महायुति का चुनावी गणित: मुंबई BMC चुनाव में 200 सीटों पर डील पक्की
महायुति का चुनावी गणित मुंबई में नगर निगम चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों के लिए अपनी सीट-बंटवारे की व्यवस्था को लगभग अंतिम रूप दे दिया है।
शहर में जनवरी के मध्य में होने वाले मतदान की तैयारी के बीच, कुल 227 वार्डों में से लगभग 200 वार्डों के आवंटन पर दोनों दलों के बीच आम सहमति बन गई है। महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के इन दो प्रमुख साझेदारों ने नामांकन की समय सीमा से काफी पहले सीट मैट्रिक्स और उम्मीदवारों की सूची को फाइनल करने के लिए देर रात तक मैराथन बैठकें की हैं।
उच्च दांव वाले इस चुनाव से पहले रणनीतिकारों का पूरा ध्यान मुंबई के विविध वार्डों में चुनावी ताकत और संगठनात्मक उपस्थिति को संतुलित करने पर केंद्रित रहा है।
देर रात तक बैठकों का दौर और रणनीतिक तालमेल
खबरों के अनुसार, गठबंधन की एकता को बनाए रखते हुए ‘विनेबिलिटी’ (जीतने योग्य सीटों) को अधिकतम करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के आवासों और पार्टी कार्यालयों में रात भर चर्चाएं जारी रहीं। दोनों खेमे मतभेदों को सुलझाने और महानगर में अपनी-अपनी ताकत को दर्शाने वाले एक ठोस ढांचे पर सहमत होने के लिए काम कर रहे हैं।
हालांकि 200 वार्डों पर खाका तैयार हो चुका है, लेकिन शेष 27 सीटों और विशिष्ट उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा अभी भी जारी है। नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह प्रक्रिया स्थानीय मतदाता गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए गठबंधन के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप बनाई गई है।
महायुति का चुनावी गणित केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई, पनवेल, छत्रपति संभाजी नगर और मीरा-भयंदर जैसे अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
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विपक्ष की जवाबी रणनीति और प्रकाश अंबेडकर से कांग्रेस की गुफ्तगू
सत्ताधारी गठबंधन की तैयारियों के बीच विपक्षी दल भी अपनी योजनाओं को फिर से तैयार करने में जुटे हैं। मुंबई में कांग्रेस नेताओं ने अपनी चुनावी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ परामर्श निर्धारित किया है।
यह कदम बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के जवाब में एक मजबूत विकल्प पेश करने की कोशिश माना जा रहा है। विपक्षी गठबंधन के भीतर सीट आवंटन, संयुक्त अभियान रणनीतियों और मतदाताओं को जमीनी स्तर पर एकजुट करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कांग्रेस और VBA के बीच होने वाली यह चर्चा आगामी नागरिक चुनावों के परिणामों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
ठाकरे चचेरे भाइयों का ‘महा-गठबंधन’ और विपक्षी समीकरण
मुंबई की राजनीति में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने एक साथ आने की घोषणा की। यह गठबंधन पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का एक बड़ा मिलाप है, जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) भी शामिल है।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने पुष्टि की है कि उनकी पार्टी MNS और NCP (SP) के साथ मिलकर BMC चुनाव लड़ेगी। शरद पवार का इस गठबंधन में शामिल होना तब तय हुआ जब उन्होंने अजीत पवार गुट के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें उनकी पार्टी को केवल 35 सीटें देने की पेशकश की गई थी।
महायुति का चुनावी गणित बिगाड़ने के लिए ठाकरे भाइयों का यह तालमेल मुकाबले को बहुकोणीय और बेहद प्रतिस्पर्धी बना रहा है।
सीट बंटवारे को लेकर ठाकरे खेमे में तनाव और लॉबिंग
भले ही उद्धव और राज ठाकरे ने गठबंधन का ऐलान कर दिया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच बेचैनी साफ देखी जा रही है। दादर, चारकोप, बोरीवली, कांदिवली और भांडुप जैसे मराठी-बहुल वार्डों में दोनों दलों के नेता अपने पक्ष में सीटें हासिल करने के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहे हैं।
हालांकि दोनों नेताओं ने अब तक सीट बंटवारे के किसी निश्चित फॉर्मूले का खुलासा नहीं किया है। उन्हें डर है कि समय से पहले घोषणा करने पर प्रतिद्वंद्वी दल उनके कार्यकर्ताओं को तोड़ सकते हैं या पार्टी के भीतर विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है।
UBT सेना के नेताओं का मानना है कि मुंबई और मराठी अस्मिता के हित में कुछ कार्यकर्ताओं को टिकट न मिलने पर भी समझौता करना होगा।
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ठाणे और मुंबई में बीजेपी-शिवसेना के बीच पेच
भले ही देवेंद्र फडणवीस एकजुटता का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर कुछ जगहों पर संघर्ष की स्थिति भी है। विशेष रूप से ठाणे नगर निगम, जिसे शिवसेना का गढ़ माना जाता है, वहां विवाद गहरा गया है। ठाणे की 131 सीटों में से शिवसेना (शिंदे गुट) बीजेपी को केवल 25-30 सीटें देना चाहती है, जबकि बीजेपी 40-45 सीटों पर अड़ी है।
इस खींचतान के बीच दोनों पार्टियों ने ठाणे में स्वतंत्र रूप से प्रचार शुरू कर दिया है। बीजेपी के ‘नमो भारत, नमो ठाणे’ के पोस्टरों से शिवसेना में नाराजगी है क्योंकि उनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीर गायब थी। महायुति का चुनावी गणित इन स्थानीय मतभेदों को सुलझाने की चुनौती से भी जूझ रहा है।
बीजेपी की संकल्प रैली और फडणवीस का कड़ा रुख
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि भले ही कुछ सीटों पर असहमति हो, लेकिन महायुति एकजुट है। उन्होंने बीजेपी नेताओं को शिंदे की पार्टी की आलोचना न करने की सलाह दी है। फडणवीस ने ठाकरे भाइयों के गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे का असली चेहरा अब जनता के सामने आ गया है।
उन्होंने संकल्प दोहराया कि “अंधेरा छटेगा, सूरज उगेगा और कमल खिलेगा।” उनका लक्ष्य नगर निगम में पारदर्शी और ईमानदार शासन स्थापित करना है।
15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान और 16 जनवरी को आने वाले नतीजों पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसे आने वाले राज्य और राष्ट्रीय चुनावों का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
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मुंबई की सत्ता का अंतिम फैसला
जैसे-जैसे नामांकन की प्रक्रिया करीब आ रही है, सभी दल अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और मतदाताओं को लुभाने के लिए अंतिम दांव चल रहे हैं। सत्ताधारी खेमे में महायुति का चुनावी गणित सावधानीपूर्वक बातचीत और रणनीतिक योजना पर आधारित है, ताकि देश के सबसे अमीर नगर निगम पर नियंत्रण हासिल किया जा सके।
दूसरी तरफ, ठाकरे भाइयों और शरद पवार का गठबंधन इस चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना रहा है। उम्मीदवारों के चयन, अभियान संदेशों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने महाराष्ट्र की राजनीति में चुनावी तीव्रता को चरम पर पहुंचा दिया है।
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