BMC चुनाव PADU विवाद क्या यह लोकतंत्र पर तकनीकी प्रहार है?
BMC चुनाव PADU विवाद लोकतंत्र की जड़ों पर एक करारा प्रहार है, जो चुनाव आयोग की मनमानी और अस्पष्टता को पूरी तरह उजागर करता है। मुंबई नगर निगम के चुनावों में अचानक उदय हुई PADU (Printing Auxiliary Display Unit) नामक इस तथाकथित मशीन ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित यह मशीन दावा करती है कि EVM के कंट्रोल यूनिट (CU) में तकनीकी खराबी आने पर यह वोट गिनती को प्रदर्शित कर सकती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इसका पहला इस्तेमाल बिना किसी पूर्व सूचना या व्यापक सार्वजनिक चर्चा के क्यों किया जा रहा है?
चुनाव आयोग का यह तर्क कि यह केवल एक ‘बैकअप’ है और इसका उपयोग केवल दुर्लभ मामलों में ही होगा, एक बेहद कमजोर बहाना नजर आता है।
विशेष रूप से तब, जब देश में हुए बड़े लोकसभा या विधानसभा चुनावों में इसकी कभी कोई जरूरत महसूस नहीं की गई। क्या यह मशीन वोटरों की इच्छा को हाईजैक करने का नया हथियार है, या सिर्फ सिस्टम की विफलता को छिपाने का एक तरीका?
पार्टियों को अंधेरे में रखकर तकनीकी गड़बड़ी का खेल
मुंबई के दो महत्वपूर्ण वार्डों, घाटकोपर और कुर्ला में इस मशीन का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है। यहाँ तकनीकी गड़बड़ी का बहाना बनाकर राजनीतिक पार्टियों को बहुत देरी से सूचित किया गया, जो सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी की भारी कमी को दर्शाता है।
चुनाव आयोग की यह कार्यप्रणाली दर्शाती है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे कुछ ऐसा चल रहा है जिसे जनता से छिपाया जा रहा है। जब मतदान और मतगणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता ही सबसे बड़ा स्तंभ है, तो ऐसे में ‘लास्ट-मिनट’ बदलाव संशय पैदा करने के लिए काफी हैं।
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कानूनी बैकिंग के बिना नई मशीन का प्रवेश
विपक्षी पार्टियों जैसे शिवसेना (UBT), AAP और MNS के नेताओं, खासकर राज ठाकरे का इस मशीन पर हमला पूरी तरह जायज है। BMC चुनाव PADU विवाद इस बात पर भी केंद्रित है कि यह मशीन संसद में किसी कानून को पारित किए बिना ही चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बना दी गई है।
चुनाव आयोग आखिर कैसे बिना किसी विधायी मंजूरी के एक नई मशीन को जोड़ सकता है? राज ठाकरे का यह सवाल कि क्या यह ‘वोट चोरी’ का कोई नया प्रयोग है, हवा में नहीं है। PADU को एक साधारण ‘काउंटिंग मशीन’ बताकर चुपचाप जोड़ देना एक बड़े छलावे जैसा लगता है।
ब्लैक बॉक्स और हैकिंग की आशंकाएं
अगर यह मशीन एक ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह काम करती है, तो इसमें हैकिंग की संभावना को कैसे नकारा जा सकता है? क्या इस बात का कोई पुख्ता सबूत है कि यह मशीन 3 वोटों को 13 या 23 में नहीं बदल रही? अंततः जनता के पास सिर्फ आयोग के शब्दों पर भरोसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
BMC चुनावों से महज 2-3 दिन पहले राजनीतिक दलों को यह मशीन दिखाई गई, जिसे कम समय के कारण कोई ठीक से समझ नहीं पाया। इसके बावजूद इसे लागू कर देना लोकतंत्र नहीं, बल्कि एकतरफा तानाशाही का नमूना है।
लोकसभा और विधानसभा से अलग नियम क्यों?
चुनाव आयोग का यह बचाव कि PADU केवल मुंबई में इस्तेमाल होगा और वह भी केवल EVM फेल होने पर, एक खोखला दावा प्रतीत होता है। अगर यह तकनीक इतनी ही निर्दोष और सहायक है, तो इसे राष्ट्रीय स्तर के चुनावों में क्यों नहीं अपनाया गया?
मुंबई नगर निगम के लिए विशेष रूप से M3A EVM और सिंगल वोट सिस्टम को क्यों चुना गया, जबकि अन्य नगर निगमों में मल्टीपल वोटिंग सिस्टम काम कर रहा है? आयोग का कहना है कि VVPAT की अनुपस्थिति के कारण PADU जरूरी है, लेकिन क्या इससे वोटरों का विश्वास वास्तव में बढ़ेगा या और घट जाएगा?
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वोट मैनिपुलेशन का छिपा हुआ टूल?
मतगणना के दौरान कंट्रोल यूनिट (CU) को बैलेट यूनिट (BU) से जोड़ने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्रीय चुनावों में जब सिर्फ CU ही गिनती के लिए पर्याप्त होता है, तो यहाँ BU की जरूरत क्यों पड़ रही है?
ये तमाम असंगतियां इस संदेह को जन्म देती हैं कि BMC चुनाव PADU विवाद दरअसल वोट मैनिपुलेशन का एक छिपा हुआ जरिया हो सकता है। चुनाव आयोग की इस पूरे मामले पर चुप्पी और अंतिम क्षणों में की गई घोषणाएं जनता के साथ विश्वासघात के समान हैं।
सोशल मीडिया पर ‘वोट चोरी का वाइल्ड कार्ड’
ट्रांसपेरेंसी की भारी कमी PADU को एक बड़े घोटाले की तरह पेश करती है। न तो इसका कोई स्वतंत्र ऑडिट हुआ है, न कोई पब्लिक डेमो और न ही इसकी कोई कानूनी मान्यता है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे ‘वोट चोरी का वाइल्ड कार्ड’ कह रहे हैं।
एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने तो यहाँ तक दावा किया है कि PADU पहले से ही ‘प्री-ऑथेंटिकेटेड’ है ताकि सत्ताधारी महायुति की जीत सुनिश्चित की जा सके। मुंबई की अमीर नगर निगम पर कब्जा करने की यह कथित साजिश 140 PADU यूनिट्स के आगमन से और भी स्पष्ट होती दिख रही है।
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लोकतंत्र की आत्मा पर तकनीकी प्रहार
BMC चुनाव PADU विवाद ने EVM और VVPAT से जुड़े पुराने विवादों को एक नया और खतरनाक आयाम दे दिया है। मुंबई नॉर्थ वेस्ट जैसे मामलों में, जहाँ पहले ही EVM अनलॉक करने के लिए फोन के इस्तेमाल के आरोप लगे थे, वहाँ PADU जैसे नए डिवाइस संदेह की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।
विपक्षी दलों का यह आरोप कि यह ‘डेमोक्रेसी का मर्डर’ है, अतिशयोक्ति नहीं लगता। जब तक इस ब्लैक बॉक्स का पूर्ण डिस्क्लोजर और इंडिपेंडेंट ऑडिट नहीं होता, तब तक वोट की पवित्रता तकनीकी बहानों के नीचे कुचली जाती रहेगी। समय आ गया है कि वोटर जागें, क्योंकि संस्थागत असफलता के इस दौर में चुप्पी ही ऐसी साजिशों को पनपने का मौका देती है।
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