्फ अल्पसंख्यक और OBC समुदायों से हैं। आजतक की एक रिपोर्ट में गलत फोटो, मृत लोगों के नामों की मौजूदगी और महिलाओं के नामों में विसंगतियां सामने आईं, जैसे सीतामढ़ी में एक महिला का नाम ‘अज्ञात’ दर्ज था। यह SIR नहीं, बल्कि ‘सांप्रदायिक इंटेंसिव रिवीजन’ है। यह स्पष्ट रूप से बिहार वोट चोरी साजिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चुनाव आयोग की भूमिका: ‘चोरी विंग’ बनने के गंभीर आरोप
चुनाव आयोग की भूमिका अब पूरी तरह संदिग्ध हो चुकी है, यह संवैधानिक संस्था भाजपा का ‘चोरी विंग’ बनकर रह गई है। विश्लेषण से पता चलता है कि SIR के तहत 1.3 करोड़ संदिग्ध पते, 14 लाख डुप्लिकेट वोटर और 24 लाख घरों में 10 से ज्यादा (कुछ में 500 तक!) वोटर दर्ज हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जब आयोग से जवाब मांगा, तो उसने 22 लाख ‘मृत’ वोटरों की बात छिपाई। विपक्ष ने 89 लाख डिलीशन एप्लीकेशन दायर किए, लेकिन आयोग ने सिर्फ 29,000 एडिशन स्वीकार किए, यह खुला पक्षपात है। न्यूजलॉन्ड्री की एक रिपोर्ट में एक रिटायर्ड IAS अधिकारी ने खुलासा किया कि आयोग के कई अधिकारी भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं। योगेंद्र यादव जैसे विशेषज्ञों ने SIR को ‘स्टैगिंग लाई’ करार दिया, जो 2003 की सामान्य संशोधन प्रक्रिया से बिल्कुल अलग है।
आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा भी गायब वोटरों के कारणों को स्पष्ट नहीं करता, और RTI के जवाबों में सिर्फ गोलमोल बातें हैं। यह बिहार की जनता के साथ संवैधानिक विश्वासघात है, चुनाव आयोग अब निष्पक्षता का नहीं, बल्कि भाजपा की जीत का ठेकेदार बन चुका है।
बिहार की जनता अब इस ‘चुनाव चोरी आयोग’ के खिलाफ आवाज उठा रही है, और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इसका सबूत है कि यह लड़ाई अब कोर्ट से लेकर सड़क तक गूंज रही है। बिहार वोट चोरी साजिश का पर्दाफाश होना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
जनता की लड़ाई: हर वोट की रक्षा ही समाधान
अब वक्त आ गया है कि जनता खुद इस फर्जीवाड़े को रोके, क्योंकि बिहार में हर गांव और मोहल्ले में फर्जी वोट बन रहे हैं। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने लाखों लोगों को जागृत किया है। शोध बताता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद 30 लाख वोटर गायब हो चुके हैं, और यह संख्या अब बढ़कर 80 लाख के उपर पहुंच गई है।
बिहार के हर नागरिक को अपना, अपने परिवार का और अपने आसपास की वोटर लिस्ट चेक करनी होगी, फर्जी पते, डुप्लिकेट नाम, और संदिग्ध वोटरों के सबूत इकट्ठा करने होंगे। 20 दिनों में नया वोटर संरक्षण कानून, और 20 महीनों में हर परिवार को नौकरी का इंडिया गठबंधन ने वादा किया है।
X पर एक यूजर ने लिखा, ‘भाजपा ने वोट चुराया, लेकिन जनता अब चुप नहीं रहेगी’ यह जनता की आवाज है। बिहार के हर बूथ पर स्वयंसेवक तैयार हैं, जो फर्जी वोटरों को रोकेंगे। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की जंग है। हर वोटर को अपने मत की रक्षा करनी होगी, क्योंकि यह वोट सिर्फ एक निशान नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की नींव है।
भाजपा की यह भारतीय लोकतन्त्र के विरुद्ध साजिश का भांडे के अब फूटने का समय आ गया है। गहन विश्लेषण से साफ है: 4.6 लाख अस्पष्ट वोटर एडिशन, 47 लाख डिलीशन, और 1.3 करोड़ संदिग्ध पते, यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र का कत्लेआम है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार, विपक्ष का आंदोलन, और मीडिया की खोजी पत्रकारिता ने भाजपा को बेनकाब कर दिया है। लेकिन असली ताकत बिहार की जनता में है, युवा, महिलाएं, किसान, मजदूर सब इंडिया गठबंधन के साथ खड़े हैं। सर्वे (ABP-CVoter) दिखाते हैं कि 58% बिहारी मतदाता इस बार बदलाव चाहते हैं।
तेजस्वी यादव का नारा ‘नौकरी दो, वोट लो’ हर घर में गूंज रहा है। भाजपा को यह चेतावनी है: बेईमानी से बिहार नहीं जीत पाओगे। बिहार की धरती पर यह जंग सिर्फ वोट की नहीं, बल्कि सम्मान, रोजगार और समानता की है। जनता अब जाग चुकी है, फर्जी वोटों को रोकना ही होगा, कार्पोरेट हितैषी नहीं बल्कि जनता की हितैषी सरकार बनाओ, और इस संघी और भाजपाईयों की खूंखार साजिश को धूल में मिलाओ। उम्मीद बाकी है, बिहार जागेगा, भारत बदलेगा, वोट चोरों का अंत नजदीक है!
कई पार्टियों ने चुनावी मंचों पर बिहार वोट चोरी साजिश का जिक्र किया।बिहार वोट चोरी साजिश का आरोप इस बार राजनीति की हवा और तेज़ कर रहा है।



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